Friday, February 20, 2026

अयोध्या राजशाही की वर्तमान समय की विभिन्न गतिविधियां और राजसदन को उच्चीकृत किया जान :: ✍️आचार्य डॉ राधेश्याम द्विवेदी


शैलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र वर्तमान प्रमुख हैं 

विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र का निधन 23 अगस्त 2025 की देर रात हुआ था। विमलेंद्र मिश्रा के छोटे भाई शैलेंद्र प्रताप मिश्र अयोध्या के साकेत महा विद्यालय की प्रबंध समिति के अध्यक्ष हैं।

वेअयोध्या राजवंश से जुड़ी व्यवस्था को देखते हैं। विमलेंद्र के निधन के बाद, उनके छोटे भाई शैलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र इस परंपरा और राजवंश के संरक्षक के रूप में जाने जाते हैं, जो अयोध्या के सामाजिक और धार्मिक कार्यों में सक्रिय हैं।

अपर्णा मिश्र

अपर्णा मिश्र अयोध्या के राजा मानसिंह ‘द्विजदेव’ की वंशावली में चौथी पीढ़ी में राजकुमारी विमला देवी एवं डॉ. रमेन्द्र मोहन मिश्र की पाँचवीं सन्तान के रूप में हैं। डॉ. अपर्णा मिश्र का 12 सितम्बर, 1970 को अयोध्या में जन्म हुआ। हिन्दी साहित्य में डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्व विद्यालय से एम.ए. करने के उपरान्त उन्होंने इसी विश्वविद्यालय से ‘हिन्दी रीतिकाव्य का विकास और महाराजा मानसिंह ‘द्विजदेव’ की काव्य-साधना’ विषय पर शोध उपाधि प्राप्त की। साहित्य के अध्ययन, अनुशीलन के साथ ही अपर्णा मिश्र ने संगीत की भी शिक्षा ली है। वे आकाशवाणी केन्द्र, लखनऊ की अवधी लोकगायन विधा में ‘बी-हाई ग्रेड’ की नियमित कलाकार हैं। सन् 2003 से अयोध्या स्थित महाराजा पब्लिक स्कूल का कुशलतापूर्वक संचालन करते हुए उसकी अवैतनिक निदेशिका के तौर पर कार्यरत हैं। उन्हें अवधी के लोकगीतों के संरक्षण और संकलन में विशेष रुचि है। 2014 में उत्तर प्रदेश सरकार ने मलाला दिवस के अवसर पर, जिसे ‘कन्या शिक्षा और सुरक्षा दिवस’ घोषित किया गया है, इन्हें सम्मानित किया। आजकल कामता प्रसाद सुन्दरलाल साकेत स्नातकोत्तर महाविद्यालय, अयोध्या में असिस्टेंट प्रोफ़ेसर के पद पर कार्यरत हैं।

मंजरी मिश्रा

विमलेंद्र प्रताप मिश्र की मंजरी मिश्रा बेटी है। जो मां की स्मृति में कला शिल्प की एक संस्था “शिल्प मंजरी” चलाती है। राजकुमारी मंजरी मानती हैं, कि “वह बहुत भाग्यशाली थीं कि, उनका जन्म ऐसे परिवार में हुआ, जिसकी इतनी समृद्ध विरासत रही है।” वह अवध में ही पली- बढ़ीं हैं। राजकुमारी मंजरी मिश्र का अपना खुद का व्यवसाय है, जिसमें वह साड़ी, कपड़ा और आभूषणों का व्यापार करती हैं। उनके ब्रांड का नाम "शिल्प मंजरी" है। अयोध्या या अवध अपनी पारंपरिक हस्तकला जैसे आरी, जरदोजी और चिकनकारी के लिए प्रसिद्ध है। इस हुनरमंद काम को करने वाले कई कारीगर अयोध्या और फैजाबाद में रहते थे तथा पीढ़ियों से मिश्र परिवार के लिए काम कर रहे हैं। लेकिन चूँकि स्थानीय स्तर पर उनके लिए पर्याप्त काम नहीं था, इसलिए इनमें से कई कारीगरों को जीविकोपार्जन के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता था। हालांकि राजकुमारी मंजरी मिश्र इनके लिए अँधेरे में चिराग लेकर आई, और "शिल्प मंजरी" नामक एक शिल्प परियोजना उन्होंने इन्हीं कारीगरों की मदद करने के लिए शुरू की है। इस परियोजना के माध्यम से, वह कई होनहार कारीगरों को रोजगार देती है, जिनमें से अधिकांश मुस्लिम होते हैं।

यतींद्र मोहन प्रताप मिश्र 

विमलेंद्र प्रताप मिश्र के बेटे यतींद्र प्रताप सहित्यकार हैं। यतीन्द्र मिश्र युवा हिन्दी कवि, सम्पादक, संगीत और सिनेमा अध्येता हैं। वे  प्रख्यात संगीतकार और राष्ट्रीय कवि हैं। यतींद्र ने लता मंगेशकर पर ‘लता सुर गाथा’ नामक प्रसिद्ध पुस्तक लिखी, जिस पर उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।उनके अब तक चार कविता- संग्रह- ‘यदा-कदा’, ‘अयोध्या तथा अन्य कविताएँ’, ‘ड्योढ़ी पर आलाप’ और ‘विभास’; शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी पर एकाग्र ‘गिरिजा’, नृत्यांगना सोनल मानसिंह से संवाद पर आधारित ‘देवप्रिया’ तथा शहनाई उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ के जीवन व संगीत पर ‘सुर की बारादरी’ प्रकाशित हैं। प्रदर्शनकारी कलाओं पर ‘विस्मय का बखान’, कन्नड़ शैव कवयित्री अक्क महादेवी के वचनों का हिन्दी में पुनर्लेखन ‘भैरवी’, हिन्दी सिनेमा के सौ वर्षों के संगीत पर आधारित ‘हमसफ़र’ के अतिरिक्त फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं एवं गीतों के चयन क्रमशः ‘यार जुलाहे’ तथा ‘मीलों से दिन’ नाम से सम्पादित हैं। गिरिजा’ और ‘विभास’ का अंग्रेज़ी, ‘यार जुलाहे’ का उर्दू तथा अयोध्या शृख़ला कविताओं का जर्मन अनुवाद प्रकाशित हुआ है। इनके अतिरिक्त वरिष्ठ रचनाकारों पर कई सम्पादित पुस्तकें भी प्रकाशित हैं। इन्हें भारतीय ज्ञानपीठ फैलोशिप, रज़ा सम्मान, भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कार, हेमन्त स्मृति कविता सम्मान सहित भारत सरकार के संस्कृति मन्त्रालय की कनिष्ठ शोधवृत्ति एवं सराय, नयी दिल्ली की स्वतन्त्र शोधवृत्ति मिली हैं। इन्होंने दूरदर्शन (प्रसार भारती) के कला-संस्कृति के चैनल डी.डी. भारती के सलाहकार के रूप में सन् 2014-2016 तक अपनी सेवाएँ दी हैं।    

     साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिका, इंग्लैण्ड, मॉरीशस एवं अबु धाबी की यात्राएँ की हैं। अयोध्या में रहते हैं तथा समन्वय व सौहार्द के लिए ‘विमला देवी फाउण्डेशन न्यास’ के माध्यम से सांस्कृतिकगतिविधियाँ संचालित करते हैं।

      दिनांक 7 अप्रैल 2017 को फिल्म समारोह निदेशालय, भारत सरकार द्वारा वाणी प्रकाशन से आई यतीन्द्र मिश्र की पुस्तक 'लता सुर-गाथा' को 'स्वर्ण कमल' से सम्मानित करने की घोषणा की गयी थी। वह विविध भारती में अपनी सेवा दे चुके हैं. अभी विमलेंद्र मिश्र मां विमला देवी के नाम से समाजसेवी संस्था 'विमला देवी फाउंडेशन न्यास' चलाते हैं. संस्‍था राष्ट्रीय स्तर पर साहित्य, संगीत, कला के लिए काम करती है.यतीन्द्र मोहन प्रताप मिश्र ख्यातिलब्ध साहित्यकार होने के साथ- साथ विविध भारती के सलाहकार के पद पर कार्यरत हैं। वे प्रख्यात संगीतकार और राष्ट्रीय कवि हैं। यतींद्र ने लता मंगेशकर पर ‘लता सुर गाथा’ नामक प्रसिद्ध पुस्तक लिखी, जिस पर उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है।

राजमहल को हेरिटेज होटल की शक्ल देकर नयी पहचान देने की कोशिश

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान्  श्रीराम की नगरी में आध्यात्म के साथ-साथ धार्मिक नगरी की शानो शौकत का प्रतीक अयोध्या राजपरिवार का राजमहल को अब हेरिटेज होटल की शक्ल देने की तैयारी पूरी की जा रही है और इसका खाका तैयार कर लिया गया है। प्रदेश सरकार से इसकी अनुमति भी मिल गयी है। अयोध्या नगर के बीचों बीच स्थित राजसदन के विशाल प्रांगण में अयोध्या के राजपरिवार के सभी सदस्य रहते हैं, लेकिन अयोध्या राजा विमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के अनुरोध पर प्रदेश सरकार ने इस राजमहल को एक हेरिटेज होटल के रूप में विकसित करने का रास्ता साफ़ कर दिया है। वहीं राजपरिवार ने भी हेरिटेज होटल के रूप में राजसदन का पंजीकरण करा लिया है।

आधुनिक सुख सुविधाओं से लैस होगा

दुनिया में धार्मिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध अयोध्या को विश्व के पर्यटन मानचित्र पर उभारने के लिए राजस्थान और मध्य प्रदेश के पुराने शहरों में स्थित राज महलों की तर्ज पर अयोध्या राजवंश परिवार के राजसदन को हेरिटेज होटल की शक्ल के रूप में विकसित किया जाएगा, जिसके लिए निर्माण सम्बन्धी खाका तैयार किया जा रहा है। राजमहल के विशाल परिसर में स्थित सुन्दर भवन और उसमें बने विभिन्न कमरों का रंग रोगन कर उन्हें नर्इ शक्ल दिए जाने की योजना है। वहीं परिसर में मौजूद प्राचीन स्थापत्य कला के नमूनों को भी संरक्षित कर उन्हें पर्यटकों के सामने पेश करने की योजना है।

लेखक परिचय:-

(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए सम सामयिक विषयों,साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करते रहते हैं। वॉट्सप नं.+919412300183)







 


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