उपाध्याय विश्व की प्राचीनतम भाषा देववाणी संस्कृत का एक लोकप्रचलित उपाधि नाम है जो गुरुकुल के उन आचार्यों के लिए इस्तेमाल में लिया जाता है, जो भारतवर्ष में अनादिकाल से लेकर उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य तक गुरु-शिष्य परम्परा के तहत गुरुकुल में अपने विद्यार्थियों को पढ़ाया करते थे। स्नातक, परास्नातक और उच्च शोध शिक्षा प्रणाली को इजाद करने वाले भारत के उपाध्यायों की गुरुकुल शिक्षा प्रणाली विश्वभर में सबसे ज्यादा चर्चित रही हैं। भारत के गुरुकुल और उसके उपाध्यायों का इतिहास बेहद ही प्राचीनतम और ब्यापक है, जिसे महज किसी भी लेख और ऐतिहासिक ग्रँथ में समेटना पूरी तरह असंभव है। भारत का सम्पूर्ण इतिहास,समयचक्र के हिसाब से प्रचलित प्रत्येक कालखंड (सतयुग, द्वापर, त्रेता, कलयुग) चारों वेद,छह शास्त्र, अठारह पुराण, उपनिषद समेत सभी महान ग्रन्थों में गुरुकुल और उनके उपाध्यायों का विशेष और विस्तृत वर्णन है।
"उपाध्याय" Upadhyay- (संस्कृत - उप + अधि + इण घं) इस शब्द की व्युत्पत्ति इस प्रकार की गई है- 'उपेत्य अधीयते अस्मात्' जिसके पास जाकर अध्ययन किया जाए,वह उपाध्याय कहलाता है।
वैदिक काल से ही गुरुकुल के शिक्षकों को उपाध्याय कहा जाता था। सरल शब्दों में यदि कहा जाय तो गुरुकुलों में विद्यार्थियों को पढ़ाने वाला गुरु जिसे वर्तमान में शिक्षक,आचार्य या अध्यापक कहा जाता है। इस प्रकार वर्तमान समय तक आते आते गुरु और ब्राह्मणों की एक उपजाति की उपाधि भी बन गई है।
ज्ञान-विज्ञान सम्पूर्ण ब्रह्मण्ड का ज्ञाता
रामायण और महाभारत में स्पष्ट उल्लेख किया है कि ज्ञान-विज्ञान की समस्त शाखाओं, उप शाखाओं, वेद-ग्रँथ, शास्त्र के साथ शस्त्र अर्थात युद्ध विद्या समेत सम्पूर्ण ब्रह्मण्ड की ज्ञात और अदृश्य विद्याओं को गुरुकुल में विद्यार्थियों को सहज पढ़ाने की योग्यता रखने वाले गुरु या शिक्षक को उपाध्याय,कुलपति या आचार्य की संज्ञा दी गई।
यदि भारत देश का प्राचीनकाल से लेकर वर्तमान काल तक का इतिहास उठाकर देखा जाये तो भारतवर्ष में जब भी विदेशी आक्रांताओं ने हमला किया और देश गुलामी की जंजीरों में जकड़ा,तब-तब उसकी सबसे बड़ी कीमत भारत के गुरुकुलों और उनके उपाध्यायों को चुकानी पड़ी। चूंकि सनातन सभ्यता को जीवंत रखने वाले गुरुकुल के उपाध्यायों के द्वारा देश के युवाओं को श्रेष्ठतम स्तर की शिक्षा- दिक्षा और उन्नत परवरिश देकर आदर्श नागरिकों का निर्माण किया जाता था।
कालखंड-युगों में उपाध्याय शब्द प्रचलित
कालखंड के हिसाब से सभी युगों में गुरुकुल के अध्यापकों के लिये देवभाषा सँस्कृत में उपाध्याय शब्द का इस्तेमाल किया गया है। विश्व के सबसे प्राचीनतम महाग्रन्थ वेदों में इसका विस्तार से वर्णन है। त्रेता युग में त्रिकालदर्शी आदिकवि महर्षि बाल्मीकि द्वारा रचित महाग्रंथ रामायण के बालकाण्ड में सीता स्वयंवर के समय जब भगवान राम ने शिवजी का धनुष भंग कर स्वयंवर जीता, तब राजा जनक के राजकुल पुरोहित,आचार्य सदानन्द अपने राजा जनक और मुनि विश्वामित्र से प्रार्थना करते हैं कि अयोध्या के राजा दशरथ एवं उनके गुरुकुल उपाध्याय को स्वयंवर का सन्देश पत्र प्रेक्षित किया जाना चाहिए। तब राजा जनक अपनी ओर से लिखे पत्र में राजा दशरथ को अपने गुरुकुल उपाध्याय महर्षि वशिष्ठ समेत सभी आचार्यों को अपने साथ लेकर राम सीता विवाह का निमंत्रण भेजते हैं। द्वापर युग में भी भगवान कृष्ण के बेहद अल्प समय में गुरूकुल उपाध्याय मुनि संदीपनी से शिक्षा गृहण करने का वर्णन है। कुलमिलाकर वैदिककालीन इतिहास,वेद-पुराण, शास्त्र, उपनिषद, रामायण, महाभारत, मध्यकालीन भारत का इतिहास,आधुनिक भारत का इतिहास सभी जगह गुरुकुल के आचार्यों, अध्यापकों के लिए देववाणी संस्कृत में उपाध्याय शब्द का प्रयोग किया गया है।
उपाध्याय ब्राह्मण परंपरागत रूप से पुरोहिती, अध्यापन (शिक्षण), और विद्या के प्रति समर्पित रहे हैं, जिन्हें प्राचीन समाज में विद्या और वेदों के ज्ञानी के रूप में सम्मान प्राप्त था।
उपाध्याय जिझौतिया ब्राह्मणों का उपनाम
उपाध्याय जिझौतिया ब्राह्मणों का एक उपनाम है। जिझौतिया ब्राह्मणों में उपाध्याय उपनाम अंतर्गत चार गोत्र – शांडिल्य, सांकृत, भरद्वाज एवं वत्स हैं। उपाध्याय उपनाम एवं भरद्वाज गोत्र का आदिग्राम महजौली (माजौली) है जो बुन्देलखण्ड क्षेत्र में उत्तर प्रदेश राज्य के हमीरपुर जिला में राठ तहसील अंतर्गत गोहाण्ड के निकट स्थित है। महजौली में “कालीमाई” का मंदिर है जो “महामाई” के नाम से प्रसिद्द है। भरद्वाज गोत्र में तीन प्रवर – भरद्वाज,अंगिरा और वार्हस्पत्य हैं। जिझौतिया ब्राह्मण अंतर्गत उपाध्याय उपनाम व भरद्वाज गोत्र के वेद – यजुर्वेद , उपवेद – धनुर्वेद , शाखा – माध्यन्दिन , सूत्र – कात्यायन, छन्द – अनुष्टुप , शिखा – दक्षिण , पाद – दक्षिण , देवता – शिव एवं कुलदेवता – गुसाईं बाबू हैं। इनमें कुल पूजा का समय भाद्रशुक्ल दोज है।
उल्लेखनीय चर्चित लोग
अमर उपाध्याय, भारतीय मॉडल, फिल्म और टेलीविजन अभिनेता का नाम था।आमोद प्रसाद उपाध्याय (जन्म 1936), नेपाली सामाजिक कार्यकर्ता और राजनीतिज्ञ हैं।अयोध्या प्रसाद उपाध्याय 'हरिऔध' हिंदी साहित्य के लेखक रहे हैं।ब्रह्मबंधव उपाध्याय बंगाली ब्राह्मण, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी कालीचरण बनर्जी के भतीजे रहे।छबीलाल उपाध्याय नेपाली ब्राह्मण (बहुन), असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पहले अध्यक्ष (चयनित)।चिंतन उपाध्याय भारतीय समकालीन कलाकार, दोहरे हत्याकांड के सिलसिले में गिरफ्तार हुए थे। चंद्रिका प्रसाद उपाध्याय, भारतीय राजनीतिज्ञ रहे। दीनदयाल उपाध्याय - आरएसएस के विचारक और राजनीतिक दल भारतीय जनसंघ के सह-संस्थापक रहे। दर्शन उपाध्याय, पेशेवर ईस्पोर्ट्स खिलाड़ी रहे। हरिलाल उपाध्याय गुजराती लेखक रहे। हेमा उपाध्याय भारतीय कलाकार जो 1998 से मुंबई में रहते और काम करते थे। केदार नाथ उपाध्याय, नेपाल के मुख्य न्यायाधीश रहे। किशोर उपाध्याय,भारतीय राजनीतिज्ञ; कृष्णकांत उपाध्याय उत्तर प्रदेश के क्रिकेटर; ललित उपाध्याय, भारतीय फील्ड हॉकी खिलाड़ी।मुनीश्वर दत्त उपाध्याय, भारतीय राजनेता, भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में नेता रहे।राम किंकर उपाध्याय, भारतीय शास्त्रों के विख्यात विद्वान और भारत के तीसरे सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार पद्म भूषण के प्राप्तकर्ता।सम्राट उपाध्याय, नेपाली लेखक जो अंग्रेजी में लिखते हैं।सतीश उपाध्याय (जन्म 1962), भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष रहे। राम बीर उपाध्याय बसपा के नेता और मायावती सरकार के मंत्री रहे। सीमा उपाध्याय (जन्म 1965), भारतीय राजनीतिज्ञ, बहुजन समाज पार्टी से संबंधित रहीं। शैलेंद्र कुमार उपाध्याय, नेपाली राजनयिक और राजनीतिज्ञ हैं।श्रीकृष्ण उपाध्याय नेपाली अर्थशास्त्री।उमेश उपाध्याय, अनुभवी भारतीय टेली विजन पत्रकार और मीडिया कार्यकारी, प्रेसिडेंट न्यूज नेटवर्क18 से सम्बद्ध हैं तथा विकास उपाध्याय, अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के महासचिव रहे।डा. मुनि लाल उपाध्याय “सरस”- 40 साल तक जनता उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नगरबाजार बस्ती केप्रधानाचार्य, विद्वान, कवि,राष्ट्रपति शिक्षक सम्मान से सम्मानित, दर्जनों प्रकाशित पुस्तकों के रचयिता ।
लेखक परिचय:-
(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए सम सामयिक विषयों,साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करते रहते हैं। वॉट्सप नं.+919412300183)