Monday, March 9, 2026

नगर रियासत बस्ती द्वारा “उपाध्याय इस्टेट” को मान्यता// गंगाराम - सीताराम का युग (भाग 1)✍️आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी

पण्डित 'गंगाराम उपाध्याय’ “उपाध्याय इस्टेट” के वंशपुरुष थे
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के अंतर्गत आने वाला नगर राज्य या नगर रियासत गौतम राजपूत राजाओं द्वारा शासित था। यह एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक रियासत रही है। चौदहवीं शताव्दी के आरम्भ में अलाउद्दीन खिलजी (1296- 1316) के विजय अभियान के समय में अरगल राज्य के गौतम गोत्रीय नृपति घोलराव अपना पैतृक राज्य त्याग कर उत्तर कोशल अवध के बस्ती क्षेत्र में के घाघरा नदी के उत्तरकुवानों नदी पर्यन्त तक के इस भूभाग पर यहां आकर बस कर यहाँ अपनी शक्ति का पुनर्गठन किया। उनके साथ कुछ ब्राह्मण परिवार भी इस भूभाग पर आए थे। और अपना निवास स्थान बना कर राजा के छत्र छाया में रहने लगे थे। ये राजवंश के पुरोहित और सलाहकार के रूप में भारद्वाज गोत्रिय उपाध्याय वंशीय विद्वान ब्राह्मण थे। इस वंश के पंडित सीता राम जी कुल के ग्यारहवें वंशावतंश के रूप में अत्यधिक प्रतिष्ठित हुए थे। उनके पिता जी का नाम पंडित गंगा राम उपाध्याय था।
    उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के राजा नगर और उनके दरबारी गण नगर राजमहल के पास स्थित खड़ैवा खुर्द निवासी, उपाध्याय वंश के वंशपुरुष और ज्योतिष शास्त्र के आचार्य पण्डित 'गंगाराम उपाध्याय' से प्रतिदिन संस्कृत पुराण, अध्यात्म की कथा और प्रवचन सुनते रहते थे । उन्हें अपने राज्य के अंदर खड़ैंवा खुर्द में मकान भी बनवा दिए थे। यहां एक बड़ा कुंवा आज भी मौजूद है। आज से लगभग 15 साल पहले यहां श्री राम बरन चौबे रहते थे जो उपाध्याय वंश के श्री नागेश्वर उपाध्याय के दत्तक पुत्र थे। गंगाराम उपाध्याय के पुत्र पंडित सीताराम उपाध्याय (मृत्यु लगभग 1795 ई.) भी राजा साहब के सम्मादृत और कृपा पात्र रहे थे। 
पण्डित सीताराम “उपाध्याय इस्टेट” के संस्थापक रहे 
जब 1765 में उतरौला के राजा सुलेमान खां ने 5,000 सैनिकों को लेकर नगर राज्य पर आक्रमण किया तो नगर राजा की तरफ से पंडित सीताराम उपाध्यायजी ने सुलेमान खां को समझा - बुझाकर लड़ाई होने से बचा लिया था। इससे खुश होकर उस समय के राजा साहब ने खड़ैवा खुर्द गांव के दक्षिण का भूभाग जो मनवर नदी के तट तक फैला और उस समय जंगल था, का लगभग 200 बीघा जमीन पंडित सीताराम जी को दान कर दिया था । 
     15 वर्ष की अथक प्रयास से इस भूमि को साफ सुथरा करके कृषि योग्य बनाकर पण्डित सीताराम उपाध्याय ने “सीताराम पुर” नामक एक नया गांव बसा लिया था। ये नगर राज्य दरबार के चर्चित विद्वान और सलाहकार थे। ये 1795 ई. तक जीवित रहे । इस गांव को 1950 ई. तक खड़ैवा खुर्द के निवासी 'पुरवा' कह कर बुलाते थे। राजस्व रिकॉर्ड में अलग नाम पाकर भी यह गांव खड़ैवा गांव का एक मजरा या पुरवा तक ही सीमित था।