इतिहास के अद्भुत रहस्य
Saturday, October 10, 2026
कलाधर-पाल-ब्रजेश के समय के लुप्तप्राय बस्ती के साहित्यक पुरोधा (बस्ती जनपद के छंदकार कड़ी 35) मूल लेखक:डा. मुनि लाल उपाध्याय "सरस"प्रस्तुति:आचार्य डा. राधेश्याम द्विवेदी "नवीन"
Thursday, October 8, 2026
इतिहास के पन्नों में ओझल हुए बस्ती के हमारे ये पुरोधा साहित्यकार (बस्ती के छंदकार कड़ी 34 ) ✍️स्मृतिशेष डॉ मुनि लाल उपाध्याय "सरस"; प्रस्तुति:आचार्य डा.राधेश्याम द्विवेदी
Tuesday, October 6, 2026
बस्ती की महान विभूति: आचार्य रामचंद्र शुक्ल( बस्ती के छंदकार श्रृंखला 33) ✍️आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी
Thursday, October 1, 2026
अन्तर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस✍️आचार्य डॉ राधेश्याम द्विवेदी
Wednesday, September 30, 2026
शिवलिंग में सभी देवताओं का वास✍️आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी
विकास खण्ड कप्तानगंज (बस्ती) की विकास यात्रा : ✍️डॉ. राधे श्याम द्विवेदी
कैप्टनगंज’ का नामकरण -
कैप्टनगंज' कस्बे का नाम कैप्टन मैलकाम मैकलाॅज के नाम पर पड़ा है। ब्रिटिश काल के दौरान उनके यहां सैन्य शिविर (कैंप) लगाने और क्षेत्र में उनके बढ़ते प्रभाव के कारण इस जगह को 'कैप्टन गंज' कहा जाने लगा।प्रतीत होता है कि 1801 ई. से ही कैेप्टनगंज बस्ती जिले का महत्वपूर्ण स्थान बना लिया था और यह अंग्रेजों का एक सुरक्षित तथा सुविधापूर्ण स्थल बन गया था। कैप्टन स्तर के एक सैन्य अधिकारी द्वारा स्थापित सैनिक कार्यालय तथा बाजार 1861-62 तक स्थापित हो चुका था । 1857 की क्रांति को जब अंग्रजों से भलीभांति संभाला तब आगे की सुव्यवस्था के लिए बस्ती शहर में बस्ती तहसील मुख्यालय को 6 मई 1865 में बस्ती शहर में ही जिला मुख्यालय घोषित कर दिया गया। उसी समय बस्ती जिले में बस्ती , कैप्टनगंज ,खलीलाबाद, डुमरिया गंज तथा बांसी नाम से 5 तहसीलें भी घोषित की गई। नौगढ़ तहसील को वर्ष 1955 में बांसी तहसील के नेपाल से सटे हुए भूभाग को अलग करके एक स्वतंत्र तहसील के रूप में बनाया गया था। वर्तमान में यह सिद्धार्थनगर जिले की सदर तहसील है। इस समय इसमें वर्डपुर, लौटन, जोगिया,उसका वाजार तथा नौगढ़ विकास खण्ड को समलित किया गया है।
हर्रैया को पावर देकर कप्तानगंज का हक छीना गया -
1865 में कप्तान गंज में तहसील तथा मुंसफी न्यायालय स्थापित हो चुके थे। बाद में अमोढ़ा की सक्रियता के कारण यह क्षेत्र अंग्रेजों से संभल नहीं पा रहा था। फलतः 1876 में कैप्टनगंज को तहसील व मुंसफी समाप्त करके हर्रैया में तहसील व मुंसफी बनाई गई । इस प्रकार लगभग 15 सालों तक कैप्टनगंज ब्रिटिश प्रशासन का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक इकाई के रूप में बना रहा। इसके बाद इसे विकास खण्ड के रूप में अपनी विकास यात्रा जारी रखना पड़ा। वर्तमान में यह तहसील और मुंसफी न्यायालय का अपना स्तर खो चुका है। इसे विधान सभा, ब्लाक तथा नगर पंचायत स्तर तक गुजरना पड़ा रहा है। कभी कप्तान गंज तहसील हुआ करती थी। कभी यहां मुंसफ कोर्ट हुआ करता था। 5 -5 बार जनता ने एक असरदार नेता को अवसर दिया पर नेता जी तो ब्लाक को ही विकास मानते रहे। किसी तरह से कुछ नए उत्साही जनसेवक ने नगर पंचायत दिलवा दिया परन्तु जनता ने उन्हें भी नकार कर एक वर्ग विशेष की झोली में कप्तानगंज के विकास को गुलदस्ते सा सजा दिया।
कप्तान गंज विकास खण्ड का गठन -
109 ग्राम सभाओं/पंचायतों तथा 11 न्याय पंचायतों को समलित करते हुए 2 अक्टूबर 1956 को पुराना कैप्टनगंज अब नया कप्तानगंज विकास खण्ड का मुख्यालय घोषित किया गया। इस भू भाग में दुबौलिया विकास खण्ड के भू भाग भी समलित थे। दुबौलिया ब्लॉक बहुत बाद में 22 मार्च 2002 को अस्तित्व में आया है।जब बस्ती जिले से काटकर संत कबीर नगर नया जिला बनाया गया था, तब प्रशासनिक पुनर्गठन के तहत दुबौलिया नया विकास खंड (ब्लॉक) बनाया गया था। इसे मुख्य रूप से विक्रमजोत ब्लॉक से अलग करके तथा अन्य आसपास के गाँवों (जैसे खुशालगंज, जोगहाटा, चकोही, बजरिया सुबी और सिमरा आदि) को मिलाकर बनाया गया था। कुछ भाग कप्तान गंज और कुछ भाग हर्रैया का भी इस ब्लॉक में समलित किया गया है। नगर पंचायत घोषित होने के पूर्व कप्तानगंज ब्लॉक में कुल 62 ग्राम पंचायतें (और लगभग 202 राजस्व गांव) हैं। हालांकि, प्रशासनिक बदलावों और कुछ गांवों को नगर पंचायत कप्तानगंज में शामिल किए जाने के कारण स्थानीय स्तर पर संचालित सक्रिय ग्राम पंचायतों की संख्या में आंशिक बदलाव हो सकता है। कप्तानगंज नगर पंचायत में बने 15 वार्ड, 33 राजस्व गांव हुए शामिल हैं। नगर पंचायत में 10 ग्राम पंचायतों के 33 गांव को शामिल किया गया है।
1965 में हुआ था प्रथम चुनाव -
स्वतंत्र भारत में पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद कप्तानगंज विकासखंड 1956 में ही अस्तित्व में आ गया लेकिन ब्लाक प्रमुख का चुनाव पहली बार 1965 में हुआ ।
1.पहले ब्लॉक प्रमुख पंडित सूर्य दत्त त्रिपाठी को मिला तीन कार्यकाल -
ब्लाक प्रमुख कप्तान गंज का चुनाव पहली बार जब 1965 में हुआ तो उस समय क्षेत्र के जनप्रिय नेता पंडित सूर्य दत्त त्रिपाठी (जन्म : 1 जुलाई 1930 ) पहले प्रमुख निर्वाचित हुए जो 10 जनवरी 1976 तक उनके हत्या पर्यन्त तीन कार्यकाल तक इस पद पर बने रहे। इनका जन्म कप्तान गंज से सटे नकटीदेई में सामान्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। श्री त्रिपाठी जी कांग्रेस के प्रारंभिक दिनों के एक कर्मठ कार्यकर्ता थे पंडित जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के वे सच्चे अनुयाई थे। बाद में श्रीमती इंदिरा गांधी जी के 1966 में कार्यभार ग्रहण करने पर वे उनके और निकट आए और अपने प्रिय नेता की स्मृति को अक्षुण्य रखते हुए उन्होंने इंदिरा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्यालय की स्थापना किया। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है। उन्होंने ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर प्रदान किया। उनका मानना था कि शिक्षा ही समाज को सशक्त, आत्म निर्भर और संस्कारवान बनाती है। इसी सोच के कारण आज भी यह संस्था उनके सपनों को साकार कर रही है।
स्वर्गीय श्री सूर्यदत्त त्रिपाठी जी जनसेवा, शिक्षा और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व थे। वे बड़े आकर्षक और हंसमुख स्वभाव के कांग्रेसी व्यक्ति थे। उन्होंने अपने जीवन को समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुँचाने के लिए समर्पित कर दिया। पूर्व ब्लॉक प्रमुख के रूप में उनके कार्यकाल को निष्पक्षता, ईमानदारी और जन कल्याणकारी निर्णयों के लिए सदैव स्मरण किया जाता है। वे समस्याओं को धरातल पर समझकर समाधान करने वाले सच्चे जननेता थे। 10 जनवरी 1976 को पण्डित सूर्य दत्त त्रिपाठी की हत्या कर हत्यारों ने एक उदीयमान युग का अवसान कर दिया।
2.उप ब्लाक प्रमुख श्री राम लखन शर्मा स्थानापन्न प्रमुख रहे -
10 जनवरी 1976 को पण्डित सूर्य दत्त त्रिपाठी की हत्या के बाद उप ब्लाक प्रमुख पद पर आसीन रहे श्री राम लखन शर्मा को ब्लॉक प्रमुख पद का चार्ज मिला जो 1980 तक इस जिम्मेदारी का सम्यक रूप निर्वहन करते रहे। उस समय चुनाव दलीय आधार पर नहीं होते थे।
(गूगल की खोज के अनुसार जो सत्य या असत्य भी हो सकती है, के अनुसार - पूर्व ब्लॉक प्रमुख श्री राम लखन शर्मा बस्ती जिले के कप्तानगंज ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम 'रखिया' के मूल निवासी थे। उनके पिता का नाम श्रद्धेय स्वर्गीय श्री गंगा राम शर्मा कहा गया है। गूगल आगे लिखता है कि अगस्त 2026 में गंगा राम शर्मा जी के ब्रह्मभोज कार्यक्रम में स्थानीय जन प्रतिनिधियों और क्षेत्र के लोगों ने उनके पैतृक आवास पर ब्रह्म भोज में भाग लिया था। ये पूर्व प्रमुख जी के पिता गंगा राम शर्मा तो हो नहीं सकते हैं।गूगल की सूचना संदिग्ध लगती है।)
3.उपजिलाधिकारी हरैया प्रशासक रूप में रहे -
1980 से 1983 तक चुनाव न होने के कारण इस पद की जिम्मेदारी तत्कालीन हरैया के उपजिलाधिकारी खण्ड विकास अधिकारी के माध्यम से निभाते रहे।
4. श्री बाबूराम दुबे के थे दो कार्यकाल-
उनका जन्म 31 दिसंबर 1952 को बस्ती के कप्तानगंज क्षेत्र के ग्राम दुबौली दूबे में हुआ था। उनके पितामह का नाम श्रीराम भरथ, पिता का नाम श्री हरि प्रसाद था। जो बहुत ही सरल व नेक स्वभाव के व्यक्ति थे। वे राजनीति में बहुत ही रुचि रखते थे। इसका प्रभाव बाबूराम जी के जीवन पर पड़ा था। यद्यपि बाबूराम जी के ज्येष्ठ पिता स्व.राम प्रसाद जी क्षेत्र के प्रतिष्ठित व दबंग किस्म के संभ्रांत व्यक्ति थे, पर बाबूराम जी का परिवार इससे विल्कुल उल्टा था तथा सादगी भरा था जो पूरे जिले में जाना पहचाना जाता था। उनके बड़े भाई भारतीय सेना में अपना सेवा दिए थे।
बाबूरामजी की प्रारम्भिक शिक्षा प्राइमरी पाठशाला करचोलिया में हुआ था। उनकी माध्यमिक शिक्षा किसान उच्चतरमाध्यमिक विद्यालय मरहा कटया बस्ती में हुई थी। वह बीटीसी का प्रशिक्षण प्राप्तकर प्राइमरी पाठशाला मरहा में शिक्षक रहे। प्रारम्भ में वह कप्तानगंज के तत्कालीन विधायक श्री राम लखन सिंह जी के माध्यम से राजनीति में आये। बाद में वह जिले स्तर की राजनीति में भी अपना स्थान बना लिए थे। ब्लाक प्रमुख ना रहने के स्थिति में वह जिला परिषद के सदस्य के रुप में आम जनता से जुड़े रहते थे। वे तत्कालीन विधायक कप्तानगंज श्री अम्बिका सिंह के प्रतिनिधि के रुप में विकास कामों व सामाजिक साराकारों से जुड़े रहते थे। दीर्घ समय तक कांग्रेस से जुड़े रहने के बाद वह कप्तानगंज विधान सभा से विधायकी का चुनाव भी लड़े थे। पर सफल नहीं हो सके थे। वह बसपा तथा भाजपा में भी अपनी किस्मत अजमाये थे। उनका सबसे अच्छा समय दो कार्यकाल 1983-1995 का व्लाक प्रमुखी था। वह काफी लोकप्रिय रहे। कप्तानगंज व्लाक तथा विधान सभा क्षेत्र में एसा लोकप्रिय नेता शायद ही मिल सके। उन्होने अपने क्षेत्र में सड़को का जाल बिछवा रखा था। छोटे से बड़े सभी जनता को वह बहुत आसानी से सुलभ हो जाया करते थे। उन्होने कभी भी किसी के काम को मना नहीं किया था। दूबे जी उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग में एक अध्यापक के रूप में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया था। बाद में तत्कालीन कांग्रेसी विधायक राम लखन सिंह और बाबू अम्बिका सिंह के सानिध्य का भरपूर उपयोग किया था।वे बहुजन समाज पार्टी के टिकट से विधान सभा चुनाव में भी अपनी किस्मतआजमाए थे। उस समय ब्लॉक प्रमुखों का चयन ग्राम प्रधानों द्वारा किया जाता था। कप्तान गंज विधान सभा और बिकास क्षेत्र में वे बहु चर्चित हो चुके थे। मंगलवार 26 नवंबर 2019 को उनका निधन हो गया था।
5.रामशंकर यादव -
त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू होने के बाद 1995 में भाजपा शासनकाल में पहली बार क्षेत्र पंचायत सदस्यों द्वारा कराए गए चुनाव में रामशंकर यादव विजयी रहे, जो सन 2001 तक बने रहे।कप्तान गंज और नगर बाजार के बीच गोपियापार के वे मूल निवासी थे। राम शंकर यादव जगलाल बालिका महा विद्यालय के प्रबंधक और जिला सहकारी बैंक बस्ती के संचालक/पूर्व चेयरमैन भी रहे हैं।
6.राजमणि चौधरी बसपा का दो कार्यकाल-
बस्ती जिले के कप्तानगंज ब्लॉक के पूर्व ब्लॉक प्रमुख राजमणि चौधरी समाजवादी पार्टी (सपा) से जुड़े राजनीतिक नेता हैं। वे कप्तानगंज में समाजवादी पार्टी के विभिन्न कार्यक्रमों और सांगठनिक गतिविधियों में सक्रियता से भाग लेते रहे हैं।
2001 से 2005 तथा बसपा शासन काल में इस जिम्मेदारी के निर्वहन का मौका राजमणि चौधरी को मिला। वे कौड़ी कोल के मूल निवासी थे। उनके पिता जय राम चौधरी अपने समय के नामी व्यक्ति थे। बस्ती जिले के कप्तानगंज विकास खंड (ब्लॉक) में वर्ष 2010 से 2015 तक बसपा शासनकाल के दौरान राजमणि चौधरी ब्लॉक प्रमुख थे।
7. श्रीमती शोभा चौधरी-
इसी दौर में 2005 से 2010 तक इस पद पर शोभा चौधरी शोभायमान रही। वह मूल रूप से कप्तानगंज क्षेत्र के दुबौला गांव की निवासी थीं। वह बस्ती के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री/सांसद राम प्रसाद चौधरी के परिवार (उनकी भाई की पत्नी/रिश्तेदार) से जुड़ी रही हैं, जिनका पैतृक निवास स्थान दुबौला है। शोभा चौधरी का संबंध बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से रहा है।
8.श्रीमती माधुरी आर्य-
कप्तानगंज की पूर्व ब्लॉक प्रमुख माधुरी आर्य पति संतोष कुमार बस्ती जिले के सोनहा थाना क्षेत्र के कलंदर नगर गांव की निवासी हैं। माधुरी आर्य उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रामकरन आर्य की पुत्री हैं। उनका पैतृक और मुख्य निवास स्थान कलंदर नगर है। 2015 में हुए चुनाव में पूर्व मंत्री रामकरन आर्य की बेटी माधुरी आर्य ने कप्तान गंज के ब्लॉक प्रमुख पद पर कब्जा कर लिया। जो वर्ष 2018 के शुरुआती महीनों में वह इस पद पर थीं, 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद से ही माधुरी आर्य के खिलाफ आवाज उठने लगी। 25 फरवरी 2018 को दूसरी बार हुए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान में 33 क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान कर माधुरी आर्य को इस पद से अपदस्थ कर दिया।
9.श्रीमती धनमन देवी -
कप्तानगंज क्षेत्र के करचोलिया गांव की निवासी और करचोलिया वार्ड की क्षेत्र पंचायत सदस्य रही हैं। वह भारतीय जनता पार्टी से जुड़ी थीं और कप्तानगंज ब्लॉक की 9वीं ब्लॉक प्रमुख बनी थीं। फरवरी 2018 में अविश्वास प्रस्ताव के बाद मतदान प्रक्रिया के जरिए धनमन देवी ब्लॉक प्रमुख पद पर काबिज हुईं थीं। वह जुलाई 2021 में नए पंचायत चुनावों की घोषणा होने तक इस पद पर रहीं। ब्लॉक प्रमुख के रूप में उन्होंने क्षेत्र की महिला बीडीसी (BDC) सदस्यों और ग्राम प्रधानों को एकजुट कर विकास कार्यों को आगे बढ़ाया। ब्लॉक प्रमुख रहते हुए उन्होंने महिला सुरक्षा और उनके अधिकारों के लिए ब्लॉक स्तर पर कई प्रयास किए, जिसमें कप्तानगंज थाने में पिंक टॉयलेट (Pink Toilet) के निर्माण जैसे जनहित कार्य शामिल रहे। क्षेत्र पंचायत निधि से लगभग सात लाख रुपये में बनने वाले इस शौचालय में गुणवत्ता का पूरा ख्याल रखा गया है। कप्तानगंज क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में बुनियादी ढांचा सुधारने, सड़कों और खड़ंजों के निर्माण और सरकारी योजनाओं को धरातल पर उतारने में उनकी सक्रिय भूमिका रही है।उनके कार्यकाल के दौरान उनके प्रतिनिधि के रूप में उनके पति श्री पिंटू सोनकर ने भी क्षेत्र के कार्यों में सहयोग करते रहे हैं।
10.श्रीमती मिथिलेश निषाद -
जुलाई 2021 के पंचायत चुनाव में मिथिलेश निषाद (तेलियाडीह गांव निवासी) निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुईं और वर्तमान तक इस पद पर कार्य कर रही हैं। कप्तानगंज विकासखंड की ब्लॉक प्रमुख श्रीमती मिथिलेश निषाद भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से हैं। वर्ष 2021 में हुए उत्तर प्रदेश त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में भाजपा ने उन्हें कप्तानगंज से अपना आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया था, जिसके बाद वह इस पद पर निर्विरोध निर्वाचित हुईं। कप्तानगंज से भाजपा उम्मीदवार मिथिलेश निषाद तेलियाडीह ग्राम सभा की प्रधान रह चुकी हैं। इनके पति भोला निषाद बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक है।परिवार में पिछले 30 वर्षों से ग्राम प्रधानी चली आ रही है । 2015 से 20 तक यह स्वयं प्रधान के दायित्व का निर्वहन कर चुकी हैं। जबकि पहली बार क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर प्रमुख बनने में सफल हुई। उनकाकार्यकाल उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के निर्धारित नियमों के अनुसार सामान्यतः साल 2021 से 2026 तक का है ।वह इस पद पर वर्तमान में कार्यरत हैं। हाल ही में मई 2026 में उनकी अध्यक्षता में क्षेत्र पंचायत की बैठक भी संपन्न हुई थी। ब्लाक प्रमुख मिथिलेश निषाद ने बताया कि क्षेत्र पंचायत से मिलने वाले धन से पूरे क्षेत्र पंचायत में विकास के कार्य बीडीसी सदस्यों के प्रस्ताव पर कराए जा रहे हैं, जिसमें क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से विकास के लिए नए प्रस्ताव लिए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र पंचायत से होने वाले कार्यों को धरातल पर उतारा जा सके। क्षेत्र पंचायत की बैठक में कप्तानगंज के विधायक अतुल चौधरी ने कहा कि विकास के लिए सभी जन प्रतिनिधियों को मिलजुल कर जनहित के मुद्दों पर काम करना होगा।
लेखक -
आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी,मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8, निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल, आनन्दनगर,कटरा,बस्ती, Pin- 272001, उत्तर प्रदेश INDIA मोबाइल नंबर +91 9412300183
Monday, September 21, 2026
जिला पंचायत और गांव पंचायतों को जोड़ने वाली क्षेत्रीय विकास समितिया ऐतिहासिक विवेचन ं ✍️डॉ. राधे श्याम द्विवेदी
भारत में स्थानीय स्वशासन के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और प्रशासन के लिए अलग-अलग संस्थाओं का गठन किया जाता है। इसे स्पष्ट रूप से इस प्रकार समझा जा सकता है-शहरों के विकास के लिए नगर निगम नगर पालिका और नगर पंचायत का गठन होता है जबकि ग्रामों के विकास के लिए जिला परिषद, ब्लॉक समिति और ग्राम पंचायत का गठन होता है। इसे इन शब्दों द्वारा और आसानी से समझा जा सकता है -
शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए -
शहरी स्थानीय निकाय (शहरों के विकास के लिए)शहरों की जनसंख्या और आकार के आधार पर इन्हें तीन स्तरों में बांटा गया है यह 74वें संविधान संशोधन के तहत किया गया है.
नगर निगम:
बड़े महानगरों या अधिक जनसंख्या वाले बड़े शहरों के लिए नगर निगम गठित किया जाता है।
नगर पालिका / नगर परिषद-
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास छोटे या मध्यम आकार के शहरी क्षेत्रों और कस्बों के लिए गठित।नगर पालिका परिषद को एक छोटे शहरी क्षेत्र के लिए गठित किया जाता है।
नगर पंचायत-
उन क्षेत्रों के लिए जो ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में बदल रहे होते हैं (संक्रमणकालीन क्षेत्र)।
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए -
पंचायती राज व्यवस्था (ग्रामों के विकास के लिए)गाँवों के जमीनी स्तर पर विकास के लिए 73वें संविधान संशोधन द्वारा त्रिस्तरीय (तीन स्तरों वाली) पंचायती राज व्यवस्था का गठन किया गया है-
जिला परिषद:
सबसे ऊपरी इकाई जो जिला स्तर पर पूरे जिले के विकास की जिम्मेदारी संभालती है।
ग्राम पंचायत:
सबसे निचली इकाई जो ग्राम स्तर (गाँव) पर काम करती है।
ब्लॉक / पंचायत समिति :-
मध्यवर्ती स्तर जो ब्लॉक या खंड स्तर पर ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच तालमेल बिठाती है। भारत में पंचायती राज व्यवस्था के मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत समिति या ब्लॉक पंचायत या समकक्ष निकाय के निर्वाचित प्रमुख को संदर्भित करने वाला शब्द है । पंचायत समिति पंचायती राज व्यवस्था का एक स्तर है । यह भारत में तहसील (ब्लॉक) स्तर पर एक ग्रामीण स्थानीय सरकारी निकाय है । यह तहसील के गांवों के लिए काम करती है, जिन्हें सामूहिक रूप से विकास ब्लॉक कहा जाता है। पंचायत समिति ग्राम पंचायत (ग्राम परिषद) और जिला परिषद (जिला पंचायत या जिला बोर्ड) के बीच की कड़ी है। सामान्यतः, ब्लॉक प्रमुख का चुनाव पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्यों में से किया जाता है।
ब्लॉक बनाने के जरूरत क्यों पड़ी -
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है.ऐसे में देश को कई इकाइयों में बांटा गया. सबसे पहले प्रदेश, उसके अंदर जिले, जिले में ब्लॉक, ब्लॉक के भीतर ग्राम पंचायतें और ग्राम पंचायतों में गांव या ग्राम सभा. एक ब्लॉक कई गांवों को मिलाकर बनाया जाता है. जिले में ब्लॉक की संख्या जिले के आकार के हिसाब से तय की जाती है. प्राय: हर ब्लॉक में 60 से 70 गांव होते हैं. कह सकते हैं कि ब्लॉक इन गांवो का मुख्यालय होता है, जहां गांवों के विकास कार्यों के लिए बैठकें और योजनाएं तैयार की जाती हैं.
भारत की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में खंड विकास स्तर (ब्लॉक स्तर) की पंचायत को क्षेत्र पंचायत / पंचायत समिति या जनपद पंचायत कहा जाता है, जो ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के बीच का मध्यवर्ती स्तर है।क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत आने वाले सभी ग्राम पंचायतों के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने गए क्षेत्रीय सदस्य हैं ।उस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी ग्राम पंचायतों के प्रधान (मुखिया)।उस क्षेत्र के विधायक (MLA) और संसद सदस्य भी पंचायत के सदस्य होते हैं। ब्लॉक लेवल पर चुने हुए प्रतिनिधि के तौर पर ब्लॉक प्रमुख का पद सबसे बड़ा होता है.
ब्लॉक प्रमुख का चुनाव -
ब्लॉक प्रमुख को आम जनता सीधे नहीं चुनती. उसे जनता द्वारा चुने हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य चुनते हैं. क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष या ब्लॉक प्रमुख का निर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्यों के बीच से ही कोई सदस्य क्षेत्र पंचायत का चुनाव लड़ता है और क्षेत्र पंचायत सदस्य उनका चुनाव करते हैं. ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है. उत्तर प्रदेश में क्षेत्र पंचायत सदस्यों यानी बीडीसी के 75,255 पद हैं. यही बीडीसी यूपी के 826 ब्लॉक प्रमुख पदों के लिए वोट डालते हैं.
ब्लॉक प्रमुख बना सम्मानित पद -
भारत में पंचायती राज व्यवस्था के मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत समिति या ब्लॉक पंचायत या समकक्ष निकाय के निर्वाचित प्रमुख को संदर्भित करने वाला शब्द है । पंचायत समिति पंचायती राज व्यवस्था का एक स्तर है । यह भारत में तहसील (ब्लॉक) स्तर पर एक ग्रामीण स्थानीय सरकारी निकाय है । यह तहसील के गांवों के लिए काम करती है, जिन्हें सामूहिक रूप से विकास ब्लॉक कहा जाता है। पंचायत समिति ग्राम पंचायत (ग्राम परिषद) और जिला परिषद (जिला पंचायत या जिला बोर्ड) के बीच की कड़ी है। ब्लॉक प्रमुख, या ब्लॉक पंचायत के अध्यक्ष, पंचायती राज व्यवस्था के मध्यवर्ती स्तर का नेतृत्व करते हैं, जिसे पंचायत समिति के नाम से जाना जाता है, हालांकि इसका नाम और संरचना राज्यों के अनुसार भिन्न होती है।वह पंचायत समिति या ब्लॉक परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है।वह संबंधित संस्था के निर्वाचित प्रमुख के रूप में कार्य करता/ करती है।
ब्लॉक प्रमुख का चुनाव -
ब्लॉक प्रमुख का चुनाव प्रत्येक राज्य में अलग-अलग होता है और यह संबंधित राज्य के पंचायती राज अधिनियमों द्वारा नियंत्रित होता है। सामान्यतः, ब्लॉक प्रमुख का चुनाव पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्यों में से किया जाता है। भारत में ब्लॉक प्रमुख (क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष) का चुनाव वर्तमान व्यवस्था के तहत क्षेत्र पंचायत सदस्यों (बीडीसी सदस्यों) द्वारा आपस में से ही चुना जाता है।
ब्लाक प्रमुख का चुनाव प्रत्येक पांच वर्ष में ग्राम प्रधान और क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव कराया जाता है। इनका निर्वाचन गावं की जनता द्वारा किया जाता है, इसके बाद निर्वाचित हुए क्षेत्र पंचायत सदस्यों में से किसी एक का मतदान के द्वारा ब्लॉक प्रमुख के पद पर चयन किया जाता है। ब्लॉक प्रमुख के चुनाव में केवल क्षेत्र पंचायत सदस्य ही मतदान कर सकते है ।
ब्लाक प्रमुख कार्य और अधिकार:- ब्लाक प्रमुख अपना कार्य हर ब्लाके के ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर के सहयोग से ही कर सकता है। यह सरकारी तथा स्थाई अधिकारी है। ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर्स ब्लॉकों की योजना और विकास से संबंधित सभी कार्यक्रमों क्रियान्यवन की निगरानी करते हैं। जिला के सभी क्षेत्रों में योजनाओं के विकास और कार्यान्वयन के समन्वय मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) द्वारा प्रदान किया गया है। बीडीओ कार्यालय विकास प्रशासन के साथ-साथ नियामक प्रशासन के लिए सरकार का मुख्य संचालन दल है। ब्लाक प्रमुख कार्य और अधिकार निम्नवत हैं।
1.ब्लाक प्रमुख पंचायत समिति की बैठक का आयोजन, अध्यक्षता तथा संचालन करता है।
2. ब्लाक प्रमुख पंचायत समिति या स्थायी समिति के निर्णयों का कार्यान्वयन करता है।
3.ब्लाक प्रमुख पंचायत समिति की वित्तीय और कार्यपालिका प्रशासन पर पूर्ण नियंत्रण रखता है।
4. ब्लाक प्रमुख को प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित जान माल को तत्काल राहत देने के लिये उसे एक वर्ष में कुल पच्चीस हजार रूपये तक की राशि स्वीकृत करने की शक्ति प्रदान की गयी है, राशि स्वीकृत करने के बाद उसे पंचायत समिति की अगली बैठक में स्वीकृत राशि का सम्पूर्ण विवरण देना पड़ता है।
वित्तीय अधिकार:-
ब्लॉक प्रमुख के पास क्षेत्र पंचायत के विकास कार्यों के लिए ब्लॉक प्रमुख निधि (विकास निधि) और वित्तीय अधिकार होते हैं, जिससे वे क्षेत्र का विकास करते हैं।
ब्लाक प्रमुख का वेतन और भत्ते:-
उत्तर प्रदेश में ब्लॉक प्रमुख (क्षेत्र पंचायत प्रमुख) को सरकार की तरफ से ₹11,300 प्रति माह का मानदेय दिया जाता है। क्षेत्र पंचायत की बैठकों में शामिल होने के लिए अलग से भत्ता प्रावधानित है, जिसे बढ़ाकर ₹1,000 प्रति बैठक किया गया है। यह मानदेय अधिकतम छह बैठकों तक मान्य होगा।
अन्य प्रकार के भत्ते -
इसके अतिरिक्त ब्लॉक प्रमुख को कई प्रकार के भत्ते प्रदान किये जाते है। ग्राम पंचायत कोष के माध्यम से पंचायत प्रतिनिधियों के पद पर रहने के दौरान मृत्यु की दशा में ग्राम प्रधान, प्रमुख क्षेत्र पंचायत एवं अध्यक्ष जिला पंचायत के मृतक आश्रितों को 10-10 लाख रुपये, जिला पंचायत सदस्य के परिजन को पांच लाख रुपये, क्षेत्र पंचायत सदस्य के परिजन को तीन लाख रुपये की राशि उपलब्ध करायी जाती है।
ब्लॉक प्रमुख के अधिकार -
क्षेत्र पंचायत में ऐसे कार्य किए जाते हैं, जिसमें एक से अधिक ग्राम पंचायतों का हित निहित होता है. जैसे यदि किसी ऐसी सड़क का निर्माण होना है जो एक गांव से दूसरे गांव को जोड़ती है और वह गांव के बाहर और जिला पंचायत के बीच की परिधि में आती है तो उसका निर्माण क्षेत्र पंचायत के माध्यम से कराया जाता है. इसके अलावा बिजली की व्यवस्था भी उन जगहों पर कराई जाती है जो 2 गांव के बीच हों या क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत हों और जिला पंचायत की परिधि के बाहर हो. इसी तरह रास्तों का निर्माण भी क्षेत्र पंचायत विकास निधि के माध्यम से कराया जाता है. क्षेत्र पंचायत के कार्य इस प्रकार से होते हैं कि जहां पर दो या दो से अधिक ग्राम पंचायतों का हित निहित होता हो, लेकिन वह जिला पंचायत के कार्यक्षेत्र में न आता हो.
ब्लॉक प्रमुख करते क्या हैं -
ब्लॉक प्रमुख की जो भूमिका है वह यहीं से शुरू होती है.क्षेत्र पंचायत की अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख करते हैं. बैठक के माध्यम क्षेत्र के विकास कार्य को लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्यों द्वारा जो प्रस्ताव लाए जाते हैं उन प्रस्तावों को पास कराए जाने का काम क्षेत्र पंचायत प्रमुख यानी ब्लॉक प्रमुख करते हैं.केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से पंचायती राज्य व्यवस्था के बजट में पैसा आता है. यह पैसा खर्च किस तरह किया जाएगा, इसका एजेंडा ब्लॉक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत के सदस्य और ग्राम प्रधान मिलकर तैयार करते हैं. क्षेत्र पंचायत की बैठक एक दो महीने में होती है. अभी तो नई क्षेत्र पंचायतों का गठन हो रहा है। तो 1 महीने के अंदर ही पहली बैठक हो जानी चाहिए. ऐसी पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत व्यवस्था बनाई गई है.
क्षेत्र पंचायत के अन्य कार्य -
इसके अलावा क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत बीज गोदाम का निर्माण करना, उनका रखरखाव करने का काम भी होता है. क्षेत्र पंचायत सदस्यों के द्वारा जिस प्रकार के प्रस्ताव लाए जाते हैं. उसी के अनुरूप विकास कार्य कराए जाते हैं. इसके अंतर्गत कार्य योजना बनती है और उसी के अनुरूप विकास कार्य होते हैं.
बजट का आवंटन -
क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत होने वाले विकास कार्य के लिए दो प्रमुख मद से बजट का आवंटन होता है. इसमें राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अंतर्गत और केंद्रीय वित्त आयोग की संस्तुतियों के अंतर्गत विकास कार्यों को लेकर धनराशि आवंटित होती है. अभी क्षेत्र पंचायतों को जो धनराशि पिछले वित्तीय वर्ष में दी गई थी, उसमें एक करोड़ औसतन धनराशि दी गई थी. अगले वर्ष में प्रत्येक क्षेत्र पंचायत को लगभग 7 करोड रुपए की धनराशि प्राप्त होगी. किसी क्षेत्र पंचायत को यह धनराशि कुछ कम हो सकती है, तो किसी को कुछ ज्यादा हो सकती है. क्षेत्र पंचायतों में आबादी के आधार पर धनराशि आवंटित करने का काम होता है.
अविश्वास प्रस्ताव -प्रमुख को अविश्वास प्रस्ताव से पांच साल से पहले हटाया जा सकता है ।ब्लॉक प्रमुख को अगर समय से पहले हटाना हो तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर ऐसा किया जा सकता है. चुनाव में चुने जाने के ढाई साल बाद ब्लॉक प्रमुख को साधारण बहुमत से हटाया जा सकता है. इसको ऐसे समझ सकते हैं कि अगर किसी क्षेत्र पंचायत में 50 सदस्यों हों और उसमें से 26 सदस्य ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दें तो वह अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार माना जाएगा. इसके बाद ब्लॉक प्रमुख का चुनाव फिर से कराया जाएगा.
बीडीओ प्रखंड स्तर पर ग्रामीण विकास कार्यों का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी
प्रशासनिक रूप से ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक डेवेलपमेंट ऑफिसर या BDO सबसे बड़ा सरकारी अधिकारी होता है जो विकास योजनाओं को क्रियान्वित कराने के लिए उत्तरदायी होता है।कार्यों के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न समितियाँ (जैसे- निर्माण कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं सामाजिक कल्याण) बनाई जाती हैं।बीडीओ (खंड विकास अधिकारी या ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) किसी जिले के ब्लॉक या प्रखंड स्तर पर ग्रामीण विकास कार्यों का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होता है। इनके मुख्य कार्य और जिम्मेदारियाँ इस प्रकार है-
1.सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन:- मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था/विधवा/विकलांग पेंशन और कृषि योजनाओं जैसी केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर (गांव और पंचायत स्तर) पर लागू करना।
2.विकास कार्यों की निगरानी:-
ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांवों में सड़क निर्माण, नाली-खड़ंजा, शौचालय और अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की नियमित जांच व समीक्षा करना।
3.कर्मचारियों पर नियंत्रण:-
ब्लॉक कार्यालय के प्रमुख के रूप में पंचायत सचिवों, विस्तार अधिकारियों और अन्य अधीनस्थ कर्मचारियों के कार्यों का पर्यवेक्षण और नियंत्रण रखना।
4.पंचायतों के साथ समन्वय:-
ग्राम पंचायतों और पंचायत समिति की बैठकों का आयोजन करना, विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार करना तथा मुखिया व सरपंचों के साथ मिलकर कार्यों को समय पर पूरा कराना।
5.जन शिकायतों का निवारण:-
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं और शिकायतों को सुनना तथा उनका नियमानुसार उचित समाधान करना
1947 से 1956 तक पंचायती व्यवस्था में कशमकश -
संयुक्त प्रान्त पंचायत राज अधिनियम 1947 दिनांक 7 दिसम्बर, 1947 ई0 को गवर्नर जनरल द्वारा हस्ताक्षरित हुआ और प्रदेश में 15 अगस्त, 1949 से पंचायतों की स्थापना हुई। इसके बाद जब देश का संविधान बना तो उसमें पंचायतों की स्थापना की व्यापक व्यवस्था की गई। संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद- 40 में यह निर्देश दिये गये हैं कि राज्य पंचायतों की स्थापना के लिए आवश्यक कदम उठायें और ग्रामीण स्तर पर सभी प्रकार के कार्य एवं अधिकार उन्हें देने का प्रयत्न करें। 15 अगस्त, 1949 से उत्तर प्रदेश की तत्कालीन पाच करोड़ चालीस लाख ग्रामीण जनता को प्रतिनिधित्व करने वाली 35,000 पंचायतों ने कार्य करना प्रारम्भ किया। साथ ही लगभग 8 हजार पंचायत अदालतें भी स्थापित की गई। 1953-54 में पंचायतों की सक्रियता एवं विभिन्न विकास सम्बन्धी कार्यक्रमों में उनका सहयोग बढ़ाने के लिए विधान सभा के सदस्यो की एक समिति नियुक्त की गयी। इस समिति के सुझावों को दृष्टि में रखकर पंचायत राज संशोधन विधेयक तैयार किया गया जो पंचायतों के अगले दूसरे आम चुनाव में क्रियान्वित हुआ।
लेखक -
आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,
पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी,
मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8
निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,
आनन्दनगर,कटरा,बस्ती,
Pin- 272001,उत्तर प्रदेश INDIA
मोबाइल नंबर +91 9412300183