Saturday, February 14, 2026

विघ्नेश्वर शिवधाम,रामपुरवा,अयोध्या विशेष शिवाराधना कार्यक्रम जारी✍️आचार्य डॉ राधेश्याम द्विवेदी


यह मंदिर रामनगरी अयोध्या के राम मंदिर से लगभग 30 किलोमीटर दूर तमसा नदी के तट पर मिल्कीपुर तहसील क्षेत्र के शाहगंज बाजार के रमपुरवा में स्थित है। भगवान शंकर के इस मंदिर का नाम विघ्नेश्वर धाम है। इस विघ्नेश्वरनाथ महादेव धाम शिवाला मंदिर लोगों की अटूट आस्था का केंद्र है। मंदिर की परंपरा सबसे अलग तरह का है। यह स्थान अयोध्या के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक स्थलों में एक महत्वपूर्ण स्थान रखता है। यहाँ का वातावरण अत्यंत शांत और आध्यात्मिक है। इसे विघ्नेश्वर धाम के नाम से जाना जाता है। यहां सर्व धर्म सम भाव का पालन किया जाता है। जात-पात का कोई भेदभाव नहीं किया जाता है और यहां का माहौल बहुत शांत और धार्मिक है। विघ्नेश्वरनाथ धाम शिवाला मंदिर का निर्माण लगभग ढाई सौ वर्ष पूर्व 1800 ई.के आसपास राजा दर्शन सिंह द्वारा कराया गया।
      विघ्नेश्वर महादेव मंदिर के मुख्य मंदिर में काले पत्थर का एक विशाल शिवलिंग स्थापित है। जो भक्तों के आकर्षण का केंद्र है। मंदिर के ऊपर बना 21 फीट ऊंचा गुंबद, उसकी अनूठी स्थापत्य शैली, समीप स्थित सरोवर और सरोवर से सुरंग के रास्ते मंदिर तक जाने वाली सीढ़ियाँ इसकी प्राचीनता और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं।
कुंड स्नान से विकारों से मुक्ति
मंदिर परिसर के आसपास स्थित सरोवर (कुंड) और उससे जुड़ी मान्यताएं इसे और भी प्राचीन और खास बनाती हैं। कुंड में 128 तीर्थो का जल समाहित है। मान्यता है कि मंदिर के कुंड में स्नान करने से भक्तों को सभी विकारों और कष्टों से मुक्ति मिलती है।
तंत्र आधारित शिव मंदिर
यह नागर शैली से निर्मित अष्ट मंडपम व चौसठ योगिनियों वाला तंत्र आधारित शिव मंदिर है। आस पास व दूरदराज के लोग यहां मंत्र सिद्धि करने आते है। इसके भीतर 300 फुट लंबी सुरंग व दस फुट लंबा व दस फीट चौड़ा ध्यान कक्ष भी स्थापित है, अयोध्या का यह पहला शिव मंदिर है जो इतना विशालकाय है। यहां स्थापित शिवलिंग का आकार लगभग 4.5× 4 फीट का है। मंदिर का गर्भगृह करीब 25 फीट भीतर है। नागर शैली में बने इस मंदिर में भगवान शंकर विराज मान हैं. भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्तों कीमनोकामना पूर्ण होती है।मंदिर के नीचे एक गुफा है जिसमें भगवान शंकर का शिवलिंग स्थापित किया गया है. इस मंदिर का कायाकल्प राजा दर्शन ने कराया था.राजा मान सिंह के बड़े भाई राजा राम अधीन पाठक इस मंदिर में शिव जी की सेवा बहुत ही तन्मयता से करते थे। जब घरेलू विवाद में आने के कारण उन्हें शाहगंज की गद्दी छोड़नी पड़ी तो यहां की पूजा अर्चना करने की व्यवस्था ही बदल गई।
सुबह शाम सूर्य किरण से शिवाराधना
 जहां सूर्योदय के समय सूर्य की पहली किरण भगवान शिव पर पड़ती है तथा सूर्य की अंतिम किरण भगवान शिव पर पड़ने के साथ ही सूर्यास्त होता है। यहां स्थापित शिवलिंग में इस समय स्वयमेव त्रिपुंड का आकार व जटा विकसित हो रही है,जो किसी चमत्कार से कम नही है।
सूर्यदेव करते हैं भोलेनाथ का अभिषेक
बिना किसी वैज्ञानिक टेक्नोलॉजी के, भगवान सूर्य सुबह के समय भगवान शंकर का अभिषेक करते हैं और शाम के समय जब अस्त होते हैं तब भी भगवान सूर्य भोलेनाथ का अभिषेक करते हैं.
दो किलोमीटर लंबी सुरंग
पुजारी अमित जोगी ने बताया कि मन्दिर के दक्षिण करीब दो किलोमीटर दूर राजा दर्शन सिंह ने शाहगंज स्टेट का निर्माण कराया और वहां पर अपने पुत्र मानसिंह की ताजपोसी की थी ।स्टेट से मंदिर तक जाने के लिए दो किलोमीटर लंबी सुरंग का निर्माण भी कराया था जो अब मात्र 300 फीट ही बची है।जिससे होकर मंदिर के गर्भगृह में जाया जा सकता है।
मंदिर में पुजारी रोज बदलते रहते हैं. 
यहां पर साल के 365 दिनों के हिसाब से 365 पुजारी नियुक्त किए गए हैं. ये पुजारी हिंदू धर्म के सभी जातियों के हैं, चाहे वह SC हो या पासी, अहीर हो या बनिया, ब्राह्मण हो या क्षत्रिय. सभी जातियों के पुजारी एक-एक दिन भगवान शंकर की पूजा आराधना करते हैं.पुजारी अपने घर से भगवान शंकर के लिए प्रसाद बनाकर लाता है और शंकर भगवान को भोग लगाने के बाद वही प्रसाद सभी में वितरित किया जाता है, जिसे सभी जातियों के लोग सहर्ष स्वीकार करते हैं. यहां जात पात का कोई भेदभाव नहीं है. 
सी .एम. योगी से मिला 2 करोड़ से सुविधाएं बढ़ी 
यह मंदिर पहले जीर्ण-शीर्ण अवस्था में था.आसपास के गांव के लोग ही चंदा लगाकर मंदिर की देखभाल करते थे. लेकिन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सत्ता में आने के बाद इस मंदिर को भी 2 करोड़ रुपए की सौगात मिली है. अब यहां पर श्रद्धालुओं के लिए एक खूबसूरत विश्रामालय, एक सुंदर प्रवेश द्वार, पेयजल की व्यवस्था, आधुनिक शौचालय, सुंदर सड़क, विद्युत लाइटिंग, पार्किंग, और एक खूबसूरत कुंड जैसी तमाम मूलभूत सुविधाओं से सुसज्जित किया जा रहा है.
शिवाराधना के विशेष कार्यक्रम होते हैं 
हर वर्ष शिवरात्रि से पूर्व शिव बारात व विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है। सावन के महीने में लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते हैं और भगवान शंकर का दर्शन पूजन कर भाव विभोर होते हैं.
15 वर्षों से कलश यात्रा जारी
यह कलश यात्रा पिछले 15 वर्षों से लगातार महाशिवरात्रि से पूर्व आयोजित की जा रही है। इस वर्ष भी आयोजन का संयोजन आनंद सोनी द्वारा किया गया। स्थानीय श्रद्धालुओं का कहना है कि इस परंपरा ने क्षेत्र में धार्मिक एकता और उत्साह को नई पहचान दी है।
भव्य कलश यात्रा निकली
अयोध्या में महाशिवरात्रि से पूर्व आस्था और भक्ति का अद्भुत संगम उस समय देखने को मिला जब दिनांक 14 फरवरी 2026 को शाहगंज क्षेत्र स्थित विघ्नेश्वर नाथ मंदिर से भव्य कलश यात्रा निकाली गई। इस यात्रा में लगभग 2000शिवभक्तों और श्रद्धालुओं नेउत्साहपूर्वक भागलिया।
       यह यात्रा करीब 4 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए रामपुरवा शिवाला मंदिर पहुंची, जहां विधिवत समापन किया गया। यात्रा के दौरान पूरा वातावरण ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गुंजायमान रहा। गाजे-बाजे और भक्ति मय संगीत के साथ निकली इस शोभा यात्रा में नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा आकर्षक झाँकियाँ भी प्रस्तुत की गईं, जिसने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां सच्चे मन से पूजा-अर्चना करने वाले हर भक्त की मनोकामना भगवान भोलेनाथ अवश्य पूर्ण करते हैं। महाशिवरात्रि से पहले निकली इस भव्य कलश यात्रा ने एक बार फिर अयोध्या में शिवभक्ति की अलख जगा ।
    महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर गाजे- बाजे के साथ भव्य बारात शोभायात्रा निकाली गई। श्रद्धा से सराबोर इस शोभा यात्रा में बड़ी संख्या में महिला-पुरुष श्रद्धालु शामिल हुए। डी जे की धुन पर भक्त झूमते नजर आए, वहीं महिलाएं सिर पर कलश धारण कर मंगलगीत गाते हुए हर-हर महादेव के जयकारे लगाती रहीं। शिव बारात की शुरुआत क्षेत्र के विघ्नेश्वर नाथ धाम से हुई, जो काली माता मंदिर, हनुमानगढ़ी, केवट नगर, ब्रह्म बाबा स्थान, दुर्गा मंदिर व शिव मंदिर होते हुए शाहगंज बाजार स्थित सिद्धेश्वरनाथ धाम पहुंची। यहां श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इसके बाद बारात सिद्धेश्वर नाथ मंदिर से रमपुरवा स्थित विघ्नेश्वरनाथ धाम शिवाला मंदिर के लिए रवाना हुई। पूरे मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर बारात का भव्य स्वागत किया। भक्तों ने भगवान भोलेनाथ की झांकी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया।शिव बारात पुनः सिद्धेश्वर नाथ धाम पहुंचकर संपन्न हुई।
शिव बारात विघ्नेश्वर नाथ धाम के मुख्य पुजारी अमित जोगी के साथ आनंद सोनी, अरविंद यादव ,शिवकुमार, आकाश, सचिन, विपिन, अंकित ,संगीता मिश्रा, गायत्री ,अनूप ,पूनम ,काजल सहित बड़ी संख्या में शिव भक्त शामिल हुए हैं।
हवन-पूजन का सिलसिला प्रारंभ
यात्रा के समापन के पश्चात रामपुरवा शिवाला मंदिर में विधि-विधान से हवन- पूजन का सिलसिला प्रारंभ हो चुका है। श्रद्धालुओं ने भगवान भोलेनाथ से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए पुलिस बल के जवान तैनात रहे, ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो और श्रद्धालु शांतिपूर्वक कार्यक्रम में भाग ले सकें।
   


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