Thursday, May 28, 2026

भारत-नेपाल में सांस्कृतिक समानताएं, दोनों एक दूसरे के संपूरक हों✍️आचार्य डॉ.राधेश्याम द्विवेदी


अखण्ड भारत का तात्पर्य भारतीय उपमहाद्वीप के अविभाजित, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्वरूप से है, जिसकी सीमाएं प्राचीन काल में ईरान (हिंदुकुश पर्वतमाला) से लेकर म्यांमार (बर्मा) तक और तिब्बत से लेकर श्रीलंका तक विस्तृत थीं। यह केवल एक राजनीतिक सीमा नहीं, बल्कि एक साझा सभ्यता का प्रतीक थी। इस स्वरूप में भारत और नेपाल दोनों सनातनी देश जाने पहचाने जाते थे।

वैदिक और मौर्य काल में जम्बू द्वीप :- 

प्राचीन काल में इसे 'आर्यावर्त' और 'जंबूद्वीप' कहा जाता था। मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य और चक्रवर्ती सम्राट अशोक के शासनकाल में यह साम्राज्य अपने सबसे बड़े विस्तार पर था।अखंड भारत का निर्माण करने वाले पहले व्यक्ति चक्रवर्ती सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य थे,उन्होंने अपने गुरु आचार्य चाणक्य (कौटिल्य) की मदद से बिखरे हुए छोटे-छोटे राज्यों और गणराज्यों को जीतकर एक विशाल साम्राज्य की स्थापना की थी। यह वर्तमान अफगानिस्तान से लेकर संपूर्ण भारतीय उपमहाद्वीप तक फैला हुआ था। आज अखण्ड भारत की संकल्पना को एक सांस्कृतिक और दार्शनिक विचार के रूप में याद किया जाता है, जो सदियों की साझा विरासत, धर्म और भूगोल को आपस में जोड़ता है। चंद्रगुप्त मौर्य के बाद उनके पोते सम्राट अशोक ने इस साम्राज्य का और अधिक विस्तार किया और संपूर्ण अखंड भारत पर अपना चक्रवर्ती शासन स्थापित किया था। इस विशाल क्षेत्र में सदियों तक वैदिक धर्म, बौद्ध धर्म, और हिंदू संस्कृति का प्रसार रहा, जिससे दक्षिण-पूर्व एशिया तक के देश सांस्कृतिक रूप से एकजुट हुए थे।

अखंड भारत से अलग होने वाले देश :-

सदियों के विदेशी आक्रमणों, विशेषकर मध्यकालीन और ब्रिटिश शासन के दौरान, इस भूभाग का विभाजन होता रहा।पिछले कुछ शताब्दियों में भारत से कई क्षेत्र अलग होते गए ,-:

अफगानिस्तान: 1747 में अहमद शाह अब्दाली द्वारा अलग किया गया।

नेपाल: 1816 में सुगौली की संधि के बाद अलग हुआ।

भूटान: 1910 में ब्रिटिश काल में अलग हुआ।

पाकिस्तान :1947 में स्वतंत्रता के समय 'माउंटबेटन योजना' के तहत गांधी और जिन्ना के जिद से भारत से अलग हुआ।

श्रीलंका और म्यांमार (बर्मा): क्रमशः 1948 में ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र होकर अलग हुए

बांग्लादेश :1971 यह देश भारत की मुक्तिवाहिनी और पूर्वी पाकिस्तान के देश भक्तों के संयुक्त प्रयास से स्वतंत्र हुआ था।

नेपाल का संक्षिप्त परिचय :- 

नेपाल की जनसंख्या लगभग 3.04 करोड़ (अनुमानित) है। पूरे देश का क्षेत्रफल लगभग 1,47,181 वर्ग किमी है। पूरब से पश्चिम तक इसकी कुल लम्बाई करीब 800 किलोमीटर और चौड़ाई 200 किलोमीटर है। नेपाल को 7 प्रदेशों (प्रान्तों) में बांटा गया है। जिसमें कुल 77 जिले और 165 संघीय संसदीय निर्वाचन क्षेत्र हैं।

भारत का संक्षिप्त परिचय :- 

भारत की जनसंख्या नेपाल से लगभग 49 गुना  (148 करोड़) से अधिक है। भारत का कुल भौगोलिक क्षेत्रफल नेपाल से 22- 23 गुना लगभग 32,87,263 वर्ग किलोमीटर है। भारत में नेपाल जैसे 28 राज्य हैं । नेपाल जैसे 10 गुना से अधिक कुल 800 जिले हैं।

सर्वाधिक क्षेत्रफल भारतीय राजस्थान का संक्षिप्त परिचय :- 

भारत के सबसे बड़े राज्य राजस्थान का क्षेत्रफल नेपाल के क्षेत्रफल से दो गुना से भी ज्यादा 3,42,239 वर्ग किलोमीटर है जिसमें कुल 41 जिले हैं। यहां की जनसंख्या नेपाल से लगभग ढाई गुना से ज्यादा 8.39 करोड़ है।

सर्वाधिक जनसंख्या उत्तर प्रदेश का संक्षिप्त परिचय :- 

उत्तर प्रदेश की जनसंख्या नेपाल के जनसंख्या का सात गुना लगभग 20 करोड़ है। नेपाल के क्षेत्रफल से डेढ़ गुना से भी अधिक कुल क्षेत्रफल: 2,40,928 वर्ग किलोमीटर  क्षेत्र में कुल 75 जिले हैं।

भारत-नेपाल के बीच संबंध के प्रमुख  आयाम :- 

भारत और नेपाल के बीच की सांस्कृतिक एकरूपता सदियों पुरानी, गहरी और अटूट है। भारत और नेपाल के बीच पुरातन संबंध सांस्कृतिक, भौगोलिक, धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से "रोटी-बेटी के रिश्ते" (वैवाहिक और रोटी-रोजी) पर आधारित हैं। दोनों देशों के लोगों के बीच के आत्मीय संबंधों को दर्शाता है। यह साझा विरासत धर्म, भाषा, त्योहार और खान-पान में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

साझा ऐतिहासिक और पौराणिक विरासत:- 

सदियों से साझा हिंदू-बौद्ध परंपराएं, खुली सीमाएं रामायण काल से चला आ रहा सीता-राम का संबंध दोनों देशों को अटूट रूप से जोड़ता है। लुम्बिनी (बुद्ध का जन्मस्थान) और पशुपतिनाथ (नेपाल) तीर्थयात्रा इस सांस्कृतिक कड़ी के प्रमुख स्तंभ हैं।  भारत और नेपाल दोनों ही हिंदू और बौद्ध धर्म में समान विश्वास रखते हैं। नेपाल के जनकपुर (माता सीता का जन्मस्थल) और भारत के अयोध्या के बीच पौराणिक संबंध हैं। वहीं, सिद्धार्थ गौतम बुद्ध का जन्म नेपाल के लुंबिनी में हुआ था और ज्ञान की प्राप्ति भारत के बोधगया में हुआ था।  उनके जीवन से जुड़े प्रमुख स्थान भारत में स्थित हैं। भारत के दो महाकाव्य रामायण और महाभारत रामायण के मुख्य पात्र मौ जानकी"- जगत जननी की जन्मभूमि जनकपुर नेपाल में ही स्थित है। भारत देश के राजा दशरथ के पुत्र राम से उनका बलिदान की समय नेपाल (मत्सयदेश) में बिताये तत्पश्चात् अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु का वैवाहिक संबंध मत्सय राजकुमारी से हुआ। 

निकटतम पडोसी :-

नेपाल की सीमा भारत के 5 राज्यों - उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और बिहार से लगती है। इसलिए यह सांस्कृतिक और आर्थिक आदान-प्रदान का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। नेपाल हमारा निकटतम पडोसी देश है. दूसरी और कोई भी देश हमारे इतना निकट नहीं है जितना नेपाल, क्योंकि यह निकटतम महज भौगौलिक अवस्था की ही नहीं है युगों-युगों से चले आते एतिहासिक नाते की भी है। हमारे भारत वर्ष के सीमा से सटे लेकिन हमारी भावनाओं की अन्तर भार की ऐसी समानता है, इतनी निकटता जहाँ भाषा और धर्म एक ही हो जहाँ देवी-देवता भी एक हो।

भाषा और लिपि में एकरूपता :,- 

भारत और नेपाल दोनों ही देवनागरी लिपि का उपयोग करते हैं। इसके अतिरिक्त, भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश से सटे नेपाल के तराई क्षेत्रों में 'मैथिली' और 'भोजपुरी' भाषाएं बोली जाती हैं, जो दोनों ओर की संस्कृतियों को आपस में जोड़ती हैं。

देवमयी भूमि :-

नेपाल का मात्र स्वतंत्र हिन्दू राजा रहा है, यहाँ जितने लोग उत्तनी ही देवमुर्ति स्थापित है। नेपाल की सारी भूमि देवमयी है। यहां शक्तिपूजा की प्रधानता रही है। तो भारत भी देश को ही भारत माता कहा गया है। उसने तो पूरे विश्व को “बसुधौव कुटुंबकम्” से सम्मानित कर रखा है।

हिमालय पर्वत दोनों का प्रहरी :- 

अनन्त या अनादि काल से हिमालय हमारी और नेपाल की संस्कृति का अक्षय प्रेरणा, अनन्त, उत्स और अखण्ड प्रहरी रहा है। एक ही साथ वह सदा हमारा पोषक और रक्षक भी रहा है। नेपाल भारत की 'हिमालयी सीमाओं' के ठीक बीच में स्थित है और भूटान के साथ मिलकर यह उत्तरी 'सीमावर्ती' क्षेत्र के रूप में कार्य करता है और चीन से किसी भी संभावित आक्रमण के खिलाफ बफर राज्य के रूप में कार्य करता है।

नदियों द्वारा जुड़ाव :- 

नेपाल से निकलने वाली नदियाँ पारिस्थितिकी और जलविद्युत क्षमता के लिहाज से भारत की बारहमासी नदी प्रणालियों को पोषित करती हैं । नेपाल की नदियाँ जो भारत के भू-भाग पर ही बहती है, प्रत्येक वर्ष बाढ़ लाती है। बाढ़ के साथ-साथ हमारे भूमि को उपजाऊ भी बनाती है।मिथिलावासी जिने जीविकोपार्जन का साधन कृषि है इनके लिए नेपाल की नदी वरदान साबित हो रही है।

कनेक्टिविटी:-

नेपाल एक भू-बद्ध देश होने के कारण तीन तरफ से भारत से घिरा हुआ है और एक तरफ तिब्बत की ओर खुला है जहां वाहनों की आवाजाही बहुत सीमित है। भारत-नेपाल ने लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने और आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न कनेक्टिविटी कार्यक्रम शुरू किए हैं ।दोनों सरकारों के बीच काठमांडू को भारत के रक्सौल से जोड़ने वाली इलेक्ट्रिक रेल पटरी बिछाने के लिए समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए गए हैं ।भारत व्यापार और पारगमन व्यवस्थाओं के ढांचे के भीतर माल ढुलाई के लिए अंतर्देशीय जलमार्गों को विकसित करने की कोशिश कर रहा है, जिससे नेपाल को समुद्र तक अतिरिक्त पहुंच मिल सकेगी और इसे सागरमाथा (माउंट एवरेस्ट) को सागर (हिंद महासागर) से जोड़ने का नाम दिया जा रहा है।

व्यापारिक और सांस्कृतिक संबंध :- 

प्राचीनकाल में भारत अपने पड़ोसी राज्यों से सम्पर्क निरंतर। बनायें रहता था उन दिनों भारत का मुख्यतः व्यापारिक सम्बन्ध रहा किन्तु धीरे-धीरे से संबध सभ्यता एवं संस्कृति के स्तर पर भी स्थापित हुए। प्राचीनकाल में नेपाल से सम्बन्ध का कारण यह भी था कि चीन देश के साथ संबंध स्थापित करने के साथ ही साथ इससे जुड़े अन्य देशों से भी।

धार्मिक और आध्यात्मिक समानता:-

भारत और नेपाल दोनों ही हिंदू और बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्रों को साझा करते हैं। जहाँ एक ओर नेपाल में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर को भारतीय श्रद्धालु बहुत पवित्र मानते हैं, वहीं भारत में स्थित बनारस, अयोध्या और बोधगया नेपाली लोगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल हैं।छठी शताब्दी ई० पू० गौतम बुद्ध का जन्मस्थान नेपाल में स्थित कपिलवस्तु के लुम्बिनी ग्राम में हुआ था। परन्तु इन्हें ज्ञान की प्राप्ति भारत के एक प्रांत बिहार में गया जिले में हुआ। बुद्ध के बोधिसत्य सब प्राप्ति के पश्चात ही जिला का नाम बोध गया पड़ा। आज भी यह बोध गया विश्वप्रसिद्ध है। इन्होंने पूरे  विश्व को शांति प्रेम और अहिंसा का संदेश दिए। नेपाल में जन्म लेने वाले सिद्धार्थ भारत में महान अवतारी पुरूष बन गए। इनके अनुयायी वनके भक्त विश्व के कई देशों से आज भी भारत में बोधगयाा भ्रमण के लिए आते हैं। 

त्योहार और खान-पान: -

दोनों देशों में मनाए जाने वाले त्योहार लगभग एक समान हैं। दीपावली, होली, दशहरा और छठ पूजा दोनों देशों में पूरी आस्था के साथ मनाए जाते है। इसके साथ ही दाल-भात, रोटी और मोमोज जैसे व्यंजन दोनों जगह बेहद लोकप्रिय हैं।

ऋषि मुनियों की साधना स्थली :- 

अपने वैचारिका तपस्या से भारतीय ज्ञान मंदाकिनी को सतत वेग और विस्तार देने वाले अनेक ऋषि मुनियों की जीवन-साधना का क्षेत्र यहीं प्रदेश रहा है। हिमाच्छादित हरे भरे पेड़, सदवावहिनी नदियों इन प्राकृति सौन्दर्यमय वातावरण में ही मनुष्य अपनी संस्कृति का विकास कर रही है। संस्कृति ऐसा पर्यावरण है जिसके अन्दर रहकर मनुष्य एक सामाजिक प्राणी के रूप में ढलता है और प्राकृतिक दशाओं के अनुकूल चलते हुए ही प्रगति की ओर अन्मुख होता रहता है। यह संस्कृति ही है जो विश्व स्तर पर मानव को मानव से समाज को समाज से पृथक करती और जोड़ती भी है। यह संस्कृति ही है जो मनुष्य को मनुष्य बनाती है।

रोटी-बेटी का संबंध: 

दोनों देशों के बीच लगभग 1,850 किमी लंबी खुली सीमा है। इस सीमा के आर- पार नेपाली और भारतीय नागरिक बिना वीजा के आ-जा सकते हैं, जो इन संबंधों की अद्वितीयता को दर्शाता है। दोनों देशों के लोगों के बीच घनिष्ठ रिश्ते और नातेदारी है, जिसे 'रोटी-बेटी का रिश्ता' कहा जाता है। 

दोनों देश के लोग विवाह और पारिवारिक संबंधों के माध्यम से भी उनके बीच घनिष्ठ संबंध हैं। भारत के बिहार-यूपी और नेपाल के बीच में सदियों से वैवाहिक और पारिवारिक संबंध रहे हैं।

विकास सहायता:- 

भारत सरकार नेपाल को समय समय पर विकास सहायता प्रदान करती है, जिसका मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर बुनियादी ढांचे का निर्माण करना है। सहायता के क्षेत्रों में अवसंरचना, स्वास्थ्य, जल संसाधन, शिक्षा और ग्रामीण एवं सामुदायिक विकास शामिल हैं।

रक्षा सहयोग:-

द्विपक्षीय रक्षा सहयोग में उपकरण और प्रशिक्षण प्रदान करके नेपाली सेना के आधुनिकीकरण में सहायता करना शामिल है । भारतीय सेना की गोरखा रेजिमेंटों में नेपाल के पहाड़ी जिलों से भी सैनिकों की भर्ती की जाती है। भारत 2011 से हर साल नेपाल के साथ सूर्य किरण के नाम से जाना जाने वाला एक संयुक्त सैन्य अभ्यास करता आ रहा है।

सनातन संस्कार से जुड़ा :- 

संस्कृति वह संस्कार माना जाता है जिसका तात्पर्य धार्मिक किया-कलापों से एक हिन्दू तबसे इन संस्कारों से गुजरना होता है। नेपाल पूर्व में हिन्दूराज्य रहा पर अब भारत जैसा धर्मनिरपेक्ष राज्य है।  इनमें अनेक समानताएँ है। इसी के आधार पर व्यक्ति का समाजीकरण होता है। व्यक्ति का निर्माण होता है । यानी एक प्रकिया मानी जाती है। संस्कृति हमारे जीवन शैली का पर्याय है। जो इतिहास के तरह अपने घटना के विचारों को समय-समय पर बतलाती है। इसके अन्तर्गत हमारे दृष्टिकोण, विचार हमारी संस्थाएँ राजनैतिक, वैज्ञानिक, धर्मिक, नैतिक विधान हमारे पुस्तक से हमारे जीवन दार्शनिक ये समस्त वस्तुओं है। हमारे अन्य भी वस्तुए इन सभी को हम अपने पड़ोसी देश नेपाल के साथ पाते है। संस्कृति एक प्राकृतिक मनोभाव है। जब एक देश सम्पर्क में आते तभी वे अपने आचार-व्यवहार से दूसरों से सिखते है और सिखाते भी है।

नेपाल का गोरखपुर पर अधिकार रहा :

संस्कृति सदैव बदलती रहती है। 18वीं सदी में नेपाल एक शक्तिशाली देश था। वह अपने राज्य विस्तार के प्रयत्नशील था। उत्तर में चीन और विस्तार सम्भव नहीं था इसलिए दक्षिण में विस्तार की नीति अपनाई। 1801 में नेपाल ने गोरखपुर पर अधिकार कर लिया जिसे ब्रिटिश भारत और नेपाल की सीमाये मिल गई। हिमालय के तराई वाले भाग, नेपाल और ब्रिटिश भारत की सीमाएँ निर्धारित नहीं हो पाई थी। अतः सीमा निर्धारण दोनों देश के अवश्यम्भावी हो गया। परन्तु इसके पूर्व भारतीय शासकों को इस देश से सौहार्दपूर्ण संबंध थे। अंग्रेज 1816 में सुगौली संधि के उपरांत नेपाल पर अधिकार कर लिया इससे अंग्रेजो को बहुत लाभ हुआ नेपाल अंग्रेज का मित्र राज्य बन गया। इसके बाद से अंग्रेजों का भारी मात्रा में गोरखा सैनिक प्राप्त होते रहे। इस संधि के बाद शिमला, मसूरी और नैनीताल जैसे ठण्डे स्थान भी अंग्रजों को प्राप्त होते है। इससे अंग्रेज मध्य एशिया के लिए सुगम मार्ग मिल गया।

1950 में हुई थी शांति और मैत्री संधि :- यह संधि दोनों देशों में भारतीय और नेपाली नागरिकों के साथ निवास, संपत्ति, व्यवसाय और आवागमन के संबंध में पारस्परिक व्यवहार की बात करती है। यह भारतीय और नेपाली दोनों व्यवसायों के लिए राष्ट्रीय व्यवहार भी स्थापित करता है (अर्थात, आयात होने के बाद, विदेशी वस्तुओं के साथ घरेलू वस्तुओं से अलग व्यवहार नहीं किया जाएगा)। इससे नेपाल को भारत से हथियार प्राप्त करने का भी अधिकार मिल जाता है।

मानवीय सहायता:-

नेपाल एक संवेदनशील पारिस्थितिक रूप से नाजुक क्षेत्र में स्थित है जो भूकंप और बाढ़ के प्रति संवेदनशील है , जिससे जान और माल दोनों का भारी नुकसान होता है, जिसके कारण यह भारत की मानवीय सहायता का सबसे बड़ा प्राप्तकर्ता बना हुआ है। कोरोना के समय में उसने भारत से भरपूर सहायता पाई थी। चीन से सभी देश मुंह मोड़ चुके थे।

बहुपक्षीय साझेदारी:-

भारत और नेपाल कई बहुपक्षीय मंचों जैसे बीबीआईएन (बांग्लादेश, भूटान, भारत और नेपाल), बिम्सटेक (बंगाल की खाड़ी बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग पहल), गुटनिरपेक्ष आंदोलन और सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ) आदि में भाग लेते हैं।

कम्युनिस्ट माओवादियों का बढ़ता वर्चस्व :-

नये विचार और नये व्यवहार नये खोजों संस्कृति में परिर्वतन होता रहता है। जिसमें कुछ स्वतंत्र तत्व रहते है कुछ विरोधी भी रह जाते हैं जैसे नेपाल में माओवाद का उदय होना कहने के लिए इसकी जड़-मूल नेपाल में है पर भारत इससे अछूता नहीं रहा है क्योकि राजतंत्र से लोकतंत्र का शासन हो यह राजा नहीं चाहते थे। फलस्वरूप 2006 एक आन्दोलन उठ खड़ा हुआ जिसमें राजा के हाथ से सत्ता जनता द्वारा चुने गए हाथ सौंपना पड़ा।

नेपाल राजवंश से गोरखनाथ मंदिर का रहा पुराना संबंध :- 

गोरखपुर के गोरक्षपीठ के गोरखनाथ मंदिर और नेपाल का संबंध सदियों से हैं। नेपाल राजवंश का उद्भव भगवान गोरखनाथ के आशीर्वाद से हुआ था। जिसके बाद शाह परिवार पर भगवान गोरखनाथ का हमेशा आशीर्वाद रहा है। इसी कारण नेपाल राजवंश ने गुरु गोरखनाथ की चरण पादुका को अपने मुकुट पर बना रखा था, इतना ही नहीं नेपाल के सिक्कों पर गुरु गोरखनाथ का नाम लिखा है। गुरु गोरक्षनाथ के गुरु मक्षयेन्द्रनाथ के नाम पर आज भी नेपाल में उत्सव मनाया जाता है। राजपरिवार अब भी गुरु गोरखनाथ को अपना राजगुरु मानता है। 

    मकर संक्राति के दिन भगवान गोरखनाथ को पहली खिचड़ी गोरक्ष पीठाधीश्वर चढ़ाते हैं तो दूसरी खिचड़ी आज भी नेपाल नरेश की तरफ से चढ़ाई जाती है। कई बार नेपाल नरेश खुद खिचड़ी चढ़ाने यहां आए, नहीं तो उनका कोई न कोई प्रतिनिधि यहां पर खिचड़ी चढ़ाने आता है। उसको यहां से नेपाल की सुख शांति के लिए महारोट का प्रसाद दिया जाता है।

    नेपाल में बड़ी संख्या में लोग गोरखनाथ भगवान की पूजा करते हैं। उनकी गोरखनाथ में विशेष आस्था है। नेपाल में कई जगह भगवान गोरखनाथ के मंदिर हैं। इतना ही नहीं पशुपतिनाथ मंदिर में भी गोरखनाथ भगवान का मंदिर है, वहां मुक्तिनाथ धाम नाथ संप्रदाय का ही है। नेपाल में बड़ी संख्या में लोग नाथपंथ से जुड़े हुए हैं।

भारत नेपाल दोनों एक दूसरे के पूरक और सहयोगी बनें :-

भारत और नेपाल सदियों से 'रोटी-बेटी के रिश्ते' और साझा सांस्कृतिक विरासत से जुड़े हुए हैं। एक-दूसरे के पूरक बनकर दोनों देश अपनी खुली सीमाओं का अधिकतम लाभ उठा सकते हैं, जिससे व्यापार, पर्यटन, और ऊर्जा सुरक्षा में क्षेत्र का अभूतपूर्व विकास हो सके।दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए सहयोग, व्यापार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।दोनों देशों की भलाई इसी में है कि वे एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करते हुए आर्थिक विकास, सुरक्षा और सांस्कृतिक साझेदारी को बढ़ावा दें।


दोनों देश के बीच प्रमुख साझेदारी


1. आर्थिक एवं व्यापारिक साझेदारी

नेपाल का लगभग दो-तिहाई व्यापार भारत के माध्यम से होता है। दोनों देशों को अपनी पारगमन संधियों को और आधुनिक बनाना चाहिए। भारत, नेपाल को अपनी बंदरगाह सुविधाओं तक निर्बाध पहुँच देकर उसके निर्यात को बढ़ावा दे सकता है, जबकि नेपाल भारतीय उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण और सुलभ बाजार बन सकता है।

2. ऊर्जा और जल संसाधन (पनबिजली) के क्षेत्र में बढ़ावा :-

नेपाल में अपार जलविद्युत क्षमता है। दोनों देशों को मिलकर 'पनबिजली परि -योजनाओं' को विकसित करना चाहिए। नेपाल भारत की बढ़ती ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए बिजली का निर्यात कर सकता है। भारत तकनीकी और वित्तीय निवेश प्रदान कर सकता है।

3. धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा :- 

पर्यटन के क्षेत्र में दोनों देश एक-दूसरे के सबसे बड़े पूरक हैं। रामायण सर्किट और बुद्ध सर्किट में नेपाल के जनकपुर को भारत की अयोध्या से और लुंबिनी को भारत के बोधगया/सारनाथ से जोड़कर एक मजबूत धार्मिक पर्यटन कॉरिडोर विकसित किया जा रहा है, जिससे दोनों देशों को भारी राजस्व और रोजगार मिलेगा।  पशुपतिनाथ और भारत के विभिन्न धामों के बीच सदियों से तीर्थ यात्रियों का आदान-प्रदान होता रहा है, जिसे और आसान बनाया जा सकता है।

4. सीमा पार कनेक्टिविटीरेल और सड़क मार्गों का विस्तार :-

दोनों देशों को आर्थिक रूप से और करीब ला रहा है। जयनगर-कुर्था और रक्सौल-काठमांडू जैसे रेलवे प्रोजेक्ट्स से व्यापार और आवागमन आसान हुआ है। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास से दोनों देशों के सीमावर्ती क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। भारत और नेपाल की यह पूरकता न केवल दोनों देशों की अर्थ - व्यवस्थाओं को मजबूत करेगी, बल्कि दक्षिण एशिया में स्थिरता और समृद्धि का एक नया अध्याय लिखेगी। 



लेखक

आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,

पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी,

मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8

निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,

आनन्द नगर,कटरा, बस्ती,Pin 272001

उत्तर प्रदेश INDIA 

मोबाइल नंबर +91 9412300183



No comments:

Post a Comment