Thursday, May 21, 2026

बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाए हो तो उच्च अपमान के लिए भी तैयार रहिए✍️ आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी

यदि आप अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दिलवा रहे हो तो आपको अपने आचरण में भी आमूल परिवर्तन करना पड़ सकता है। आपको हर हाल में सबसे ज्यादा सहनशील बनना होगा। संयुक्त परिवार में अपने दादा दादी माता पिता भइया भाभी बुवा मौसी आदि को जिस तरह आपने अपनाया है वैसा नई जनरेशन करना नहीं चाहेगी। आज की हमारी नई पीढ़ी हम जैसे सब कुछ आत्मसात करने वाली नहीं निकल रही है। कुछ शिक्षा में संस्कार की कमी,कुछ माता पिता द्वारा जरूरत से ज्यादा छूट और कुछ पिक्चर - सीरियल के प्रभाव ने इसे पुरानी पीढ़ी से बिल्कुल अलग ही बना कर रख दिया है। पुरानी और समझदार पीढ़ी को संयोग से अनुकूल परिवार मिल गया तो ठीक है अन्यथा उसे उच्च अपमान स्वीकारने के लिए भी तैयार रहना चाहिए़।
     सास, ससुर, बहू और बेटे का रिश्ता आपसी समझ, सम्मान और विश्वास की मजबूत नींव पर टिका होता है। यदि आपने अपने सीमित संसाधन में अपने बच्चों की परवरिश की है। उन्हें उच्च शिक्षा दिलवाकर स्वावलंबी बनवाकर कहीं दूर उनकी जीविका चलवा रहे हैं या नौकरी करा रहे हैं तो आप उनसे उच्च अपमान भोगने के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उच्च शिक्षित महिलाओं और उनके सास-ससुर के बीच विचारों में भिन्नता, जीवनशैली में अंतर या अपेक्षाओं के टकराव के कारण भावनात्मक लगाव की कमी देखी जा रही है।
    आपके बच्चे आपके ना होकर आपकी बहू और उसके पति के रूप में ज्यादा परफेक्ट हैं । वे अपनी मां या मायके वालों के संपर्क में ज्यादा रहना पसंद करते हैं और उन्हीं के संस्कार और क्रिया कलापों का ज्यादा अनुकरण करते रहते हैं। उनके लिए पति के माता-पिता का कोई खास वजूद नहीं रहता है। उनकी जीविका अच्छी तरह से चल रही है और उन्हें केवल अपने पति के संपत्ति में हिस्से की जरूरत रहेगी । इसके अलावा उन्हें अपने सास-ससुर के स्वास्थ्य, सेवा अथवा देखरेख में कोई खास रुचि नहीं रहती है। सास-ससुर एक तरह से पैतृक संपत्ति की चौकीदारी करते हैं और करते रहेंगे।
     यह प्रसंग मै एक सत्य घटना पर आधारित होकर लिख रहा हूं ,जो मेरे पड़ोस में घटी है। उसी के आधार पर यह विचार व्यक्त करने का साहस मैं कर पा रहा हूं । एक दंपत्ति कभी मेरे किराएदार रहा करते थे , जो बाद में खुद का मकान भी बनवा लिए। जो मेरे किसी हैसियत से कम में नहीं है। उनके दो बेटे हैं, दोनों पढ़े-लिखे हैं और बाहर रहने लगे । उनकी शादियां हुई , उनके बाल बच्चे भी हुए। वे घर मकान भी बाहर ही बना लिए । लेकिन वे अपने मां-बाप को कोई महत्व नहीं देते। हां, जब मां - बाप ज्यादा बीमार होते या उनके पास ही चले जाते, तब अपनी फर्ज अदायगी कर देते हैं। पिता जी एयरफोर्स के अधिकारी थे । उनका एक बेटा एयरफोर्स में लगा हुआ है और दूसरा फार्मेसी का उच्च कोर्स किया हुआ है और प्रोफेसर बन गया है। उनकी बहूये भी पढ़ी-लिखी है और कहीं जॉब में है। वे अपने घर की निजी गृहस्थी को ठीक से संभाल रहे परंतु अपने माता-पिता को मान - सम्मान अथवा देखरेख करने के लिए इच्छुक नहीं है । 
     जब उनके सास-ससुर इन लोगों के पास जाते हैं तो यह तरह-तरह के फरमाइश डिमांड देते रहते हैं। आज की स्थितियां यह है कि सास मां गोरखपुर में एडमिट है और पिता लखनऊ में,जहां से पिता अपने बेटे के पास चंडीगढ़ जाने के लिए इच्छुक हैं ।
    उनके बेटों ने पूर्व में एक घरेलू नौकर भी दे दिया था पर यह बूढ़े दंपति पैसा बचाने के चक्कर में उस नौकर को अपने साथ ज्यादा समय तक नहीं रख सके और थोड़े दिन रखकर उसे मुक्त कर दिये। अब जब कोई स्वास्थ्य की समस्या आती है उनके किराएदार और पास पड़ोसी जितना हो सकता है संभालते हैं । उनकी बेटे बहूओ को अपने सास-ससुर के स्वास्थ्य से कुछ लेना-देना नहीं है। यह भी पता चला है की बहूये मनमानी करती है और सास ससुर का सम्मान नहीं करती थी इसलिए माता-पिता इनसे दूरी बनाकर अलग ही रह रहे थे।
     इस पोस्ट को लिखने का मेरा आशय यह है की यदि हमने उच्च महत्वाकांक्षा में अपने बेटे और बहू को अच्छे मुकाम पर पहुंचाये हैं तो हमें उनसे कोई आपेक्षा भी नहीं रखनी चाहिए, क्योंकि उनकी प्राथमिकता में हम पहले पायदान में नहीं आते हैं । पहले पायदान में बहू के मायके और दूसरे में बहू के पति व बच्चे आते हैं । तीसरी नंबर पर रहने के कारण सास- ससुर को यह अभ्यास कर लेना चाहिए कि हम उनसे कोई आपेक्षा और उनसे कोई उम्मीद ना रखें । सास-ससुर को यह स्वीकार करना चाहिए कि समय के साथ चीजें बदलती रहती हैं। उनसे अपमान मिलने पर भी खुश रहें और कहीं से व्यक्त भी न करें। यदि ऐसा हम कर लेते हैं तो हम अपने आखिरी वक्त में थोड़ी सुकून की जिंदगी जीकर अंत में मृत्यु का वरण भी ठीक- ठाक रूप में कर सकेंगे।

लेखक :
आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,
पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी,
मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8
निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,
आनन्द नगर,कटरा, बस्ती,Pin 272001
उत्तर प्रदेश INDIA 
मोबाइल नंबर +91 9412300183


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