Wednesday, April 29, 2026

नेपाल के पोखरा का गुप्तेश्वर महादेव का विलक्षण गुफा मंदिर ✍️आचार्य डॉ. राधे श्याम द्विवेदी


               (पोखरा नेपाल से )

नेपाल के पोखरा में गुप्तेश्वर गुफा प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है । यह एक अत्यंत पवित्र और रहस्यमय स्थल है जो ज़मीन से लगभग 150 मीटर नीचे स्थित यह गुफा हरे-भरे चट्टान से गिरते झरने का मनोरम दृश्य प्रस्तुत करती है । दक्षिण एशिया की सबसे बड़ी गुफाओं में से एक , इस गुफा में मंदिर और एक विशाल खुला क्षेत्र भी है। “गुप्तेश्वर" का अर्थ ही है "छिपे हुए ईश्वर" महादेव के रूप में जाना जाता है। गुप्तेश्वर मंदिर पोखरा का एक धार्मिक और पर्यटक स्थल है । माना जाता है कि यह गुफा 16वीं शताब्दी में खोजी गई थी। 
स्थानीय लोगों को यहाँ घास काटते समय एक गुफा मिली, जिसके अंदर भगवान शिव का एक प्राकृतिक रूप से बना शिवलिंग मिला। मन्दिर के गेट के अंदर एक विशाल मार्किट भी बनी हुई है, जहां पूजा सामग्री, मूर्ति ,माला, शंख ,शालिग्राम और खाने - पीने, किताब आदि जनरल सामग्री महंगे मूल्य में मिलती है । सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मंदिर में प्रवेश करने की जगह अनेक जगह साइनेज और बिजली की पर्याप्त व्यवस्था की गई है। शिवजी को समर्पित ये मंदिर एयरपोर्ट से शांति स्तूप जाने वाले रास्ते पर स्थित है।
चित्ताकर्षक प्रवेश द्वार :- 
मंदिर में जाने के लिये रोड पर ही गेट बना हुआ है। सड़क पर ही दोनों तरफ दो मुख्य दृश्य बहुत ही आकर्षक है। सड़क से मुड़ते ही बाएं तरफ पीले रंग स्वर्ण जैसा नन्दी की सुन्दर प्रतिमा चित्त को आकर्षित करती है। नन्दी के सामने शिवलिंग भी सुशोभित है। सड़क से मुड़ते ही दाएं तरफ पीले रंग में एक ऊंचे आधार पर कमल, उस पर कच्छप उसके ऊपर एक आकर्षक रंगीन पीले स्वर्णिम स्तम्भ में सर्प ,ॐ ,डमरू, त्रिशूल और सर्प की आकृति भी बहुत मनोहारी ढंग से समुद्र मंथन का दृश्य अंकित है। मंदिर के सड़क के प्रवेश द्वार के स्तम्भ पर गंगा यमुना और कई अन्य मूर्तियां चित्त को आकर्षित करती है। उस पर नाम अंकित भी है और इलेक्ट्रानिक रूप में फ्लैस होता है। उस गेट पर ऊपर शंकर जी की प्रतिमा दूर से ही दिखाई देती है।

मंदिर में प्रवेश के लिये महंगा शुल्क है। एक आदमी के लिये 100 नेपाली रूपये / 65 भारतीय रुपए का टिकट लगता है। मंदिर में जाने के लिये गोल- गोल घुमावदार सीढिया बनी थी और नीचे गुफा में एंट्री करने पर कई जगह सिर झुकाना पडता है कि कहीं पर गुफा की कम उंचाई की वजह से टकरा ना जाये । पत्थरों से रिस रिस कर अमरनाथ के गुफा जैसे अनेक शिवलिंग भी छोटे छोटे रूप में देखे जा सकते हैं।
विलक्षण गुफा और उसके भित्ति चित्र गुफा में अंदर जाने पर पहले कामधेनु गाय की प्रतिमा आती है । अंदर आगे जाने पर थोडी बडी जगह आती है जहां पर शिव लिंग स्थापित है ।सामने आकर्षक भव्य 
शिवलिंग है। और उसके पीछे आधार में पाषाण का विशाल शिव लिंग है जो वासुकीनाथ केअसंख्य फ़णों द्वारा आच्छादित है। इस पूरी गुफा में पानी टपकता रहता है और थोडी और आगे जाने पर गुफा संकरी होती जाती है और फिर सीढिया आती हैं । काफ़ी नीचे उतरने के बाद सीधी लंबाई में आगे बढ़ते जाने पर काफ़ी आगे जाने के बाद बहुत बड़ा झरना दिखाई देता है।इस गुफा में तेज और बहते पानी का शोर वातावरण को मनोहारी बना देता है ।
ये डेविस फाल ही है जो कि सडक के दूसरे किनारे की ओर से आ रहा है पर गुफा में इतने गहरे तक उतरकर उस फाल को गिरते देखना एक नया अनुभव होता है जो अब तक कहीं नही देखा और ना ही ये कैमरे में समा सकता है। बरसात के मौसम में ये विकराल रूप में जब इस जगह पर गिरता होगा तो और भी ज्यादा सुंदर लगता होगा । 

लेखक:
आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,
पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी,
मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8
निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,
आनन्द नगर,कटरा, बस्ती,Pin 272001
उत्तर प्रदेश INDIA 
मोबाइल नंबर +91 9412300183



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