Tuesday, April 14, 2026

रामनिहाल दास की तपोभूमि उमरिया (बस्ती)और प्रतापपुर इमलिया (अंबेडकरनगर)✍️आचार्य डॉ.राधे श्याम द्विवेदी

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के गुरु ब्रह्मर्षि वशिष्ठ की धरती वशिष्ठनगर बस्ती जनपद में राम जानकी मार्ग चिलमा बाजार के दक्षिण उमरिया गांव में देवरहा बाबा के रूप में एक महान सन्त का जन्म हुआ था। जो अयोध्या से जनकपुर जाने वाले ऐतिहासिक राम जानकी मार्ग के दक्षिण पूण्य सलिला सरयू नदी के तट पर स्थित है। इसके अलावा यह उर्वरक भूमि सिद्ध सन्त बाबा निहाल दास और श्यामा सदन अयोध्या के महन्त गोपाल दास और हनुमान गढ़ी के महंत राजू दास जी जैसे मूर्धन्य विद्वान को भी जना है।

स्थानीय लोगों के मुताबिक सैकड़ों वर्ष पूर्व बस्ती के उमरिया गांव में रामनिहाल दास नाम के एक पुजारी रहते थे, जिन्हें सिद्ध पुरुष माना जाता था। मान्यता है कि बाबा गंभीर से गंभीर रोग सिर्फ छूकर ठीक कर देते थे। बाबा ने यहां जीवित समाधि ली थी। बाबा के हाथ से स्थापित मंदिर सरयू नदी तट पर मौजूद है। नदी की बाढ़ से कभी भी मंदिर को नुकसान नहीं हुआ है। एक बार बाढ़ आ भी गई थी पर वह मंदिर को स्पर्श कर वापस चली गई थी। कहा जाता है कि बाबा जी के गुरु किसी बात पर नाराज हो गए थे और 12 वर्ष तक निहाल बाबा को मंदिर और आश्रम की साफ सफाई करने का आदेश दे गए थे। यह अवधि पूरा करने के बाद बाबा जी में और सिद्धियां आ गई थीं। यहां बाबा जी की समाधि और मूर्ति दोनों बनी हुई है। जहां प्रत्येक साल के दीपावली के बाद यम द्वितीया और साप्ताहिक मंगलवार को श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है।

यम द्वितिया पर लगे विशाल मेले में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रहती है। भोर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा के प्रतिमा का दर्शन कर मनोकामना पूरा होने की कामना करते हैं। मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु अपनी इच्छा से मंदिर में मनौती मानता है, उसे इसके पुण्य का अवश्य मिलता है। 

      महंत सुखराम दास के अनुसार बाबा निहाल दास यहीं पर बैठकर तपस्या किया करते थे। यहां इस मौके पर विशाल मेला भी लगता है। श्रद्धालु यहां सरयू नदी में स्नान करने के बाद बाबा निहाल दास को प्रसाद चढ़ाकर और बाबा के प्रतिमा का दर्शन कर अपने मन की कामना पूरा  करते हैं। बाबा की कुटी पर भोर से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है जो शाम तक जारी रहता है । मेले में बस्ती के अलावा अंबेडकरनगर के लोग भी भारी संख्या में आते हैं। मेले के दिन भंडारा का आयोजन भी होते रहते हैं। 

      बाबा राम निहाल दास की कुटी के परिसर में विभिन्न प्रकार की दुकानों की सजावट और भीड़ देखते ही बनती है। कई जिलो के दूर-दराज से आए व्यापारी अपनी-अपनी दुकानें लगाते हैं। मेले में आए लोग  मिट्टी के बर्तन, सौंदर्य प्रसाधन, घर गृहस्थी के सामान खरीदते हैं।महिलाएं सूप,मचिया की खरीददारी करती हैं। बच्चों खिलौने व सिघाड़े का आनंद लेते हैं। क्षेत्र के लोग मुख्य रूप से खेती किसानी से जुड़े लोहे के सामान जैसे कुदाल, फावड़ा, हंसियां और खुरपा आदि खरीदते नजर आते हैं। बच्चों के लिए झूले और खिलौनों की दुकानों पर भी खासा जमावड़ा रहता है। 

सिद्ध पीठ बाबा राम निहाल दास की कुटी और भक्तों की सुरक्षा के लिए यहां पुलिस चौकी भी स्थापित है।मेले की सुरक्षा में बस्ती जिले के दुबौलिया पुलिस केअलावा कप्तानगंज, कलवारी, लालगंज, नगर की पुलिस के साथ यातायात पुलिस उपस्थित रहती है। 

प्रतापपुर इमलिया अम्बेडकरनगर में बाबा  एक और प्रसिद्ध तपस्थली :- 

अम्बेडकरनगर के कटेहरी क्षेत्र प्रतापपुर इमलिया में स्थित श्री बाबा निहाल दास जी की एक और प्रसिद्ध दिव्य अलौकिक कुटिया है। यहां एक विशाल जलाशय के समीप जंगल में शिवजी ,पार्वतीजी,नंदीजी और हनुमानजी की दिव्य प्रतिमाएं और यज्ञ शाला भी स्थापित हैं। बाबा जी को उनके गुरु जी ने 12 साल मंदिर की साफ सफाई करने का आदेश दिया था जिसे पूर्ण कर बाबा जी और दिव्यता के साथ चमक उठी थी। यहां प्रत्येक मंगलवार को मेला लगता है, यहाँ प्रतिदिन स्थानीय व दूरदराज के लोग अपनी अपनी मन्नतों को लेकर आया करते है और उनके आस्था विश्वास समर्पण भक्तिभाव के अनुरूप बाबा जी की कृपा आशीर्वाद से अवश्य पूर्ण होता है, ऐसी अद्भुत मान्यताओं को लेकर यह तपस्थली काफी प्रचलित है। यहां भक्तजन अपने धार्मिक भावनाओं के आधार पर तरह-तरह के चढ़ावा करते है।  

यह चारों तरफ जंगलो से घिरा हुआ एक ऐसा अलौकिक शक्ति से परिपूर्णप्राकृतिक सौंदर्य से युक्त देव स्थल है, जहाँ पहुँचने मात्र से कुछ पल व्यतीत करने से तनावों से मुक्त आत्मशान्ति अलौकिक और आध्यात्मिक ऊर्जा का एहसास होता है। भौतिकतावाद के झंझावात से ग्रसित नाना प्रकार के दैहिक, दैविक और भौतिक समस्याओं से यदि उलझे हुए हो और आपको कोई मार्ग न दिखाई दे रहा हो, चारों ओर अंधकार ही अंधकार नजर आ रहा हो तो धार्मिक भक्तिभावना से एक बार इस अलौकिक तपोस्थली पर आए दर्शन प्राप्त करे।निश्चित रूप से समस्त समस्याओं से आपको निजात मिल जाएगी। मनुष्य जीवन में आने वाले समस्त संघर्षों व विघ्न बाधाओं से डटकर सामना करने की सामर्थ्य प्राप्त होगी। 

धर्म अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों से भरपूर महान संत बाबा निहाल दास जी के तपसाधना से ऊर्जावान्वित साधना भक्ति से परिपूर्ण अलौकिक ऊर्जा शक्ति का केन्द्र श्री बाबा जी की कुटिया के परम्परागत गद्दी पर आसीन परम पूज्यनीय महंत बाबा पराग दास जी है, जिनके द्वारा नित्य प्रति आने वाले भक्तजनों के दुःख, संकटों का निवारण उनके द्वारा किए गए यज्ञशाला के हवनकुण्ड की भभूति प्रसाद प्रदान कर किया जाता है।

बाबा की साहित्यिक और धार्मिक रुचि 

गोकुल भवन अयोध्या जी के महंत श्री परमहंस राम मंगल दास जी के संकलन में बाबा निहाल दास जी के लोक साहित्य में गारी और दोहा चौपाई संकलित कर रखा है, जो इस प्रकार है - 

भक्ति की गारीः- 

चारि पदारथ देन हार यह नर तन सुर मुनि गाई जी। 

बिन सत्संग जात है बिरथा पुनि पुनि गोता खाई जी। 

काम क्रोध मद लोभ मोह यह असुर बड़े दुखदाई जी। 

पांचों संस्कार ये जानो तन में रहत सदाई जी। 

दम्भ पखण्ड कपट औ निद्रा आलस संघ जम्हुआई जी।। 1।।


माया द्वैत बासना नाना संग मन नाचे जाई जी। 

चिंता तन में चिता लगावै दुख चढ़ि बैठे आई जी। 

यह समाज आसुरी बंश की थकै न नेको भाई जी। 

महा जाल में फांसि लेत औ नर्क को देय पठाई जी। 

शान्ति शील संतोष दीनता प्रेम के हाल सुनाई जी।।2।।


क्षिमा दया सरधा औ हिम्मति सत्य समाधि लगाई जी। 

ज्ञान बिराग संग विश्वासौ लय में पहुँचौ धाई जी। 

परस्वारथ परमारथ दोनो कैसे कोउ करि पाई जी। 

देवासुर संग्राम जीतिये घट ही में चमकाई जी। 

हरि सुमिरन बिन जीति न पैहौ सुनिये सब मम भाई जी।।3।।


सतगुरु करि सुमिरन बिधि जानौ तब मन वश स्वै जाई जी। 

नाम खुलै हरि दर्शन लागैं खल सब चलैं पराई जी। 

ध्यान समाधि में पहुँचि जाव जब करम भरम मिटि जाई जी। 

सबै देव मुनि संग बतलावैं हर्ष न हृदय समाई जी। 

दास निहाल सुरति औ शब्द क मारग अति सुखदाई जी।।4।।


दोहाः-

चिता के ऊपर बैठि कै, 

राम राम कहि जान। 

निहाल दास कहैं जारि तन, 

छोड़ि दीन हम प्रान।।


बास मिल्यो बैकुण्ठ में, 

आवा गमन मुकाम। 

या की गणना जगत में, 

बात मानिये आम।।


चौपाई:- 

नाम रूप लीला औ धामा। 

शून्य समाधि जानि निज जामा।

मरै बासना निर्भय होवै। 

सो साकेत जाय सुख सोवै।।


दोहाः

जो जियतै में तय करै, 

सोई चतुर सुजान। 

नाहिं तो जनमै मरै, 

मानों बचन प्रमान।।


चौपाई:- 

बाबन बेर ठगावै जोई। 

बावन बीर कहावै सोई। 

धोका खाये बिन नहिं ज्ञाना। 

हम तो यह अपने मन माना।।

पानी दूध वहां बिलगाना। 

सुनतै खुलि गे आँखी काना।। 

बचन हमार मानि यह लेना। 

सत्य नाम की सिक्षा देना।।

रेफ बिन्दु जो सब में ब्यापक। 

सब का जानो यह अध्यापक।।

या को जानि लेय जो कोई। 

ता को आवागमन न होई।।


दोहाः

नाम कि धुनि खुलि जाय जब, 

सुर मुनि दर्शन दैय। 

मुद मंगल ह्वै जाय तब, 

हरि निज पास में लेंय।। 


(सन्दर्भ : “श्री राम-कृष्ण लीला भक्तामृत चरितावली' श्री परमहंस राममंगलदास जी द्वारा रचित प्रथम दिव्य ग्रन्थ। ग्रन्थ - 1, भाग - २ दिसम्बर २००१)


लेखक:

आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,

पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी,

मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8

निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,आनन्द नगर,कटरा, बस्ती,PIN - 272001

मोबाइल नंबर +91 9412300183


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