Wednesday, April 15, 2026

अयोध्या को पर्यटन ना बनाओ तीर्थनगरी ही रहने दो ✍️आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी


श्री राम जन्म भूमि मंदिर निर्माण से पहले अयोध्या की पहचान पवित्र तीर्थ स्थान तक सीमित थी। इसकी अर्थव्यवस्था में विगत वर्षों से ऐतिहासिक उछाल तब आया है जब राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद यहां पर्यटन, निवेश, रोजगार और राजस्व में व्यापक वृद्धि दर्ज की गई है। पहले मेले और पर्वों के समय ही अयोध्या चहकती और दमकती थी। साकेत पोस्ट ग्रेजुएट कालेज से शिक्षा के क्षेत्र में यहां कुछ बदलाव और भीड़ भाड़ होता रहा है। यहां के संस्कृत विद्यालय निर्धन छात्रों के शरणगाह रहे हैं। इसी के बहाने अनेक मन्दिरों में पूजा आरती और भगवान जी विग्रह का भोग आरती और पूजा अर्चना संस्कृत पढ़ने वाले बटुक जन कर दिया करते थे। यह सिलसिला काफी दिनों से चलता रहा है। सत्ता बदली नए-नए जिम्मेदार आए, पर अयोध्या के हालत में ज्यादा परिवर्तन नहीं आया। 

मोटे तौर पर पर्यटन स्थल वह जगह होती हैं, जहां लोग घूमने फिरने आते हैं, अपने अंदाज में वहां के सौंदर्य और सुविधाओं का मौज मस्ती करते हुए आनंद लेते हैं। तीर्थ स्थल हमेशा उन जगहों से जुड़े हैं, जो दैवीय आस्था और भरोसे का केंद्र होते हैं।जहां श्रृद्धालु आमतौर पर श्रृद्धाभाव के साथ दूर दूर से भगवान की पूजा अर्चना के लिए आते रहते हैं। हर तीर्थ स्थल का ऐतिहासिक रूप में अपना एक विशेष महत्व रखता है। तीर्थ स्थल पर जाते हुए हम कोशिश करते हैं कि हमारा तन-मन और आचरण को शुद्ध रहे। इसीलिए बहुत से धार्मिक स्थलों पर जाने के लिए कुछ नियमों और शर्तों का भी पालन करना होता है। बहुत से धार्मिक स्थलों पर जाने पर हमको पोशाक की मर्यादा का ध्यान रखना होता है। कई धार्मिक स्थलों पर बकायदा ड्रेस कोड से लेकर आचरण संबंधी आचार संहिता भी लागू होती है।

एक तीर्थ स्थल को पर्यटन क्षेत्र घोषित नहीं किया जाना चाहिए। यह हमारी आस्था का क्षेत्र है, यदि इसे पर्यटन क्षेत्र घोषित किया जाएगा तो लोग यहां आएंगे, घूमा फिरी करेंगे। यहां, खाना-पीना, शराब आदि वर्जित चीजों का उपयोग करने लगेगें।जिससे इस तीर्थ स्थल की पवित्रता भंग हो जाएगी।

श्रीराम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद विवाद के समाधान के बाद अयोध्या की परिस्थितियां बदलनी शुरू हो गई। श्रीराम लला मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से यहां की आर्थिक गतिविधियों में अभूतपूर्व उछाल आया है। पर्यटन पर आधारित गतिविधियों से कर राजस्व 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। आतिथ्य क्षेत्र, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में तेजी से विस्तार हुआ है। सांस्कृतिक और धार्मिक परियोजनाएं योजनाबद्ध तरीके से क्रियान्वित करके पर्यटन, रोजगार और निजी निवेश को गति देकर बहुस्तरीय आर्थिक वृद्धि का आधार बन सकती हैं। अयोध्या में आधारभूत संरचना, पर्यटन सुविधाओं और निवेश माहौल में व्यापक बदलाव देखने को मिला है, जिसने इस तीर्थनगरी को विकास की मुख्यधारा में अग्रिम पंक्ति पर लाकर खड़ा कर दिया है।

1.'राम की अयोध्या' व्यवसाय नहीं :- 

अयोध्या प्रभु राम की स्मृति से परिभाषित होती है, न कि केवल कंक्रीट ईंट पत्थर और व्यावसायिक भौतिकता से। अयोध्या सबकी है, लेकिन यह “राम की अयोध्या” होनी चाहिए, न कि केवल मंदिर-व्यवसाय की। भीड़भाड़, अंधाधुंध परियोजनाएँ और परंपरा का हनन होता रहा। अयोध्या अजेय है, उसे कोई जीत नहीं सका है। वो अपने साथ किए हर अन्याय को ब्याज समेत लौटाती है।  

2.अयोध्या के साथ धोखा हुआ :- 

राम नगरी केवल पत्थरों और ईंटों का ढेर नहीं है ,बल्कि राम की स्मृति, आध्यात्म की ज्योति और सनातन की अस्मिता भी है । मोदी और योगी जैसे दो धुरंधरों के रहते इस नगरी के अंधाधुंध “विकास” के नाम पर कई रूपों में अत्याचार,लूट और सांस्कृतिक हत्या हुई है जिसे लोग देखते रह गए । यह अयोध्या के साथ धोखा हुआ है। विकास के नाम पर इसकीआध्यात्मिक अस्मिता को कुचला जा रहा है। घाट, जो राम-सीता की स्मृतियों के साक्षी हैं, आज वेडिंग शूट के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। सरयू के किनारे आस्था विश्वास की प्रेम की कहानियाँ लिखी जानी चाहिएं न कि दिखावटी फोटो सेशन की।

3.वीआईपी मूवमेंट और पर्वों के समय अयोध्या का रूट डाइवर्जन होता रहा:- 

राम की नगरी, जहाँ सदियों से भक्ति की सरयू बहती रही, जहाँ हर कण में प्रभु के चरणों की ध्वनि गूँजती रही, वह अयोध्या अब लंबे अरसे बाद एक नई आशा की किरण में नहा रही है। मंदिर निर्माण के बाद से कड़ी सुरक्षा की जंजीरें, विकास के नाम पर विध्वंस की आँधी और वी वी आई पी व्यवस्था की बंदिशों ने उसे जकड़ रखा है। प्रदेश के विभिन्न भागों से आने वाले भारी वाहन अयोध्या शहर में प्रवेश के पहले ही दूसरे घुमावदार रास्ते पर भेज दिए जाते हैं। इस तरह पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के लोगों और व्यापारियों को समय और धन दोनों का नुकसान उठाना पड़ता है।

4.पुरातन सरयू जी की महिमा बच नहीं रही :- 

 समय के साथ साथ अयोध्या नित नए कलेवर को धारण करती रही है। एक सरयू जी ही राम के समय से पूर्व से होते हुए आज भी कायम है। भले यह अयोध्या को छोड़ बस्ती और गोण्डा जिले में अपना आशियाना बना रखा हो। आज कम से कम राम की पौड़ी, अयोध्या के घाट को तो छोड़ दिया जाना चाहिए । वे वेडिंग शूट और रीलबाजों के लिए नहीं बने हैं। आज के समय में भला आदमी इन उन्मुक्त वातावरण में ज्यादा समय ठहर नहीं सकता है।

5.विकास मॉडल से नुकसान :- 

विकास के नाम पर असल पहचान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अब लोग हनीमून मनाने के लिए गोवा की जगह अयोध्या आने लगे हैं। सरयू नदी में क्रूज चलाकर यहां सदियों से उन्मुक्त वातावरण में रहने वाले जलचर अब यह क्षेत्र छोड़ चुके हैं। उन्हें अपने कर्म और प्रारब्ध से मिला सरयू और अवध के वास को जबरन छीना जा रहा है। यह उनके साथ घोर अन्याय हो रहा है। 

6.पाबंदियों वाली प्रशासनिक व्यवस्था:- 

सरकारी एजेंसियां पर्याप्त सावधानी और होमवर्क करने के बजाय अयोध्या के विचरण करने और आने - जाने पर केवल पाबंदी लगाती है। यहां अगर निवासियों का प्रशासन से तालमेल न हो तो आम आदमी का जीना मुश्किल हो जाता है। अयोध्या में रहते हुए अगर अयोध्या के प्रशासन से हमारा व्यवहार ठीक नहीं हैं, तो हमारा जीना दूभर हो जाएगा । हम , हमारे बच्चे,रिश्तेदार और मित्र  हमारे सुख-दुख के भागी नहीं बन सकते हैं। उन्हें शहर में वाहन के साथ प्रवेश नहीं मिल सकता है।इस पाबंदियों को पुलिस व्यवस्था द्वारा लागू किया जाता है।

7.शांत जीवन में अशांत घुस आया :- 

अब वहां के मूलनिवासी और साधू-संतों का शांत जीवन एकदम अशांत हो गया है। आम आदमी की अगर प्रशासन में पकड़ नहीं है तो प्रशासन द्वारा घर आना-जाना नर्क बना दिया गया है। बच्चों का स्कूल आना- जाना, पठन - पाठन अब बहुत कठिन हो गया है। अस्पताल में आना- जाना भी मुश्किल हो गया है। यह सब सुरक्षा के नाम पर प्रशासन की निर्दयता की वजह से हो रहा है।

8.छोटे-छोटे प्रवेश मार्गों पर पुलिस के बैरियर :- 

मुख्य मार्ग पर प्रवेश वर्जित होने के साथ छोटी छोटी गलियों में भी बैरियर और प्रवेश निषेध के बोर्ड लगे मिलते हैं। वहां पुलिस होमगार्ड के जवान मुस्तैदी से लोगों को रोकते देखे जा सकते हैं। स्थानीय छोटे - छोटे वाहन रिक्शे और टैम्पो रोजी-रोटी के तहत इस प्रकार के प्वाइंट पर अपने वाहन लगाकर आम श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के दैनिक क्रिया-कलापों को प्रभावित करते रहते हैं।

9.तीर्थ यात्री पैदल चलने के लिए मजबूर हुए :- 

वैसे कहने को मुख्य मार्गों पर प्रदूषण मुक्त वाहन सरकार उतार रखे हैं पर ये पूरी अयोध्या के प्रमुख मन्दिरों और स्थलों तक पहुंच नहीं सकते हैं। दो-चार किमी चलकर आगे पुलिस द्वारा सवारियां उतरने और पैदल चलने के लिए मजबूर कर दिए जाते हैं। इसके लिए अच्छी खासी पुलिसिंग व्यवस्था भी की गई होती है। आम तीर्थ यात्री और आम नागरिक को अनायास ये पाबंदियां झेलनी पड़ती है।

10.स्थानीय प्रवेश प्रतिबंधित रहता है:-

यह देखा गया है कि अधिकांश समयों में यहां के मुख्य धर्म क्षेत्र में यहां के निवासियों और आगंतुकों के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहता है। स्थानीय रिक्शे वाले लंबी दूरी तय करके ही यात्रियों को गंतव्य तक नहीं छोड़ पाते हैं। कभी-कभी वीवीआईपी के निकल जाने के बाद भी यह प्रतिबंधित प्रवेश चालू नहीं हो पाता है और ये समन्वय का बड़ा फेलियर बन जाता है।

11.अस्पताल जा पाना सम्भव नहीं:- 

अयोध्या में रहते हुए अगर अयोध्या के प्रशासन से हमारा व्यवहार मधुर नहीं हैं, तो हमारा जीना दूभर हो जाता है।आपात स्थिति में भी पुलिस द्वारा बैरियर नहीं हटाए जाते हैं।आदमी मर जाए पर प्रशासन बैरियर न उठवाता है। यह अयोध्या का उद्धार कदापि नहीं हो सकता है। इसे हर जिम्मेदार उच्चस्थ लोग जानते हुए भी सुधार कर पाने में असमर्थ रहते हैं।

12.नए-नए मोहल्ला क्लिनिक खुलें :- 

अयोध्या के लोगों को मौलिक चिकित्सा सुविधा मिलना असंभव हो गया है। यातायात प्रतिबंध के कारण हुए लोग अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते हैं। इसलिए जगह-जगह मोहल्ला क्लीनिक और एंबुलेंस की व्यवस्था होनी चाहिए ,जिससे यहां के निवासियों ,आगंतुकों और तीर्थ यात्रियों को समय से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर उनका जान बचाया जा सके।

13.अयोध्या ‘अयोध्य’ है :- 

अयोध्या ‘अयोध्य’ है, उसे कोई जीत नहीं सका है। अयोध्या को शास्त्रों में “अयोध्य” कहा गया है, यानि जिसे शत्रु जीत न सके। वह अपने साथ हुए हर अन्याय का जवाब समय आने पर देती है। भगवान राम और भक्त भरत के त्याग से कुछ सीख ग्रहण करें यहां के लोग। तभी इसका सम्यक विकास हो सकेगा।

 14.आध्यात्मिक भावना का मजाक:- 

अयोध्या की पवित्र नगरी  के आध्यात्मिक  भा्वना का मजाक बनाकर इसे मनोरंजन और व्यवसायिक स्थल बना दिया गया है। आध्यात्मिक क्षेत्र को मनोरंजन का स्थान न बनने दिया जाय। भक्ति, और श्रद्धा बढे, ऐसा प्रयास करना चाहिए। भगवान श्रीराम सभी को सद्बुद्धि ओर सदवृति दें, हम यही प्रार्थना करते हैं।

15.विनम्र सहयोग पूर्ण रवैया हो :- 

माननीय मुख्यमंत्री जी से विनम्र निवेदन है कि प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हो कि यहां के आम नागरिकों, व्यापारियों,पर्यटकों और छात्रो के साथ प्रशासन अत्यंत विनम्र सहयोगपूर्ण रवैया अपनाए। इसकी अच्छी तरह से मानीटरी किया जाए तथा स्थानीय लोगों को लेकर पर्यवेक्षण कमेटियां इसकी निगरानी करे।


लेखक:

आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,

(पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी, भारत सरकार) मकान नम्बर 2785 ,निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,आनन्द नगर,कटरा, बस्ती,Pin 272001,मोबाइल नंबर +91 9412300183)


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