Thursday, April 16, 2026

प्रीपेड स्मार्ट मीटर का दंश, सरकार द्वारा थोपा गया कानून, एजेंसियो को लाभ पहुंचाना ही सरकार की मानसिकता बनी✍️डा. राधेश्याम द्विवेदी


प्रीपेड स्मार्ट मीटर का दंश जनता के लिए शुरुआती दौर में "बिजली संकट" और आर्थिक बोझ के रूप में एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, जिसमें अचानक बैलेंस खत्म होने पर लाइट कटना और पुराने मीटर्स की तुलना में तेज खपत की शिकायतें प्रमुख हैं। यद्यपि यह तकनीकी सुधार का हिस्सा है, लेकिन ग्रामीण और गरीब परिवारों पर इसका प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। 

प्रीपेड स्मार्ट मीटर का दंश शायद ही जनता झेल पाए। आपातकाल में संजय गांधी जी ने जबरन नशबंदी का अभियान चलाया था। आबादी तो नहीं घटी। सरकार चली गई। स्मार्ट मीटर योजना भी सरकार को ले डूबेगी। गर्मी के दिनों में आम जनता बिजली के दफ्तरों में लाइन में लगे हुए हैं। कोई समाधान नहीं हो पाता है। बस लॉलीपॉप दे दिया जाता है।

जबरन स्मार्ट मीटर लगना जारी है :- 

उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं के घरों पर जबरन स्मार्ट मीटर लगाकर उन्हें प्रीपेड बदल दिया गया जो विद्युत नियमावली के अनुसार गलत है तथा केन्द्र सरकार द्वारा भी शासनादेश जारी कर दिया है। जबरन प्रीपेड किए गए स्मार्ट मीटरों को पोस्ट पेड में बदलने की दिशा में कार्रवाई करने का कष्ट करें।

तत्काल पोस्ट पेड में बदलें :- 

 यूपी का बिजली विभाग माननीय योगी जी आपको हटाने की दिशा में कार्य करना शुरू कर दिया है। इससे निजात पाने के लिए स्मार्ट मीटरों को तत्काल पोस्ट पेड़ में कन्वर्ट किया जाना चाहिए। माननीय मुख्य मंत्री जी के सारे अच्छे कार्यों पर बिजली विभाग की "प्री पेड़ स्मार्टमीटर योजना" ने पानी फेर दिया है ।आम जनता चाहे वह शहरी हो या ग्रामीण सभी लोग इस योजना से त्रस्त हैं ।मुख्यतः मध्यम वर्ग और निम्न वर्ग बहुत परेशान है । शीघ्र से शीघ्र बिजली विभाग पर प्रभावी नकेल डाला जाना चाहिए।

ऊर्जा मंत्री केवल घोषणा मंत्री :- 

केंद्रीय ऊर्जा मंत्री भी प्रधान मंत्री जी की तरह केवल घोषणा कर अपना फर्ज अदायगी कर दिया हैं। जीनियस कंपनी इस सरकार को अपने कृत्यों से ले डूबेगी। अभी समय है हालत संभालिए वरना देश की बागडोर गलत लोगों के हाथों में चले जाएगी।

पब्लिक को विश्वास में नहीं लिया :- 

वर्तमान सरकार की सबसे बड़ी कमजोरी और कमी यही रहती है कि ये लोग पब्लिक को विश्वास में नहीं लेते हैं और प्राइवेट कंपनियों के कहने से स्मार्ट मीटर गांव गांव लगवा दिया । इसे किसी को ना तो चलाना आता है ना देखने आता है । कैसे कैसे इसका संचालन किया जाएगा ?  कोई होमवर्क ना तो सरकार ने की और ना ही जनता को शिक्षित की गई।

भारत और प्रदेश दोनों सरकारो के अस्तित्व पर असर पड़ेगा :- 

यह मुद्दा भारत और प्रदेश दोनों सरकार दोनो सरकारों को ले डूबेगा । मानिए या ना मानिए। जनता बहुत परेशान है इस प्रीपेड मीटर से। आप मोबाइल का एग्जाम्पल देते है उसमे भी 300₹ का रिचार्ज कराने पर कम से कम महीना भर चलता है, आपके प्रीपेड मीटर में जितना भी रिचार्ज करवा लो बैलेंस माइनस में चला जाता  है और लाइट किसी भी समय रात हो या दिन हो अवकाश हो या कार्य दिवस हो काट दी जाती है। अभी भारत की जनता इतना प्रबुद्ध नहीं है कि तुरंत बैलेंस मेंटेन कर ले।कोई कम जानकार है तो कोई के जानकार परिवार अपनी रोजी रोटी के लिए बाहर रहते हैं। मिट्टी का तेल भी नहीं मिलता है। घरों में अधेरा पसर जाता है। लोगों की आदतें बिगड़ चुकी हैं। फ्रिज कूलर पंखे वॉशिंग मशीन घर घर में बेकार हो जाती है । बेहाल और लाचार उपभोक्ता के हितों के प्रति सरकारें संवेदनशील नहीं रह गई हैं ।

जमा बिल पर भी कनेक्सन चालू नहीं हो पाता :- 

स्मार्ट मीटर को लेकर जनता के बीच लगातार आक्रोश बढ़ रहा है, लेकिनउनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पा रहा है। कई उपभोक्ताओं के बिल जमा करने के बाद भी बिजली कनेक्शन चालू नहीं हो रहा है,जिससे लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही है। इतना ही नहीं,बिना किसी पूर्व सूचना के ही बिजली काटे जाने के आरोप भी सामने आ रहे हैं।

        अगर स्मार्ट मीटर से जुड़ी समस्याएं जल्द नहीं सुलझीं,तो आने वाले चुनाव में योगी जी के नेतृत्व में चल रही लोकप्रिय भाजपा की  सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। 

स्वैच्छिक मीटर चयन योजना फ्लॉप :- 

केंद्रीय सरकार द्वारा दिनांक एक अप्रैल 2026 को अधिसूचित होने बाद भी आज तक भारत सरकार के स्वैच्छिक मीटर चयन की अधिसूचना पर विभागियों द्वारा अमल न किए जाने के प्रमाण हैं। स्मार्ट मीटर पूर्णतया फ्लॉप होने के बहुत ही दुखद  है गरीब जनता बहुत ही नाराज है । क्षेत्र में लगातार मिल रही त्रुटियां स्मार्ट मीटर में अनाहुत बिजली का बिल आना एक तरीका से मध्यम वर्ग के जेब पर डाका डालना है। इसका खामियाजा बहुत ही बुरा होगा।

 विपक्ष का प्रभाव भी दिखता है :- 

प्रतीत होता है कि कुछ लोग बिजली विभाग में सपा के अधिकारी बैठे हुए जो माहौल को बहुत खराब करने में लगे हुए हैं। सरकार यदि नहीं चेती  तो बाद में कुछ नहीं हो पाएगा ।जनता बहुत परेशान होकर त्रस्त हो चुकी है ।पावर हाउस का चक्कर लगाते लगाते जनता ऊब चुकी है।  इसका गुस्सा लोग चुनाव में नुकसान बहुत ज्यादा कर सकते हैं। सरकार चाहे तो अभी भी सुधार कर सकती है। अभी टाइम है आगे बिल्कुल समय नहीं मिलेगा

निष्कर्ष:

वर्तमान स्थिति में, प्रीपेड मीटर के 'दंश' को झेलना जनता के लिए बेहद कठिन हो रहा है, विशेषकर जब तक बिजली कंपनियां और विभाग इसके संचालन में पारदर्शिता नहीं लाते और उपभोक्ताओं की सहमति का सम्मान नहीं करते। हालांकि, तकनीकी रूप से ये मीटर चोरी रोकने और ऊर्जा खपत को प्रबंधित करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं। पर उचित निर्देशन के अभाव में  भार स्वरूप लग रहे हैं 


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