Showing posts with label पं०चन्द्रबली त्रिपाठी बस्ती6. Show all posts
Showing posts with label पं०चन्द्रबली त्रिपाठी बस्ती6. Show all posts

Tuesday, October 20, 2026

आचार्य शुक्ल जी के साहित्यिक अधिवक्ता जमाता पं०चन्द्रबली त्रिपाठी (बस्ती के छंदकार भाग 3 कड़ी 33) ✍️आचार्य डॉ.राधेश्याम द्विवेदी

भूमिका :-

डॉ.मुनि लाल उपाध्याय “सरस” जी के शोध प्रबंध: “बस्ती जनपद के छंदकारों का साहित्यिक योगदान” भाग दो द्वारा समित संख्या में 2008 में लेखक द्वारा प्रकाशित हो चुका है। इसमें केवल तीसरे अध्याय को सम्मिलित किया गया है । तृतीय अध्याय का नामांकन मध्योत्तर चरण अथवा कलाधर- पाल-ब्रजेश चरण के नाम से किया गया है। बीस कवियों का विस्तृत और 18 छन्दकारों की सूची संक्षेप में परिचयात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। जनपदीय छन्द परमपरा विकास में तृतीय चरण का योगदान सर्वाधिक रहा है। इस चरण के कवियों ने तृतीय चरण के छन्द विधान को उत्कर्ष देने के साथ-साथ चतुर्थ चरण के कवियों का मार्गदर्शन भी किया है। 18 छन्दकारों की सूची डॉ सरस जी के शोध प्रबंध में पृष्ठ 233-34 में दी गई है जिनका पर्याप्त साहित्य न मिलने के कारण संक्षेप में सूचीबद्ध किया गया है। इन्हीं में से  प० राम लखन मिश्र जी एक सामान्य कवि रहे हैं। जिस पर बृहद शोध की पूर्ण अनुशंसा की जा रही है।

जीवन परिचय :-

स्वर्गीय पंडित चन्द्र बली त्रिपाठी का जन्म 

जन्म 1893 ई में हुआ था। वे प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी, संस्कृत व दर्शनशास्त्र के प्रकांड विद्वान और लेखक थे। वे महामना मदन मोहन मालवीय जी के बेहद करीबी सहयोगी भी रहे थे। वे संस्कृत हिन्दी के विद्वान थे। ब्रजभाषा एवं खड़ी बोली के छंदकार के रूप में बहुचर्चित हैं। आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी का पं० चन्द्रबली त्रिपाठी दामाद और दुर्गावती त्रिपाठी पुत्री  थी। दुर्गावती त्रिपाठी जन्म 1903 ई में आचार्य रामचंद्र शुक्ल जी की पुत्री (बेटी) के रूप में हुआ था । उनका विवाह पं० चन्द्रबली त्रिपाठी के साथ हुआ जो संस्कृत और हिंदी के उच्चकोटि के प्रख्यात विद्वान और छंदकार थे। पं० चन्द्रबली त्रिपाठी और प्रकाशक दुर्गावती त्रिपाठी का मूल निवास उत्तर प्रदेश का प्राचीन बस्ती वर्तमान सिद्धार्थ नगर जिला रहा । जहां कोटिया नामक गांव शोहरतगढ़ तहसील में बढ़नी ब्लॉक में स्थित एक आबाद गाँव है।  2011 की जनगणना के अनुसार, यहाँ 70 परिवारों में 400 लोग रहते हैं और इसका क्षेत्रफल 33.39 हेक्टेयर है। स्थानीय संदर्भों में नखही ग्राम पंचायत, जोगिया खास सीडी ब्लॉक शामिल हैं । उनका निकटतम शहर सिद्धार्थ नगर है, जो वहां से लगभग 36 किमी की दूरी पर स्थित है।

प्रमुख कार्य -

पं० चन्द्रबली त्रिपाठी एक प्रतिष्ठित लेखक थे, जिन्होंने 'उपनिषद रहस्य' तथा 'धर्मराज युधिष्ठिर' जैसी महत्वपूर्ण कृतियों की रचना की थी। उनके परिवार का साहित्यिक जुड़ाव शुक्ल जी की विरासत से बहुत गहरा रहा है। इसके साथ ही उन्होंने 1957 में प्रकाशित हुई पुस्तक 'महामना पंडित मदनमोहन मालवीय (संस्मरण)' का संपादन भी किया था, जिसकी प्रकाशक श्रीमती दुर्गावती त्रिपाठी थीं।


महाराज युधिष्ठिर उपन्यास -

महाभारत की महान गाथा में महाराज युधिष्ठिर प्रमुख पात्रों में से हैं। उनके जीवन का वृत्तांत वास्तव में एक ऐसे सम्राट का है जो शस्त्र और शक्ति के बल पर नहीं वरन् अपनी लोकप्रियता, सत्य तथा धर्मपालन की योग्यता के आधार पर भी है। कहा जा सकता है कि महाराज युधिष्ठिर उस समय ऐसे जननायक थे जो आम जन के हृदय सम्राट थे। इसका यही कारण है कि उनके राज्य में कोई अभाव, अन्याय या विषमता का लेश भी नहीं था। इसके अतिरिक्त अनेक लौकिक अलौकिक शक्तियों, उपलब्धियों को अर्जित करने वाले युधिष्ठिर में अभिमान छू नहीं सका था। हर स्थिति में विनम्रता तथा शिष्टता उनके व्यक्तित्व का विशिष्ट पक्ष था। इसीलिए वे कौरवों विशेष कर दुर्योधन के लिए ईर्ष्या के पात्र बनते गए। इतने पर भी महाराज युधिष्ठिर के मन में दुर्योधन सहित कौरवों के प्रति सद्भावना ही थी। युधिष्ठिर के चरित का विस्तृत स्वरूप उपन्यास के कुछ ही पन्नों में समेट पाना दुष्कर कार्य है तथापि जितना भी संभव हो सका उसका पूरा प्रयास किया गया है। यह दावा नहीं करते कि युधिष्ठिर का सांगोपांग उल्लेख इस उपन्यास में है परन्तु यह अवश्य कहा जा सकता है कि यथासंभव महाराज युधिष्ठिर के जीवन और अन्तर्द्वन्द्वों को इस उपन्यास में उकेरने की चेष्टा की गई है।

पंडित चंद्रबली मणि त्रिपाठी बस्ती में अधिवक्ता थे। बस्ती जिला मुख्यालय के मालवीय रोड पर इनका अपना खुद का मकान है। यही से रहकर इन्होंने अपने पुत्र चंद्रचूड़ मणि को पढ़ाया था। जिसके बाद वह प्रोफेसर हुए थे। गांव में स्थित इनकी निजी भूमि पर परिवार के सदस्य खेती किसानी करते है। उनकी प्रसिद्ध पुस्तक 'भारतीय समाज में नारी आदर्शों का विकास' के हिंदी संस्करण का प्रकाशन "दुर्गावती त्रिपाठी प्रकाशन, उत्तर प्रदेश" द्वारा वर्ष 1991 में किया गया था।उनकी मृत्यु 1985 ई में हुई थी।


लेखक परिचय :-

(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए सम-सामयिक विषयों, साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करते रहते हैं। वॉट्सप नं.+919412300183)