डा. मुनि लाल उपाध्याय “सरस” जी के शोध प्रबंध: “बस्ती जनपद के छंदकारों का साहित्यिक योगदान” भाग दो द्वारा समित संख्या में 2008 में लेखक द्वारा प्रकाशित हो चुका है। इसमें केवल तीसरे अध्याय को सम्मिलित किया गया है । तृतीय अध्याय का नामांकन मध्योत्तर चरण अथवा कलाधर- पाल-ब्रजेश चरण के नाम से किया गया है। बीस कवियों का विस्तृत और 18 छन्दकारों की सूची संक्षेप में परिचयात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। जनपदीय छन्द परमपरा विकास में तृतीय चरण का योगदान सर्वाधिक रहा है। इस चरण के कवियों ने तृतीय चरण के छन्द विधान को उत्कर्ष देने के साथ-साथ चतुर्थ चरण के कवियों का मार्गदर्शन भी किया है।
जीवन परिचय -
ऐसे ही कवियों में श्री भगवती प्रसाद मिश्र (अग्र) भी आते हैं। वे हिंदी साहित्य के एक आदरणीय कवि हैं, जिनका जन्म विक्रम संवत 1965 (लगभग 1908 ईस्वी) में उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के पास चननी ग्राम में हुआ था। बस्ती सदर तहसील और विकास खंड के अंतर्गत आने वाला एक छोटा गाँव है, जो बस्ती शहर से लगभग 4 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।जनगणना के अनुसार यहाँ लगभग 16 परिवार और 102 के आसपास की आबादी निवास करती है। चननी, दुधौरा ग्राम पंचायत के अंतर्गत आता है, जिसका नेतृत्व निर्वाचित ग्राम प्रधान करते हैं।
श्री भगवती प्रसाद मिश्र (अग्र) की काव्य शैली और रचनाओं की दो सबसे प्रमुख विशेषताएँ हैं:
राष्ट्रीयता का स्वर:
उनकी रचनाओं में देशप्रेम, राष्ट्रभक्ति और समाज को जागरूक करने की गहरी भावना दिखाई देती है।
ब्रजभाषा का लालित्य:
उन्होंने ब्रजभाषा का बहुत ही सुंदर, मधुर और कलात्मक (लालित्यपूर्ण) प्रयोग किया है, जो पाठकों को आकर्षित करता है।
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