प० राम लखन मिश्र राजनेता कवि (बस्ती के छंदकार भाग 3 कड़ी 32) आचार्य डॉ राधेश्याम द्विवेदी
डॉ.मुनि लाल उपाध्याय “सरस” जी के शोध प्रबंध: “बस्ती जनपद के छंदकारों का साहित्यिक योगदान” भाग दो द्वारा समित संख्या में 2008 में लेखक द्वारा प्रकाशित हो चुका है। इसमें केवल तीसरे अध्याय को सम्मिलित किया गया है । तृतीय अध्याय का नामांकन मध्योत्तर चरण अथवा कलाधर- पाल-ब्रजेश चरण के नाम से किया गया है। बीस कवियों का विस्तृत और 18 छन्दकारों की सूची संक्षेप में परिचयात्मक ढंग से प्रस्तुत किया गया है। जनपदीय छन्द परमपरा विकास में तृतीय चरण का योगदान सर्वाधिक रहा है। इस चरण के कवियों ने तृतीय चरण के छन्द विधान को उत्कर्ष देने के साथ-साथ चतुर्थ चरण के कवियों का मार्गदर्शन भी किया है। 18 छन्दकारों की सूची डॉ सरस जी के शोध प्रबंध में पृष्ठ 233-34 में दी गई है जिनका पर्याप्त साहित्य न मिलने के कारण संक्षेप में सूचीबद्ध किया गया है। इन्हीं में से प० राम लखन मिश्र जी एक सामान्य कवि रहे हैं। जिस पर बृहद शोध की पूर्ण अनुशंसा की जा रही है।
जीवन परिचय:-
ऐसे ही कवियों में पण्डित राम लखन मिश्र (अग्र) भी आते हैं। वे हिंदी साहित्य के एक आदरणीय कवि, राजनेता और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, जो सं० 1960 वि० तदनुसार सन 1903 ई में ग्राम गोविनापुर पो० इटवा , डुमरियागंज तहसील में पैदा हुए थे। इनके पिता का नाम पं० यमुना प्रसाद मिश्र था। ये साहित्यानुरागी तथा अच्छे छंदकार थे। 1952 उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव में इन्होंने उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के 283 - डुमरियागंज (उत्तर पश्चिम) विधान सभा निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़कर जीता था। उनका बतौर विधायक कार्यकाल 1952 से 1957 तक रहा। विधायक बनने से पूर्व उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लिया था।
इतने महत्वपूर्ण राजनेता ,स्वतंत्रता सेनानी और कवि के बारे में बहुत कम जानकारी उपलब्ध हो रही है। आज के आत्म कुटुंब और स्वजातीय प्रशस्ति युग में ऐसा घटित होना किसी आश्चर्य से कम नहीं है। इनके परिवारी जन शुभ चिन्तक और आम जन जिन्हें भी इन महानुभाव के बारे में किंचित जानकारी हो वह बस्ती मण्डल की गरिमा के लिए उसे आम जन में साझा करना चाहिए। हिन्दी भाषी विश्विद्यालय अपने शोध विषय में उक्त व्यक्तित्व को सम्मिलित करके महान योगदान कर सकते हैं।
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