भारत में स्थानीय स्वशासन के तहत शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के विकास और प्रशासन के लिए अलग-अलग संस्थाओं का गठन किया जाता है। इसे स्पष्ट रूप से इस प्रकार समझा जा सकता है-शहरों के विकास के लिए नगर निगम नगर पालिका और नगर पंचायत का गठन होता है जबकि ग्रामों के विकास के लिए जिला परिषद, ब्लॉक समिति और ग्राम पंचायत का गठन होता है। इसे इन शब्दों द्वारा और आसानी से समझा जा सकता है -
शहरी क्षेत्रों के विकास के लिए -
शहरी स्थानीय निकाय (शहरों के विकास के लिए)शहरों की जनसंख्या और आकार के आधार पर इन्हें तीन स्तरों में बांटा गया है यह 74वें संविधान संशोधन के तहत किया गया है.
नगर निगम:
बड़े महानगरों या अधिक जनसंख्या वाले बड़े शहरों के लिए नगर निगम गठित किया जाता है।
नगर पालिका / नगर परिषद-
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास छोटे या मध्यम आकार के शहरी क्षेत्रों और कस्बों के लिए गठित।नगर पालिका परिषद को एक छोटे शहरी क्षेत्र के लिए गठित किया जाता है।
नगर पंचायत-
उन क्षेत्रों के लिए जो ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में बदल रहे होते हैं (संक्रमणकालीन क्षेत्र)।
ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए -
पंचायती राज व्यवस्था (ग्रामों के विकास के लिए)गाँवों के जमीनी स्तर पर विकास के लिए 73वें संविधान संशोधन द्वारा त्रिस्तरीय (तीन स्तरों वाली) पंचायती राज व्यवस्था का गठन किया गया है-
जिला परिषद:
सबसे ऊपरी इकाई जो जिला स्तर पर पूरे जिले के विकास की जिम्मेदारी संभालती है।
ग्राम पंचायत:
सबसे निचली इकाई जो ग्राम स्तर (गाँव) पर काम करती है।
वोब्लॉक / पंचायत समिति :-
मध्यवर्ती स्तर जो ब्लॉक या खंड स्तर पर ग्राम पंचायत और जिला परिषद के बीच तालमेल बिठाती है। भारत में पंचायती राज व्यवस्था के मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत समिति या ब्लॉक पंचायत या समकक्ष निकाय के निर्वाचित प्रमुख को संदर्भित करने वाला शब्द है । पंचायत समिति पंचायती राज व्यवस्था का एक स्तर है । यह भारत में तहसील (ब्लॉक) स्तर पर एक ग्रामीण स्थानीय सरकारी निकाय है । यह तहसील के गांवों के लिए काम करती है, जिन्हें सामूहिक रूप से विकास ब्लॉक कहा जाता है। पंचायत समिति ग्राम पंचायत (ग्राम परिषद) और जिला परिषद (जिला पंचायत या जिला बोर्ड) के बीच की कड़ी है। सामान्यतः, ब्लॉक प्रमुख का चुनाव पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्यों में से किया जाता है।
ब्लॉक बनाने के जरूरत क्यों पड़ी -
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है.ऐसे में देश को कई इकाइयों में बांटा गया. सबसे पहले प्रदेश, उसके अंदर जिले, जिले में ब्लॉक, ब्लॉक के भीतर ग्राम पंचायतें और ग्राम पंचायतों में गांव या ग्राम सभा. एक ब्लॉक कई गांवों को मिलाकर बनाया जाता है. जिले में ब्लॉक की संख्या जिले के आकार के हिसाब से तय की जाती है. प्राय: हर ब्लॉक में 60 से 70 गांव होते हैं. कह सकते हैं कि ब्लॉक इन गांवो का मुख्यालय होता है, जहां गांवों के विकास कार्यों के लिए बैठकें और योजनाएं तैयार की जाती हैं.
भारत की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में खंड विकास स्तर (ब्लॉक स्तर) की पंचायत को क्षेत्र पंचायत / पंचायत समिति या जनपद पंचायत कहा जाता है, जो ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के बीच का मध्यवर्ती स्तर है।क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत आने वाले सभी ग्राम पंचायतों के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने गए क्षेत्रीय सदस्य हैं ।उस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी ग्राम पंचायतों के प्रधान (मुखिया)।उस क्षेत्र के विधायक (MLA) और संसद सदस्य भी पंचायत के सदस्य होते हैं। ब्लॉक लेवल पर चुने हुए प्रतिनिधि के तौर पर ब्लॉक प्रमुख का पद सबसे बड़ा होता है.
ब्लॉक प्रमुख का चुनाव -
ब्लॉक प्रमुख को आम जनता सीधे नहीं चुनती. उसे जनता द्वारा चुने हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य चुनते हैं. क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष या ब्लॉक प्रमुख का निर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्यों के बीच से ही कोई सदस्य क्षेत्र पंचायत का चुनाव लड़ता है और क्षेत्र पंचायत सदस्य उनका चुनाव करते हैं. ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है. उत्तर प्रदेश में क्षेत्र पंचायत सदस्यों यानी बीडीसी के 75,255 पद हैं. यही बीडीसी यूपी के 826 ब्लॉक प्रमुख पदों के लिए वोट डालते हैं.
ब्लॉक प्रमुख के अधिकार -
क्षेत्र पंचायत में ऐसे कार्य किए जाते हैं, जिसमें एक से अधिक ग्राम पंचायतों का हित निहित होता है. जैसे यदि किसी ऐसी सड़क का निर्माण होना है जो एक गांव से दूसरे गांव को जोड़ती है और वह गांव के बाहर और जिला पंचायत के बीच की परिधि में आती है तो उसका निर्माण क्षेत्र पंचायत के माध्यम से कराया जाता है. इसके अलावा बिजली की व्यवस्था भी उन जगहों पर कराई जाती है जो 2 गांव के बीच हों या क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत हों और जिला पंचायत की परिधि के बाहर हो. इसी तरह रास्तों का निर्माण भी क्षेत्र पंचायत विकास निधि के माध्यम से कराया जाता है. क्षेत्र पंचायत के कार्य इस प्रकार से होते हैं कि जहां पर दो या दो से अधिक ग्राम पंचायतों का हित निहित होता हो, लेकिन वह जिला पंचायत के कार्यक्षेत्र में न आता हो.
ब्लॉक प्रमुख करते क्या हैं -
ब्लॉक प्रमुख की जो भूमिका है वह यहीं से शुरू होती है.क्षेत्र पंचायत की अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख करते हैं. बैठक के माध्यम क्षेत्र के विकास कार्य को लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्यों द्वारा जो प्रस्ताव लाए जाते हैं उन प्रस्तावों को पास कराए जाने का काम क्षेत्र पंचायत प्रमुख यानी ब्लॉक प्रमुख करते हैं.केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से पंचायती राज्य व्यवस्था के बजट में पैसा आता है. यह पैसा खर्च किस तरह किया जाएगा, इसका एजेंडा ब्लॉक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत के सदस्य और ग्राम प्रधान मिलकर तैयार करते हैं. क्षेत्र पंचायत की बैठक एक दो महीने में होती है. अभी तो नई क्षेत्र पंचायतों का गठन हो रहा है। तो 1 महीने के अंदर ही पहली बैठक हो जानी चाहिए. ऐसी पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत व्यवस्था बनाई गई है.
क्षेत्र पंचायत के अन्य कार्य -
इसके अलावा क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत बीज गोदाम का निर्माण करना, उनका रखरखाव करने का काम भी होता है. क्षेत्र पंचायत सदस्यों के द्वारा जिस प्रकार के प्रस्ताव लाए जाते हैं. उसी के अनुरूप विकास कार्य कराए जाते हैं. इसके अंतर्गत कार्य योजना बनती है और उसी के अनुरूप विकास कार्य होते हैं.
बजट का आवंटन -
क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत होने वाले विकास कार्य के लिए दो प्रमुख मद से बजट का आवंटन होता है. इसमें राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अंतर्गत और केंद्रीय वित्त आयोग की संस्तुतियों के अंतर्गत विकास कार्यों को लेकर धनराशि आवंटित होती है. अभी क्षेत्र पंचायतों को जो धनराशि पिछले वित्तीय वर्ष में दी गई थी, उसमें एक करोड़ औसतन धनराशि दी गई थी. अगले वर्ष में प्रत्येक क्षेत्र पंचायत को लगभग 7 करोड रुपए की धनराशि प्राप्त होगी. किसी क्षेत्र पंचायत को यह धनराशि कुछ कम हो सकती है, तो किसी को कुछ ज्यादा हो सकती है. क्षेत्र पंचायतों में आबादी के आधार पर धनराशि आवंटित करने का काम होता है.
अविश्वास प्रस्ताव -प्रमुख को अविश्वास प्रस्ताव से पांच साल से पहले हटाया जा सकता है ।ब्लॉक प्रमुख को अगर समय से पहले हटाना हो तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर ऐसा किया जा सकता है. चुनाव में चुने जाने के ढाई साल बाद ब्लॉक प्रमुख को साधारण बहुमत से हटाया जा सकता है. इसको ऐसे समझ सकते हैं कि अगर किसी क्षेत्र पंचायत में 50 सदस्यों हों और उसमें से 26 सदस्य ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दें तो वह अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार माना जाएगा. इसके बाद ब्लॉक प्रमुख का चुनाव फिर से कराया जाएगा.
बीडीओ प्रखंड स्तर पर ग्रामीण विकास कार्यों का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी
प्रशासनिक रूप से ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक डेवेलपमेंट ऑफिसर या BDO सबसे बड़ा सरकारी अधिकारी होता है जो विकास योजनाओं को क्रियान्वित कराने के लिए उत्तरदायी होता है।कार्यों के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न समितियाँ (जैसे- निर्माण कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं सामाजिक कल्याण) बनाई जाती हैं।बीडीओ (खंड विकास अधिकारी या ब्लॉक डेवलपमेंट ऑफिसर) किसी जिले के ब्लॉक या प्रखंड स्तर पर ग्रामीण विकास कार्यों का प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी होता है। इनके मुख्य कार्य और जिम्मेदारियाँ इस प्रकार है-
सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन:- मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, वृद्धावस्था/विधवा/विकलांग पेंशन और कृषि योजनाओं जैसी केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को जमीनी स्तर (गांव और पंचायत स्तर) पर लागू करना।
विकास कार्यों की निगरानी:-
ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले गांवों में सड़क निर्माण, नाली-खड़ंजा, शौचालय और अन्य विकास कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति की नियमित जांच व समीक्षा करना।
कर्मचारियों पर नियंत्रण:-
ब्लॉक कार्यालय के प्रमुख के रूप में पंचायत सचिवों, विस्तार अधिकारियों और अन्य अधीनस्थ कर्मचारियों के कार्यों का पर्यवेक्षण और नियंत्रण रखना।
पंचायतों के साथ समन्वय:-
ग्राम पंचायतों और पंचायत समिति की बैठकों का आयोजन करना, विकास योजनाओं की रूपरेखा तैयार करना तथा मुखिया व सरपंचों के साथ मिलकर कार्यों को समय पर पूरा कराना।
जन शिकायतों का निवारण:-
ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की समस्याओं और शिकायतों को सुनना तथा उनका नियमानुसार उचित समाधान करना
1947 से 1956 तक पंचायती व्यवस्था में कशमकश -
संयुक्त प्रान्त पंचायत राज अधिनियम 1947 दिनांक 7 दिसम्बर, 1947 ई0 को गवर्नर जनरल द्वारा हस्ताक्षरित हुआ और प्रदेश में 15 अगस्त, 1949 से पंचायतों की स्थापना हुई। इसके बाद जब देश का संविधान बना तो उसमें पंचायतों की स्थापना की व्यापक व्यवस्था की गई। संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद- 40 में यह निर्देश दिये गये हैं कि राज्य पंचायतों की स्थापना के लिए आवश्यक कदम उठायें और ग्रामीण स्तर पर सभी प्रकार के कार्य एवं अधिकार उन्हें देने का प्रयत्न करें। 15 अगस्त, 1949 से उत्तर प्रदेश की तत्कालीन पाच करोड़ चालीस लाख ग्रामीण जनता को प्रतिनिधित्व करने वाली 35,000 पंचायतों ने कार्य करना प्रारम्भ किया। साथ ही लगभग 8 हजार पंचायत अदालतें भी स्थापित की गई। 1953-54 में पंचायतों की सक्रियता एवं विभिन्न विकास सम्बन्धी कार्यक्रमों में उनका सहयोग बढ़ाने के लिए विधान सभा के सदस्यो की एक समिति नियुक्त की गयी। इस समिति के सुझावों को दृष्टि में रखकर पंचायत राज संशोधन विधेयक तैयार किया गया जो पंचायतों के अगले दूसरे आम चुनाव में क्रियान्वित हुआ।
लेखक -
आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,
पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी,
मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8
निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,
आनन्दनगर,कटरा,बस्ती,
Pin- 272001,उत्तर प्रदेश INDIA
मोबाइल नंबर +91 9412300183
No comments:
Post a Comment