ब्लॉक प्रमुख (ब्लॉक-पंचायत-अध्यक्ष)-
भारत में पंचायती राज व्यवस्था के मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत समिति या ब्लॉक पंचायत या समकक्ष निकाय के निर्वाचित प्रमुख को संदर्भित करने वाला शब्द है । पंचायत समिति पंचायती राज व्यवस्था का एक स्तर है । यह भारत में तहसील (ब्लॉक) स्तर पर एक ग्रामीण स्थानीय सरकारी निकाय है । यह तहसील के गांवों के लिए काम करती है, जिन्हें सामूहिक रूप से विकास ब्लॉक कहा जाता है। पंचायत समिति ग्राम पंचायत (ग्राम परिषद) और जिला परिषद (जिला पंचायत या जिला बोर्ड) के बीच की कड़ी है। सामान्यतः, ब्लॉक प्रमुख का चुनाव पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्यों में से किया जाता है।
ब्लॉक बनाने के जरूरत क्यों पड़ी -
भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है.ऐसे में देश को कई इकाइयों में बांटा गया. सबसे पहले प्रदेश, उसके अंदर जिले, जिले में ब्लॉक, ब्लॉक के भीतर ग्राम पंचायतें और ग्राम पंचायतों में गांव या ग्राम सभा. एक ब्लॉक कई गांवों को मिलाकर बनाया जाता है. जिले में ब्लॉक की संख्या जिले के आकार के हिसाब से तय की जाती है. प्राय: हर ब्लॉक में 60 से 70 गांव होते हैं. कह सकते हैं कि ब्लॉक इन गांवो का मुख्यालय होता है, जहां गांवों के विकास कार्यों के लिए बैठकें और योजनाएं तैयार की जाती हैं.
भारत की त्रिस्तरीय पंचायती राज व्यवस्था में खंड विकास स्तर (ब्लॉक स्तर) की पंचायत को क्षेत्र पंचायत / पंचायत समिति या जनपद पंचायत कहा जाता है, जो ग्राम पंचायत और जिला पंचायत के बीच का मध्यवर्ती स्तर है।क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत आने वाले सभी ग्राम पंचायतों के मतदाताओं द्वारा प्रत्यक्ष रूप से चुने गए क्षेत्रीय सदस्य हैं ।उस क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी ग्राम पंचायतों के प्रधान (मुखिया)।उस क्षेत्र के विधायक (MLA) और संसद सदस्य भी पंचायत के सदस्य होते हैं।
प्रशासनिक रूप से ब्लॉक स्तर पर ब्लॉक डेवेलपमेंट ऑफिसर या BDO सबसे बड़ा सरकारी अधिकारी होता है जो विकास योजनाओं को क्रियान्वित कराने के लिए उत्तरदायी होता है।कार्यों के सुचारू संचालन के लिए विभिन्न समितियाँ (जैसे- निर्माण कार्य, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि एवं सामाजिक कल्याण) बनाई जाती हैं।ब्लॉक लेवल पर चुने हुए प्रतिनिधि के तौर पर ब्लॉक प्रमुख का पद सबसे बड़ा होता है.
ब्लॉक प्रमुख का चुनाव -
ब्लॉक प्रमुख को आम जनता सीधे नहीं चुनती. उसे जनता द्वारा चुने हुए क्षेत्र पंचायत सदस्य चुनते हैं. क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष या ब्लॉक प्रमुख का निर्वाचित क्षेत्र पंचायत सदस्यों के बीच से ही कोई सदस्य क्षेत्र पंचायत का चुनाव लड़ता है और क्षेत्र पंचायत सदस्य उनका चुनाव करते हैं. ब्लॉक प्रमुख का कार्यकाल 5 वर्ष का होता है. उत्तर प्रदेश में क्षेत्र पंचायत सदस्यों यानी बीडीसी के 75,255 पद हैं. यही बीडीसी यूपी के 826 ब्लॉक प्रमुख पदों के लिए वोट डालते हैं.
ब्लॉक प्रमुख के अधिकार -
क्षेत्र पंचायत में ऐसे कार्य किए जाते हैं, जिसमें एक से अधिक ग्राम पंचायतों का हित निहित होता है. जैसे यदि किसी ऐसी सड़क का निर्माण होना है जो एक गांव से दूसरे गांव को जोड़ती है और वह गांव के बाहर और जिला पंचायत के बीच की परिधि में आती है तो उसका निर्माण क्षेत्र पंचायत के माध्यम से कराया जाता है. इसके अलावा बिजली की व्यवस्था भी उन जगहों पर कराई जाती है जो 2 गांव के बीच हों या क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत हों और जिला पंचायत की परिधि के बाहर हो. इसी तरह रास्तों का निर्माण भी क्षेत्र पंचायत विकास निधि के माध्यम से कराया जाता है. क्षेत्र पंचायत के कार्य इस प्रकार से होते हैं कि जहां पर दो या दो से अधिक ग्राम पंचायतों का हित निहित होता हो, लेकिन वह जिला पंचायत के कार्यक्षेत्र में न आता हो.
ब्लॉक प्रमुख करते क्या हैं -
ब्लॉक प्रमुख की जो भूमिका है वह यहीं से शुरू होती है. ब्लॉक प्रमुख के अधिकार के सवाल पर पूर्व संयुक्त निदेशक सुधन चंदौला कहते हैं कि क्षेत्र पंचायत की अध्यक्षता ब्लॉक प्रमुख करते हैं. बैठक के माध्यम क्षेत्र के विकास कार्य को लेकर क्षेत्र पंचायत सदस्यों द्वारा जो प्रस्ताव लाए जाते हैं उन प्रस्तावों को पास कराए जाने का काम क्षेत्र पंचायत प्रमुख यानी ब्लॉक प्रमुख करते हैं.केंद्र और राज्य सरकार की तरफ से पंचायती राज्य व्यवस्था के बजट में पैसा आता है. यह पैसा खर्च किस तरह किया जाएगा, इसका एजेंडा ब्लॉक प्रमुख, क्षेत्र पंचायत के सदस्य और ग्राम प्रधान मिलकर तैयार करते हैं. क्षेत्र पंचायत की बैठक एक दो महीने में होती है. अभी तो नई क्षेत्र पंचायतों का गठन हो रहा है। तो 1 महीने के अंदर ही पहली बैठक हो जानी चाहिए. ऐसी पंचायती राज अधिनियम के अंतर्गत व्यवस्था बनाई गई है.
क्षेत्र पंचायत के अन्य कार्य -
इसके अलावा क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत बीज गोदाम का निर्माण करना, उनका रखरखाव करने का काम भी होता है. क्षेत्र पंचायत सदस्यों के द्वारा जिस प्रकार के प्रस्ताव लाए जाते हैं. उसी के अनुरूप विकास कार्य कराए जाते हैं. इसके अंतर्गत कार्य योजना बनती है और उसी के अनुरूप विकास कार्य होते हैं.
बजट कितना मिलता है -
क्षेत्र पंचायत प्रमुख यानी ब्लॉक प्रमुख को क्षेत्र के विकास के लिए कितनी धनराशि आवंटित होने के सवाल पर पूर्व संयुक्त निदेशक कहते हैं कि क्षेत्र पंचायत के अंतर्गत होने वाले विकास कार्य के लिए दो प्रमुख मद से बजट का आवंटन होता है. इसमें राज्य वित्त आयोग की संस्तुतियों के अंतर्गत और केंद्रीय वित्त आयोग की संस्तुतियों के अंतर्गत विकास कार्यों को लेकर धनराशि आवंटित होती है. अभी क्षेत्र पंचायतों को जो धनराशि पिछले वित्तीय वर्ष में दी गई थी, उसमें एक करोड़ औसतन धनराशि दी गई थी. अगले वर्ष में प्रत्येक क्षेत्र पंचायत को लगभग 7 करोड रुपए की धनराशि प्राप्त होगी. किसी क्षेत्र पंचायत को यह धनराशि कुछ कम हो सकती है, तो किसी को कुछ ज्यादा हो सकती है. क्षेत्र पंचायतों में आबादी के आधार पर धनराशि आवंटित करने का काम होता है.
प्रमुख को अविश्वास प्रस्ताव से पांच साल से पहले हटाया जा सकता है -
ब्लॉक प्रमुख को अगर समय से पहले हटाना हो तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर ऐसा किया जा सकता है. चुनाव में चुने जाने के ढाई साल बाद ब्लॉक प्रमुख को साधारण बहुमत से हटाया जा सकता है. इसको ऐसे समझ सकते हैं कि अगर किसी क्षेत्र पंचायत में 50 सदस्यों हों और उसमें से 26 सदस्य ब्लॉक प्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दें तो वह अविश्वास प्रस्ताव स्वीकार माना जाएगा. इसके बाद ब्लॉक प्रमुख का चुनाव फिर से कराया जाएगा.
1947 से 1956 तक पंचायती व्यवस्था की कशमकश
संयुक्त प्रान्त पंचायत राज अधिनियम 1947 दिनांक 7 दिसम्बर, 1947 ई0 को गवर्नर जनरल द्वारा हस्ताक्षरित हुआ और प्रदेश में 15 अगस्त, 1949 से पंचायतों की स्थापना हुई। इसके बाद जब देश का संविधान बना तो उसमें पंचायतों की स्थापना की व्यापक व्यवस्था की गई। संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद- 40 में यह निर्देश दिये गये हैं कि राज्य पंचायतों की स्थापना के लिए आवश्यक कदम उठायें और ग्रामीण स्तर पर सभी प्रकार के कार्य एवं अधिकार उन्हें देने का प्रयत्न करें। 15 अगस्त, 1949 से उत्तर प्रदेश की तत्कालीन पाच करोड़ चालीस लाख ग्रामीण जनता को प्रतिनिधित्व करने वाली 35,000 पंचायतों ने कार्य करना प्रारम्भ किया। साथ ही लगभग 8 हजार पंचायत अदालतें भी स्थापित की गई। 1953-54 में पंचायतों की सक्रियता एवं विभिन्न विकास सम्बन्धी कार्यक्रमों में उनका सहयोग बढ़ाने के लिए विधान सभा के सदस्यो की एक समिति नियुक्त की गयी। इस समिति के सुझावों को दृष्टि में रखकर पंचायत राज संशोधन विधेयक तैयार किया गया जो पंचायतों के अगले दूसरे आम चुनाव में क्रियान्वित हुआ।
कैप्टनगंज’ का नामकरण -
कैप्टनगंज' कस्बे का नाम कैप्टन मैलकाम मैकलाॅज के नाम पर पड़ा है। ब्रिटिश काल के दौरान उनके यहां सैन्य शिविर (कैंप) लगाने और क्षेत्र में उनके बढ़ते प्रभाव के कारण इस जगह को 'कैप्टन गंज' कहा जाने लगा।प्रतीत होता है कि 1801 ई. से ही कैेप्टनगंज बस्ती जिले का महत्वपूर्ण स्थान बना लिया था और यह अंग्रेजों का एक सुरक्षित तथा सुविधापूर्ण स्थल बन गया था। कैप्टन स्तर के एक सैन्य अधिकारी द्वारा स्थापित सैनिक कार्यालय तथा बाजार 1861-62 तक स्थापित हो चुका था । 1857 की क्रांति को जब अंग्रजों से भलीभांति संभाला तब आगे की सुव्यवस्था के लिए बस्ती शहर में बस्ती तहसील मुख्यालय को 6 मई 1865 में बस्ती शहर में ही जिला मुख्यालय घोषित कर दिया गया। उसी समय बस्ती जिले में बस्ती , कैप्टनगंज ,खलीलाबाद, डुमरिया गंज तथा बांसी नाम से 5 तहसीलें भी घोषित की गई।
हर्रैया को पावर देकर कप्तानगंज का हक छीना गया -
1865 में कप्तान गंज में तहसील तथा मुंसफी न्यायालय स्थापित हो चुके थे। बाद में अमोढ़ा की सक्रियता के कारण यह क्षेत्र अंग्रेजों से संभल नहीं पा रहा था। फलतः 1876 में कैप्टनगंज को तहसील व मुंसफी समाप्त करके हर्रैया में तहसील व मुंसफी बनाई गई । इस प्रकार लगभग 15 सालों तक कैप्टनगंज ब्रिटिश प्रशासन का एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक इकाई के रूप में बना रहा। इसके बाद इसे विकास खण्ड के रूप में अपनी विकास यात्रा जारी रखना पड़ा। वर्तमान में यह तहसील और मुंसफी न्यायालय का अपना स्तर खो चुका है। इसे विधान सभा, ब्लाक तथा नगर पंचायत स्तर तक गुजरना पड़ा रहा है।
कप्तान गंज विकास खण्ड का गठन -
109 ग्राम सभाओं/पंचायतों तथा 11 न्याय पंचायतों को समलित करते हुए 2 अक्टूबर 1956 को पुराना कैप्टनगंज अब नया कप्तानगंज विकास खण्ड का मुख्यालय घोषित किया गया।
ब्लॉक प्रमुख बना सम्मानित पद -
भारत में पंचायती राज व्यवस्था के मध्यवर्ती स्तर पर पंचायत समिति या ब्लॉक पंचायत या समकक्ष निकाय के निर्वाचित प्रमुख को संदर्भित करने वाला शब्द है । पंचायत समिति पंचायती राज व्यवस्था का एक स्तर है । यह भारत में तहसील (ब्लॉक) स्तर पर एक ग्रामीण स्थानीय सरकारी निकाय है । यह तहसील के गांवों के लिए काम करती है, जिन्हें सामूहिक रूप से विकास ब्लॉक कहा जाता है। पंचायत समिति ग्राम पंचायत (ग्राम परिषद) और जिला परिषद (जिला पंचायत या जिला बोर्ड) के बीच की कड़ी है। ब्लॉक प्रमुख, या ब्लॉक पंचायत के अध्यक्ष, पंचायती राज व्यवस्था के मध्यवर्ती स्तर का नेतृत्व करते हैं, जिसे पंचायत समिति के नाम से जाना जाता है, हालांकि इसका नाम और संरचना राज्यों के अनुसार भिन्न होती है।वह पंचायत समिति या ब्लॉक परिषद की बैठकों की अध्यक्षता करता है।वह संबंधित संस्था के निर्वाचित प्रमुख के रूप में कार्य करता/ करती है।
ब्लॉक प्रमुख का चुनाव -
ब्लॉक प्रमुख का चुनाव प्रत्येक राज्य में अलग-अलग होता है और यह संबंधित राज्य के पंचायती राज अधिनियमों द्वारा नियंत्रित होता है। सामान्यतः, ब्लॉक प्रमुख का चुनाव पंचायत समिति के निर्वाचित सदस्यों में से किया जाता है। भारत में ब्लॉक प्रमुख (क्षेत्र पंचायत अध्यक्ष) का चुनाव वर्तमान व्यवस्था के तहत क्षेत्र पंचायत सदस्यों (बीडीसी सदस्यों) द्वारा आपस में से ही चुना जाता है।
1965 में हुआ था प्रथम चुनाव -
स्वतंत्र भारत में पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद कप्तानगंज विकासखंड 1956 में ही अस्तित्व में आ गया लेकिन ब्लाक प्रमुख का चुनाव पहली बार 1965 में हुआ ।
1.पहले ब्लॉक प्रमुख पंडित सूर्य दत्त त्रिपाठी को मिला तीन कार्यकाल -
ब्लाक प्रमुख कप्तान गंज का चुनाव पहली बार जब 1965 में हुआ तो उस समय क्षेत्र के जनप्रिय नेता पंडित सूर्य दत्त त्रिपाठी (जन्म 1 जुलाई 1930 ) पहले प्रमुख निर्वाचित हुए जो 10 जनवरी 1976 तक अपनी हत्या पर्यन्त तक अपने तीन कार्यकाल में इस पद पर बने रहे। इनका जन्म कप्तान गंज से सटे नकटीदेई में सामान्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था।
अपने कार्यकाल में स्व. त्रिपाठी जी ने इन्दिरा गांधी के 1971 के बांग्लादेश के विजय से प्रभावित होकर 1972 में कप्तानगंज व्लाक मुख्यालय के सामने इन्दिरा गांधी उच्चतर माध्यमिक विद्याालय की स्थापना की थी। शिक्षा के क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है। इंदिरा गांधी इंटर कॉलेज, कप्तानगंज की स्थापना कर उन्होंने ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्र के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर प्रदान किया। उनका मानना था कि शिक्षा ही समाज को सशक्त, आत्म निर्भर और संस्कारवान बनाती है। इसी सोच के कारण आज भी यह संस्था उनके सपनों को साकार कर रही है। स्वर्गीय श्री सूर्यदत्त त्रिपाठी जी जनसेवा, शिक्षा और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में एक प्रेरणादायी व्यक्तित्व थे। वे बड़े आकर्षक और हंसमुख स्वभाव के कांग्रेसी व्यक्ति थे। उन्होंने अपने जीवन को समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास की किरण पहुँचाने के लिए समर्पित कर दिया। पूर्व ब्लॉक प्रमुख के रूप में उनके कार्यकाल को निष्पक्षता, ईमानदारी और जन कल्याणकारी निर्णयों के लिए सदैव स्मरण किया जाता है। वे समस्याओं को धरातल पर समझकर समाधान करने वाले सच्चे जननेता थे।
2.उप ब्लाक प्रमुख राम लखन शर्मा स्थानापन्न प्रमुख रहे -
10 जनवरी 1976 को पण्डित सूर्य दत्त त्रिपाठी की हत्या के बाद उप ब्लाक प्रमुख पद पर आसीन रहे श्री राम लखन शर्मा को ब्लॉक प्रमुख पद का चार्ज मिला जो 1980 तक इस जिम्मेदारी का सम्यक रूप निर्वहन करते रहे।
3.उपजिलाधिकारी हरैया प्रशासक रूप में रहे -
1980 से 1983 तक चुनाव न होने के कारण इस पद की जिम्मेदारी तत्कालीन हरैया के उपजिलाधिकारी निभाते रहे।
4. बाबूराम दुबे के थे दो कार्यकाल -
1983 में हुए चुनाव में बाबूराम दुबे को मौका मिला जो दो कार्यकाल में 1995 तक इस पद पर काबिज रहे। दूबे जी ग्राम दुबौली दूबे के मूल निवासी थे। उन्होंने बेसिक शिक्षा विभाग में एक अध्यापक के रूप में सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया
था। बाद में तत्कालीन कांग्रेसी विधायक राम लखन सिंह और बाबू अम्बिका सिंह के सानिध्य का भरपूर उपयोग किया था।
वे बहुजन समाज पार्टी के टिकट से विधान सभा चुनाव में भी अपनी किस्मत आजमाए थे। उस समय ब्लॉक प्रमुखों का चयन ग्राम प्रधानों द्वारा किया जाता था। कप्तान गंज विधान सभा और बिकास क्षेत्र में वे बहु चर्चित हो चुके थे।26 नवंबर को उनकी पुण्य तिथि है।
5.रामशंकर यादव -
त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था लागू होने के बाद 1995 में भाजपा शासनकाल में पहली बार क्षेत्र पंचायत सदस्यों द्वारा कराए गए चुनाव में रामशंकर यादव विजयी रहे, जो सन 2001 तक बने रहे।
कप्तान गंज और नगर बाजार के बीच गोपियापार के वे मूल निवासी थे। राम शंकर यादव उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के कप्तानगंज विकासखंड के पूर्व ब्लॉक प्रमुख हैं। वह जगलाल बालिका महाविद्यालय के प्रबंधक और जिला सहकारी बैंक बस्ती के संचालक/पूर्व चेयरमैन भी रहे हैं।
6.राजमणि चौधरी बसपा को मिला दो कार्यकाल-
2001 से 2005 तथा बसपा शासन काल में 2001से 2005 तक इस जिम्मेदारी के निर्वहन का मौका राजमणि चौधरी को मिला। वे कौड़ी कोल के मूल निवासी थे। उनके पिता जय राम चौधरी अपने समय के नामी व्यक्ति थे। बस्ती जिले के कप्तानगंज विकास खंड (ब्लॉक) में वर्ष 2010 से 2015 तक बसपा शासनकाल के दौरान राजमणि चौधरी ब्लॉक प्रमुख थे।
7. श्रीमती शोभा चौधरी : सांसद की
परिचित -
इसी दौर में 2005 से 2010 तक इस पद पर शोभा चौधरी शोभायमान रही। वह मूल रूप से कप्तानगंज क्षेत्र के दुबौला गांव की निवासी थीं। वह बस्ती के कद्दावर नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री/सांसद राम प्रसाद चौधरी के परिवार (उनकी भाई की पत्नी/रिश्तेदार) से जुड़ी रही हैं, जिनका पैतृक निवास स्थान दुबौला है।
8.श्रीमती माधुरी आर्य : विधायक की पुत्री-
कप्तानगंज की पूर्व ब्लॉक प्रमुख माधुरी आर्य पति संतोष कुमार बस्ती जिले के सोनहा थाना क्षेत्र के कलंदर नगर गांव की निवासी हैं। माधुरी आर्य उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री रामकरन आर्य की पुत्री हैं। उनका पैतृक और मुख्य निवास स्थान कलंदर नगर है।
2015 में हुए चुनाव में पूर्व मंत्री रामकरन आर्य की बेटी माधुरी आर्य ने कप्तान गंज के ब्लॉक प्रमुख पद पर कब्जा कर लिया। जो वर्ष 2018 के शुरुआती महीनों में वह इस पद पर थीं, 2017 में भाजपा सरकार आने के बाद से ही माधुरी आर्य के खिलाफ आवाज उठने लगी। 25 फरवरी 2018 को दूसरी बार हुए अविश्वास प्रस्ताव पर मतदान में 33 क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान कर माधुरी आर्य को इस पद से अपदस्थ कर दिया। फरवरी 2018 में अविश्वास प्रस्ताव के माध्यम से उन्हें हटा दिया गया था।
9.श्रीमती धनमन देवी -
कप्तानगंज क्षेत्र के करचोलिया गांव की निवासी थीं। वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़ी थीं और कप्तानगंज ब्लॉक की 9वीं ब्लॉक प्रमुख बनी थीं। वह भाजपा से जुड़ी थी। धनमन देवी को इस पद पर काबिज होने का मौका मिल गया। जो फरवरी 2018 में अविश्वास प्रस्ताव के बाद मतदान प्रक्रिया के जरिए धनमन देवी ब्लॉक प्रमुख पद पर काबिज हुईं थीं।
10.वर्तमान प्रमुख: श्रीमती मिथिलेश निषाद -
जुलाई 2021 के पंचायत चुनाव में मिथिलेश निषाद (तेलियाडीह गांव निवासी) निर्विरोध ब्लॉक प्रमुख निर्वाचित हुईं और वर्तमान तक इस पद पर कार्य कर रही हैं। कप्तानगंज विकासखंड की निर्विरोध निर्वाचित ब्लाक प्रमुख 38 वर्षीय मिथिलेश निषाद तेलियाडीह गांव निवासी है। इनके पति भोला निषाद बेसिक शिक्षा विभाग में शिक्षक है।परिवार में पिछले 30 वर्षों से ग्राम प्रधानी चली आ रही है । 2015 से 20 तक यह स्वयं प्रधान के दायित्व का निर्वहन कर चुकी हैं। जबकि पहली बार क्षेत्र पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर प्रमुख बनने में सफल हुई।
उनका कार्यकाल उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के निर्धारित नियमों के अनुसार सामान्यतः साल 2021 से 2026 तक का है ।वह इस पद पर वर्तमान में कार्यरत हैं। हाल ही में मई 2026 में उनकी अध्यक्षता में क्षेत्र पंचायत की बैठक भी संपन्न हुई थी। ब्लाक प्रमुख मिथिलेश निषाद ने बताया कि क्षेत्र पंचायत से मिलने वाले धन से पूरे क्षेत्र पंचायत में विकास के कार्य बीडीसी सदस्यों के प्रस्ताव पर कराए जा रहे हैं, जिसमें क्षेत्र पंचायत सदस्य तथा अन्य जनप्रतिनिधियों से विकास के लिए नए प्रस्ताव लिए जा रहे हैं। इससे क्षेत्र पंचायत से होने वाले कार्यों को धरातल पर उतारा जा सके। क्षेत्र पंचायत की बैठक में कप्तानगंज के विधायक अतुल चौधरी ने कहा कि विकास के लिए सभी जन प्रतिनिधियों को मिलजुल कर जनहित के मुद्दों पर काम करना होगा।
कप्तानगंज (बस्ती) शृंखला के कुछ अन्य आकर्षण आलेख -
भाग 1 में आलेख में जानिए- कैप्टन माल्कोम मक्लोइड ने बनाई थी कैप्टनगंज तहसील और मुन्सफी ।
भाग 2 के आलेख में जानिए- "कप्तानगंज विधान सभा का इतिहास और भावी उम्मीदवार " ।
भाग 3 - के वर्तमान आलेख में जानिए- "कप्तानगंज विकास क्षेत्र का इतिहास"।
भाग 4 के आगामी आलेख में जानिए- "कप्तानगंज नगर पंचायत का इतिहास"।
भाग 5…6 आदि -
समय समय पर अन्य आगामी आलेख में कप्तानगंज के इतिहास , समाज और संस्कृति के विभिन्न उपादानों पर भी प्रकाश डाला जाएगा।
लेखक -
आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,
पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी,
मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8
निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,
आनन्दनगर,कटरा,बस्ती,
Pin- 272001,उत्तर प्रदेश INDIA
मोबाइल नंबर +91 9412300183
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