Wednesday, August 19, 2026

लोकसभा के 251, राज्यसभा के 75 और 14 राज्यों के मुख्यमंत्रियों के खिलाफ गंभीर मामले लंबित:- (समाचार संकलन: डा राधेश्याम द्विवेदी)

 

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल एफिडेविट के मुताबिक, देशभर में सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से ज्यादा आपराधिक मामले लंबित हैं।लोकसभा के 543 में से 251 सांसदों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं, जबकि राज्यसभा के 233 में से 75 सदस्यों के खिलाफ भी ऐसे मामले दर्ज होने की बात सामने आई है।ध्यान देने वाली बात है कि आपराधिक मामला दर्ज होना अपने आप में दोषी साबित होना नहीं है। लेकिन आंकड़ा सवाल जरूर खड़ा करता है।

जिनके हाथ में कानून बनाने की जिम्मेदारी है, उन्हीं जनप्रतिनिधियों से जुड़े हजारों मामले अदालतों में लंबित क्यों हैं?


देश के सामने आया है कि कुल 326 सांसदों पर इस समय आपराधिक मामले दर्ज हैं। इनमें 251 लोकसभा के और 75 राज्यसभा के सदस्य शामिल हैं। चिंता की बात यह है कि इनमें से 210 पर ऐसे संगीन आरोप लगे हैं, जिनमें दोषी पाए जाने पर 5 साल या उससे ज्यादा की जेल हो सकती है।

सांसदों और विधायकों पर 4,192 केस लंबित

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 से ही इन मामलों की जल्द सुनवाई का निर्देश दिया था, लेकिन इसके बावजूद नेताओं के खिलाफ 4,192 मुकदमे अभी भी लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट के सलाहकार (एमिकस क्यूरी) वरिष्ठ वकील विजय हंसारिया बताते हैं कि नए मामले लगातार आने से लंबित केसों का बोझ बढ़ता जा रहा है, जिससे उन्हें निपटाना मुश्किल हो रहा है।

केरलम के 95 प्रतिशत सांसदों पर आरोप

आपराधिक मामलों में केरलम के सांसदों की संख्या सबसे ज्यादा है, जहां करीब 95 प्रतिशत सांसदों पर आरोप लगे हुए हैं। इस सूची में तेलंगाना और ओडिशा उसके बाद हैं।सेन्हा कलिता के जरिए दाखिल हलफनामे के मुताबिक, केरलम के 20 में से 19 सांसद यानी 95% सांसदों पर आपराधिक आरोप हैं। इनमें 11 सांसद गंभीर मामलों का सामना कर रहे हैं।

तेलंगाना दूसरे स्थान पर 

तेलंगाना के 17 में से 14 सांसदों यानी 82% पर आपराधिक मामले हैं। ओडिशा में 21 में से 16 सांसद यानी 76%, झारखंड में 14 में से 10 यानी 71% और तमिलनाडु में 39 में से 26 यानी 67% सांसदों पर मामले हैं।

बड़े राज्यों में 50 प्रतिशत नेताअपराधी

उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे अन्य बड़े राज्यों के करीब 50% सांसदों पर आपराधिक मामले हैं।हरियाणा के 10 सांसदों में से एक और छत्तीसगढ़ के 11 सांसदों में से एक पर आपराधिक आरोप हैं। पंजाब में 13 में से 2, असम में 14 में से 3, दिल्ली में 7 में से 3, राजस्थान में 25 में से 4, गुजरात में 25 में से 5 और मध्य प्रदेश में 29 में से 9 सांसदों पर आपराधिक मामले हैं।

तेलंगाना CM पर सर्वाधिक 89 मामले

एफिडेविट मे बताया गया कि तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी पर 89 केस हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के CM सुवेंदु अधिकारी पर 29 और कर्नाटक के CM डीके शिवकुमार पर 19 मामले हैं।

हाईकोर्ट से जुटाए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में 1,243 आपराधिक मामलों का फैसला हुआ। इसी साल 1,050 नए मामले दर्ज किए गए। पूर्व और मौजूदा सांसदों-विधायकों के खिलाफ कुल 4,192 मामले पेंडिंग हैं।

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स की रिपोर्ट का हवाला देते हुए एफिडेविट में कहा गया है, “लोकसभा में 543 सदस्यों में से 251 पर आपराधिक मामले हैं। इनमें 170 मामले गंभीर हैं, जिनमें 5 साल या उससे ज्यादा की सजा हो सकती है।”

एफिडेविट में कहा गया है, “राज्यसभा में 233 में से 75 यानी 33% सदस्यों पर आपराधिक मामले हैं। इनमें 40 यानी 18% मामले गंभीर हैं, जिनमें 5 साल या उससे ज्यादा की सजा हो सकती है।”

वरिष्ठ वकील ने उत्तर प्रदेश को छोड़कर विभिन्न हाईकोर्ट की ओर से दाखिल रिपोर्ट का विश्लेषण भी कोर्ट में पेश किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट से रिपोर्ट नहीं मिलने के कारण उत्तर प्रदेश का आंकड़ा इसमें शामिल नहीं किया गया।

विशेष अदालतों में सिर्फ सांसद- विधायकों के केस चलाने की मांग -

विजय हंसारिया ने कोर्ट में कहा कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामलों की सुप्रीम कोर्ट से निगरानी जरूरी है, ताकि इनका जल्द निपटारा हो सके। उन्होंने मांग की कि सांसद-विधायकों के लिए बनाई गई विशेष अदालतें सिर्फ उन्हीं के मामलों की सुनवाई करें।उन्होंने कहा कि इन मामलों की सुनवाई पूरी होने के बाद ही विशेष अदालतों में दूसरे मामलों की सुनवाई शुरू की जाए।


 लेखक/ पत्रकार

डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,

पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी,

मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8

निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,

आनन्द नगर,कटरा, बस्ती,Pin 2720901,उत्तर प्रदेश INDIA 

मोबाइल नंबर +91 9412300183



 



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