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Wednesday, October 29, 2025

वैद्यनाथ की भांति बासुकीनाथ भी महत्व पूर्ण शिवमन्दिर✍️ आचार्य डॉ राधेश्याम द्विवेदी

उत्तर भारत के हरियाली से हरे भरे राज्य झारखण्ड में भी कई सारे प्रसिद्ध मंदिर अपने यहाँ आने वाले भक्तो को आकर्षित करते है.  यहां आने वाले श्रद्धालु पहले शिव गंगा में आस्था की डुबकी लगाते है। उसके बाद फौजदारी बाबा बासुकीनाथ पर जलार्पण करते है. यह अजगैबीनाथ मंदिर और बैद्यनाथ मंदिर के साथ बिहार और झारखंड के तीन प्रमुख शिव मंदिरों में से एक है ।

श्री बाबा बासुकीनाथ प्राचीन काल से ही अपने सच्चे भक्तों को उत्तम स्वास्थ्य और सुख का आशीर्वाद देते आ रहे हैं और इस स्थान के दर्शन से आत्मा को भीतर से शांति मिलती है। श्री बासुकीनाथ के भक्त बातचीत करते समय एक-दूसरे का अभिवादन "बम बासुकी" कहकर करते हैं।

अवस्थिति:- 

बासुकीनाथ मंदिर वैद्यनाथ ज्‍योतिर्लिंग मंदिर से लगभग 42 किलोमीटर दूर है. यह मंदिर  झारखंड के दुमका जिले के जरमुंडी गॉंव में यह मंदिर बना है. जो भक्‍तजन वैद्यनाथ मंदिर के दर्शन को आते है वह बासुकीनाथ मंदिर के दर्शन भी करते है. यह मंदिर शिवजी का मंदिर है. बासुकीनाथ मंदिर में शिवजी और माता पार्वती के मंदिर आमने-सामने है. 

देश के कोने-कोने से आने वाले शिव भक्त पहले देवघर स्थित बाबा बैजनाथ धाम पहुँचते हैं और भगवान शिव को गंगाजल अर्पित करते हैं. हालाँकि, बाबा बैजनाथ के बाद अधिकांश श्रद्धालु बासुकीनाथ ही पहुँचते हैं. मान्यता भी है कि जब तक बासुकीनाथ के दर्शन न किए जाए तब तक बाबा बैजनाथ की यात्रा अधूरी ही मानी जाएगी.

फौजदारी फ़रियाद सुनते हैं बाबा:- 

हिंदुओं में यह मान्यता है कि बाबा बैजनाथ में विराजमान भगवान शिव जहाँ दीवानी मुकदमों की सुनवाई करते हैं. वहीं बैजनाथ धाम से लगभग 42 किमी दूर स्थित बासुकीनाथ में विराजित भोलेनाथ श्रद्धालुओं की फौजदारी फ़रियाद सुनते हैं और उनका निराकरण करते हैं. बासुकी नाथ में भगवान शिव का स्वरूप नागेश का है. यही कारण है कि यहाँ भगवान शिव को दूध अर्पित करने वाले भक्तों को भगवान शिव का भरपूर आशीर्वाद प्राप्त होता है.

समुद्र मंथन कथा के अनुसार -- 

समुद्र मंथन के दौरान मंदर पर्वत को मथनी और वसुकिनाग को रज्जू के रूप में व्यवहार किया गया था इस मंथन के बाद वासुकि नाग को नागनाथ के शरण में छोड़ दिया इस तरह से वासुकिनाथ के रूप में विख्यात हुए।

समुद्र मंथन की जगह 

बिहार के बाँका जिले में स्थित मंदार पर्वत के आसपास का क्षेत्र ही मंथन का स्थान है। आज भी झारखण्ड, बंगाल, उड़ीसा और बिहार की भूमि में खनिजों का प्रचुर भण्डार है। सबका केंद्र मंदार पर्वत ही है। मंदार में अब भी समुद्र मंथन से निकली निधियाँ छिपी हुई हैं।

वासुकीनाथ में विश्राम 

बासुकीनाथ समुद्र मंथन में घायल हो गया था। उसने बहुत सारा विश्व उगल दिया।इसे शिव जी पी गए। भोलेनाथ नागराज को पहुँचाने के बाद और गर्मी मिटाने के लिए जिस स्थान पर बैठे थे, वह स्थान है वासुकीनाथ है । जिस स्थान पर नागराज का उपचार करने व विष ग्रहण करने के बाद बैठे थे, वह स्थान है वैद्यनाथ धाम, देवघर में। चाँद का वह टुकड़ा जो उनके सर पर लगाया गया था, आज भी लगा है और उससे निरंतर जल टपकता रहता है। वह टुकड़ा भोलेनाथ के ठीक ऊपर देव घर मंदिर के शिखर के नीचे लगा है। नाम है - चंद्रकांत मणि।

किसान बसु की कथा के अनुसार - 

श्री बाबा बासुकीनाथ शिवलिंग स्वयंभू शिवलिंग है। इसका नाम एक किसान बसु के नाम पर रखा गया है, जो भगवान शिव के बहुत बड़े भक्त थे। बहुत समय पहले, जब बासुकीनाथ क्षेत्र, जिसे उस समय दारुक वन कहा जाता था, सूखे की मार झेल रहा था, तो बसु ने अपनी भक्ति से भगवान शिव को प्रसन्न किया और उन्हें वर्षा लाने के लिए बासुकीनाथ क्षेत्र में निवास करने के लिए विवश किया। वरदानी नाथ भी एक स्वयंभू शिवलिंग है और बासुकीनाथ मंदिर से 6 किमी की दूरी पर स्थित है।

इस सुंदर एवं रमणीय प्रदेश में वासु नाम का एक चरवाहा रहता है जो एक सदाचारी मनुष्य था. एक बार की बात है की उसकी एक गाय हर रोज अपनी दूध को कही निकाल आती थी इसके बारे में पता लगाने के लिए बासु नामक चरवाहा एक दिन अपनी गाय के पीछे पीछे गया और पाया की एक स्थान पर उसकी गाय अपनी दूध का त्याग कर रही है उसके बाद वह उस स्थान को साफ करने पर एक शिव लिंग को पाया, उसी रात उसे स्वप्न में भोले नाथ ने आदेश दिया उस शिव लिंग के स्थान पर एक मंदिर स्थापित करो और इस प्रकार वह मंदिर स्थापित कर के उसकी पूजा करने लगा.

पूजा से खुश होकर नागनाथ ने दर्शन दिया तथा कहा तुम्हीं से मैं इस युग में प्रथम पूजित हुआ इसलिए भक्तगण आज से मुझे बासुकीनाथ के नाम से जानेंगे और भक्तो की मनोकामना पूर्ण होगी. इस तरह से नागनाथ ज्योतिर्लिंग बासुकीनाथ कहलाए.कालांतर में उसी चरवाहे बासु बासु के नाम पर इस मंदिर के नाम पर बसुकिनाथ पड़ा. जिन्हे बाबा नागेश्वर और फौजदारी बाबा के नाम से भी जानते है.

 श्रावणी मेला

श्रावणी मेला जिसे कांवरिया मेला के नाम से भी जानते हैं यह श्रावण माह में लगभग सवा महीनों तक चलता है. इस दौरान बाबा बासुकीनाथ धाम का महत्त्व बढ़ जाता है. जुलाई अगस्त के महीनों में भारत के कई राज्यों से भारी संख्या में लोग दर्शन करने और जल चढाने जाते हैं. शिव भक्त सबसे पहले बिहार के भागलपुर के सुल्तानगंज, जो बासुकीनाथ से लगभग 135 किलो- मीटर दूर है, वहाँ पहुंचते हैं और गंगा जल ले कर बाबा धाम की और पैदल आते है. जो भक्त बिना रुके सीधे बासुकीनाथ पहुंचते हैं उन्हें डाक बम कहते हैं और जो कई जगह रुकते हुए बाबा के धाम पहुँचते हैं उन्हें “बोल बम” कहते है.

परिसर के अन्य मंदिर

बासुकीनाथ मंदिर के मंदिर परिसर में भगवान गणेश, स्वामी कार्तिकेय, मैया पार्वती, मैया काली, आनंद भैरव, मां अन्नपूर्णा, मां अंबे, श्री राम दरबार, मां तारा, मां कमला, मां छिन्नमस्तिका, मां बगलामुखी, भगवान हनुमान और कई अन्य देवता निवास करते हैं।


लेखक परिचय:-

(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए सम सामयिक विषयों,साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करते रहते हैं। लेखक इस समय पितृ तर्पण चारों धाम की यात्रा पर हैं।(वॉट्सप नं.+919412300183