Showing posts with label अयोध्या की तस्वीर/ सनातन धर्म और संस्कृति. Show all posts
Showing posts with label अयोध्या की तस्वीर/ सनातन धर्म और संस्कृति. Show all posts

Saturday, April 11, 2026

विकास और पाबंदियों के बीच झूल रहा है अयोध्या की तसबीर 🙏आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी

उत्तर प्रदेश में अयोध्या की अर्थव्यवस्था में विगत वर्षों से ऐतिहासिक उछाल आया है। राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा के बाद यहां पर्यटन, निवेश, रोजगार और राजस्व में व्यापक वृद्धि हुई है। मंदिर निर्माण से पहले अयोध्या की पहचान पवित्र तीर्थ स्थान तक सीमित थी। मेले और पर्वों के समय ही अयोध्या चहकती और दमकती थी। साकेत पोस्ट ग्रेजुएट कालेज से शिक्षा के क्षेत्र में यहां कुछ बदलाव देखा गया है। यहां के संस्कृत विद्यालय निर्धन छात्रों के शरणगाह थे। इसी बहाने अनेक मन्दिरों में पूजा आरती और भगवान जी का भोग ये संस्कृत पढ़ने वाले बटुक कर दिया करते थे। यह सिलसिला काफी दिनों से चलता रहा है। सत्ता बदली नए-नए जिम्मेदार आए पर अयोध्या के हालत में ज्यादा परिवर्तन नहीं आया। अयोध्या में तेजी से हो रहे बुनियादी ढांचे के विकास (सड़कें, एयरपोर्ट, टाउनशिप) और आध्यात्मिक गरिमा बनाए रखने की सख्त पाबंदियों (ऊंचाई सीमा, नो-वेज जोन) के बीच एक अनूठा संतुलन बन रहा है। 1790 एकड़ की ग्रीन फील्ड टाउनशिप और 7 मीटर तक की ही इमारतों की अनुमति के साथ, यह शहर आधुनिकीकरण और विरासत संरक्षण के बीच झूल रहा है। 

1.राम मन्दिर के समाधान और राजनीतिक सोच से परिस्थितियां में सुधार :- 

श्रीराम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद विवाद के समाधान के बाद अयोध्या की परिस्थितियां बदलनी शुरू हो गई। श्रीराम लला मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के बाद से यहां की आर्थिक गतिविधियों में अभूतपूर्व उछाल आया है। पर्यटन पर आधारित गतिविधियों से कर राजस्व 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। आतिथ्य क्षेत्र, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में तेजी से विस्तार हुआ है। सांस्कृतिक और धार्मिक परियोजनाएं योजनाबद्ध तरीके से क्रियान्वित करके पर्यटन, रोजगार और निजी निवेश को गति देकर बहुस्तरीय आर्थिक वृद्धि का आधार बन सकती हैं। अयोध्या में आधारभूत संरचना, पर्यटन सुविधाओं और निवेश माहौल में व्यापक बदलाव देखने को मिला है, जिसने इस तीर्थनगरी को विकास की मुख्यधारा में अग्रिम पंक्ति पर लाकर खड़ा कर दिया है।

2.कारोबार में विकास हुआ :- 

अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का व्यापारिक कारोबार हुआ है। प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन से आतिथ्य और उससे जुड़े उद्योगों को नई गति मिली है। 150 से अधिक नए होटल और होम स्टे स्थापित हो चुके हैं। जो दिनों दिन बढ़ते ही जा रहे हैं। प्रतिष्ठित होटल शृंखला ने अयोध्या में विस्तार योजनाओं को बहुत ही आगे बढ़ा दिया है। ऑन लाइन ट्रैवल प्लेटफॉर्म पर बुकिंग में चार गुना तक वृद्धि दर्ज की जा रही है।

3.लघु उद्योगों में उछाल :- 

अयोध्या में स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक स्मृति-चिह्न और मूर्तियों की मांग में वृद्धि से कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है। करीब 6000 एमएसएमई स्थापित हुए हैं। अगले 4- 5 वर्षों में पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में लगभग 1.2 लाख प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन का अनुमान है। छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की दैनिक आय 2500 रुपये तक पहुंची। 

4.मन्दिर आधारित अर्थव्यवस्था :-  

भारतीय प्रबंधन संस्थान लखनऊ की  स्टडी रिपोर्ट अयोध्या का आर्थिक पुनर्जागरण बताती है । राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या में व्यापक आर्थिक सक्रियता, निवेश प्रवाह और रोजगार सृजन देखने को मिल रहा है। मंदिर निर्माण से पहले और बाद की आर्थिक परिस्थितियों का तुलनात्मक विश्लेषण करते हुए यह पाया गया है कि धार्मिक अवसंरचना, यदि सुविचारित नीति और प्रशासनिक प्रतिबद्धता से जुड़ जाए, तो वह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति देने वाला उत्प्रेरक बन सकती है।

5.पूर्व अर्थव्यवस्था सिमटी हुई थी :- 

मंदिर निर्माण से पहले अयोध्या की पहचान मुख्य रूप से एक पवित्र तीर्थ स्थान तक ही सीमित थी। वहां आगंतुकों की वार्षिक संख्या लगभग 1.7 लाख के आसपास ही ठहर रही थी। स्थानीय बाजार छोटे पैमाने पर संचालित होते रहे और अधिकांश दुकानदारों की औसत दैनिक आय 400-500 रुपये के बीच ही सीमित थी, जिससे आर्थिक गतिविधियों का दायरा संकुचित बना रहता रहा है। राष्ट्रीय स्तर की होटल श्रृंखलाओं की उपस्थिति लगभग नगण्य थी। रेलवे स्टेशन बुनियादी सुविधाओं तक ही सीमित था। 

6.युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन बन्द हुआ:- 

रोजगार के अवसर सीमित होने के कारण युवाओं का बड़े शहरों की ओर पलायन, एक सामान्य प्रवृत्ति बन चुका था। पर्यटन से होने वाला राजस्व राज्य की व्यापक अर्थव्यवस्था में उल्लेखनीय योगदान नहीं दे पा रहा था। अचल संपत्ति बाजार में भी ठहराव की स्थिति दिखाई देती थी। कुल मिलाकर, अयोध्या की आर्थिक संरचना पारंपरिक तीर्थ-आधारित गतिविधियों तक सीमित थी। इसमें विस्तार और निवेश की संभावनाएं स्पष्ट रूप से अविकसित थीं।

7.राम लला के प्राण प्रतिष्ठा के बाद अभूतपूर्व परिवर्तन :- 

जनवरी 2024 में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद अयोध्या की आर्थिक तस्वीर ने तेजी से करवट ली। पहले ही छह महीनों में 11 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं का आगमन दर्ज किया गया। इसने स्थानीय बाजार, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्र में नई ऊर्जा का संचार किया है। अब अयोध्या में वार्षिक स्तर पर 5-6 करोड़ आगंतुकों की संभावना जताई गई है, जो अयोध्या को देश के प्रमुख धार्मिक- पर्यटन केंद्रों की अग्रिम पंक्ति में ला खड़ा करती है। अयोध्या में लगभग 85,000 करोड़ रुपये की पुनर्विकास परियोजनाएं विभिन्न चरणों में प्रगति पर हैं। इनका प्रभाव केवल आधारभूत ढांचे तक सीमित नहीं, बल्कि निवेश और सेवा क्षेत्र तक फैला हुआ है।

8.आधारभूत संरचना में व्यापक निवेश:- 

इसके अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, आधुनिक रेलवे स्टेशन, विस्तारित सड़क नेटवर्क और नगर सौंदर्यीकरण के कार्य प्रगति पर हैं। सतत शहरी विकास को बढ़ावा देने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों और सौर ऊर्जा जैसे संसाधनों को भी प्रोत्साहित किया जा रहा है। अयोध्या को 'मॉडल सोलर सिटी' के रूप में विकसित करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।

9.अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में बनी नई पहचान:- 

 वर्ष 2025 तक उत्तर प्रदेश में पर्यटन व्यय 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है, जिसमें अयोध्या की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। पर्यटन आधारित गतिविधियों से कर राजस्व 20,000 से 25,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है। आतिथ्य, निर्माण, परिवहन और सेवा क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में तीव्र विस्तार हुआ है। साथ ही, अयोध्या ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय आध्यात्मिक केंद्र के रूप में नई पहचान प्राप्त की है, जहां प्रवासी भारतीय, शोधकर्ता और वैश्विक श्रद्धालु आकर्षित हो रहे हैं।

10.आतिथ्य क्षेत्र में निवेश का नया दौर 

कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) के अनुसार, मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से देशभर में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हुआ। इसमें अयोध्या की हिस्सेदारी महत्वपूर्ण रही। प्रतिदिन दो लाख से अधिक श्रद्धालुओं के आगमन ने आतिथ्य और उससे जुड़े उद्योगों को नई गति दी है। 150 से अधिक नए होटल और होमस्टे स्थापित हुए हैं, जबकि देश-विदेश की प्रतिष्ठित होटल श्रृंखलाएं ताज होटल्स, मैरियट इंटरनेशनल और विंडहैम होटल्स एंड रिसॉर्ट्स ने अयोध्या में अपने विस्तार की योजनाएं घोषित की हैं।

11.पर्यटन मंच पर चार गुना अधिक बुकिंग:- 

ऑनलाइन पर्यटन मंच पर अयोध्या के लिए बुकिंग में चार गुना तक वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही, स्थानीय हस्तशिल्प, धार्मिक स्मृति-चिह्न और मूर्तियों की मांग में तेज उछाल आया है। इससे कारीगरों और स्थानीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष लाभ मिला है।

12.उद्यमिता, रोजगार पर भी प्रभाव :- 

युवाओं के बीच विशेष रूप से आर्थिक सक्रियता का प्रभाव उद्यमिता और रोजगार सृजन में भी स्पष्ट है। करीब 6000 सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम या तो नए रूप में स्थापित हुए हैं या दोबारा अयोध्या लौटे हैं। अनुमान है कि अगले    4 - 5 वर्षों में पर्यटन वृद्धि के कारण पर्यटन, परिवहन और आतिथ्य क्षेत्रों में लगभग 1.2 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार सृजन होगा।

13.छोटे दुकानदारों की दैनिक आय में वृद्धि :- 

छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी व्यवसायियों की दैनिक आय ढाई-तीन हजार रुपये तक पहुंच गई है। रियल एस्टेट क्षेत्र में भी तीव्र वृद्धि दर्ज की गई है, जहां मंदिर के आसपास संपत्ति मूल्यों में पांच से दस गुना तक उछाल देखा गया है, जिससे देशभर के निवेशकों का ध्यान आकर्षित हुआ है।

14.बदलती विकास की अवधारणा :- 

 अयोध्या का विकास अब केवल धार्मिक महत्व तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों का एक सशक्त केंद्र बनकर उभरा है। धार्मिक विरासत आधारित विकास मॉडल, यदि सुव्यवस्थित निवेश, प्रशासनिक समन्वय और दीर्घकालिक दृष्टि के साथ लागू किया जाए, तो वह स्थानीय अर्थव्यवस्था में व्यापक और संरचनात्मक परिवर्तन ला सकता है।


         विकास के साथ-साथ 

    अयोध्या में पाबंदियां भी बढ़ीं हैं :

अयोध्या की व्यवस्था और विकास मॉडल पर अब संत समाज की ओर से ही सवाल उठाए जाने लगे हैं,अयोध्या के विद्वान संत अयोध्या हनुमत निवास की पीठाधीश्वर महंत मिथलेश नंदिनी शरण ने अयोध्या के मौजूदा हालात को लेकर दिल्ली के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में आयोजित “अयोध्या पर्व” के मंच से अयोध्यावासियों की व्यथा का ऐसा बताया, कि सियासी और प्रशासनिक हलकों में खलबली मच गई। आम नागरिक इतना बेबाक अपनी बात तो रख नहीं सकता। उसकी मर्यादा और मजबूरियां उसे चुप रहने में ही भला दिखाई पड़ेंगी। एक पढ़ा लिखा और हर दृष्टि से संतुष्ट संत जिसे न कुछ पाने की प्रत्याशा है और ना कुछ खोने का ग़म है, वही इस तरह अंतःकरण की अभिव्यक्ति दे सकता है।

1.अयोध्या के साथ धोखा :- 

राम नगरी केवल पत्थरों और ईंटों का ढेर नहीं है ,बल्कि राम की स्मृति, आध्यात्म की ज्योति और सनातन की अस्मिता भी है । मोदी और योगी जैसे दो धुरंधरों के रहते इस नगरी के अंधाधुंध “विकास” के नाम पर कई रूपों में अत्याचार,लूट और सांस्कृतिक हत्या हुई है जिसे लोग देखते रह गए । यह अयोध्या के साथ धोखा हुआ है। विकास के नाम पर इसकीआध्यात्मिक अस्मिता को कुचला जा रहा है। घाट, जो राम-सीता की स्मृतियों के साक्षी हैं, आज वेडिंग शूट के लिए इस्तेमाल हो रहे हैं। सरयू के किनारे आस्था विश्वास की प्रेम की कहानियाँ लिखी जानी चाहिएं न कि दिखावटी फोटो सेशन की।

2.'राम की अयोध्या' व्यवसाय नहीं:- 

अयोध्या प्रभु राम की स्मृति से परिभाषित होती है, न कि केवल कंक्रीट ईंट पत्थर और व्यावसायिक भौतिकता से। अयोध्या सबकी है, लेकिन यह “राम की अयोध्या” होनी चाहिए, न कि केवल मंदिर-व्यवसाय की। भीड़भाड़, अंधाधुंध परियोजनाएँ और परंपरा का हनन होता रहा। अयोध्या अजेय है, उसे कोई जीत नहीं सका है। वो अपने साथ किए हर अन्याय को ब्याज समेत लौटाती है।  

3.वीवीआईपी मूवमेंट और पर्वों के समय अयोध्या का रूट डाइवर्जन :- 

राम की नगरी, जहाँ सदियों से भक्ति की सरयू बहती रही, जहाँ हर कण में प्रभु के चरणों की ध्वनि गूँजती रही, वह अयोध्या अब लंबे अरसे बाद एक नई आशा की किरण में नहा रही है। मंदिर निर्माण के बाद से कड़ी सुरक्षा की जंजीरें, विकास के नाम पर विध्वंस की आँधी और वी वी आई पी व्यवस्था की बंदिशों ने उसे जकड़ रखा है। प्रदेश के विभिन्न भागों से आने वाले भारी वाहन अयोध्या शहर में प्रवेश के पहले ही दूसरे घुमावदार रास्ते पर भेज दिए जाते हैं। इस तरह पूर्वांचल और मध्य उत्तर प्रदेश के लोगों और व्यापारियों को समय और धन दोनों का नुकसान उठाना पड़ता है।

4.पुरातन सरयू जी की महिमा खण्डित ना करें:- 

समय के साथ साथ अयोध्या नित नए कलेवर को धारण करती रही है। एक सरयू जी ही राम के समय से पूर्व से होते हुए आज भी कायम है। भले यह अयोध्या को छोड़ बस्ती और गोण्डा जिले में अपना आशियाना बना रखा हो। आज कम से कम राम की पौड़ी, अयोध्या के घाट को तो छोड़ दिया जाना चाहिए । वे वेडिंग शूट और रीलबाजों के लिए नहीं बने हैं। आज के समय में भला आदमी इन उन्मुक्त वातावरण में ज्यादा समय ठहर नहीं सकता है।

5.विकास मॉडल पर सवाल:- 

विकास के नाम पर असल पहचान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। अब लोग हनीमून मनाने के लिए गोवा की जगह अयोध्या आने लगे हैं। सरयू नदी में क्रूज चलाकर यहां सदियों से उन्मुक्त वातावरण में रहने वाले जलचर अब यह क्षेत्र छोड़ चुके हैं। उन्हें अपने कर्म और प्रारब्ध से मिला सरयू और अवध निवास को जबरन छीना जा रहा है। यह उनके साथ घोर अन्याय है। 

6.प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल:- 

सरकारी एजेंसियां पर्याप्त सावधानी और होमवर्क करने के बजाय अयोध्या के विचरण करने और आने - जाने पर केवल पाबंदी लगाती है। यहां अगर निवासियों का प्रशासन से तालमेल न हो तो आम आदमी का जीना मुश्किल हो जाता है। अयोध्या में रहते हुए अगर अयोध्या के प्रशासन से आपका व्यवहार नहीं हैं, तो आपका जीना दूभर है। आप , आपके बच्चे,रिश्तेदार और मित्र आपके सुख-दुख के भागी नहीं बन सकते हैं। उन्हें शहर में वाहन के साथ प्रवेश नहीं मिल सकता है।

7.शांत जीवन में अशांत :- 

अब वहां के मूलनिवासी और साधू-संतों का शांत जीवन एकदम अशांत हो गया है। आम आदमी की अगर प्रशासन में पकड़ नहीं है तो प्रशासन द्वारा घर आना-जाना नर्क बना दिया गया है। बच्चों का स्कूल आना- जाना, पठन - पाठन अब बहुत कठिन हो गया है। अस्पताल में आना- जाना भी मुश्किल हो गया है। यह सब सुरक्षा के नाम पर प्रशासन की निर्दयता की वजह से हो रहा है।

8.छोटे-छोटे प्रवेश मार्गों पर पुलिस के बैरियर :- 

मुख्य मार्ग पर प्रवेश वर्जित होने के साथ छोटी छोटी गलियों में भी बैरियर और प्रवेश निषेध के बोर्ड लगे मिलते हैं। वहां पुलिस होमगार्ड के जवान मुस्तैदी से लोगों को रोकते देखे जा सकते हैं। स्थानीय छोटे - छोटे वाहन रिक्शे और टैम्पो रोजी-रोटी के तहत इस प्रकार के प्वाइंट पर अपने वाहन लगाकर आम श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के दैनिक क्रिया-कलापों को प्रभावित करते हैं।

9.तीर्थ यात्री पैदल चलने के लिए मजबूर :- 

वैसे कहने को मुख्य मार्गों पर प्रदूषण मुक्त वाहन सरकार उतार रखे हैं पर ये पूरी अयोध्या के प्रमुख मन्दिरों और स्थलों तक पहुंच नहीं सकते हैं। दो-चार किमी चलकर आगे पुलिस द्वारा सवारियां उतरने और पैदल चलने के लिए मजबूर कर दिए जाते हैं। इसके लिए अच्छी खासी पुलिसिंग व्यवस्था भी की गई होती है। आम तीर्थ यात्री और आम नागरिक को अनायास ये पाबंदियां झेलनी ही पड़ती है।

10.स्थानीय प्रवेश प्रतिबंधित :- 

यह देखा गया है कि अधिकांश समयों में यहां के मुख्य धर्म क्षेत्र में यहां के निवासियों और आगंतुकों के वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहता है। स्थानीय रिक्शे वाले लंबी दूरी तय करके ही यात्रियों को गंतव्य तक नहीं छोड़ पाते हैं। कभी-कभी वीवीआईपी के निकल जाने के बाद भी यह प्रतिबंधित प्रवेश चालू नहीं हो पाता है और ये समन्वय का बड़ा फेलियर बन जाता है।

11.अस्पताल जा पाना सम्भव नहीं:- 

अयोध्या में रहते हुए अगर अयोध्या के प्रशासन से आपका व्यवहार नहीं हैं, तो आपका जीना दूभर है।आपात स्थिति में भी बैरियर नहीं हटाए जाते।आदमी मर जाए पर प्रशासन बैरियर न उठाए। यह अयोध्या का उद्धार कदापि नहीं हो सकता है। इसे हर जिम्मेदार उच्चस्थ लोग जानते हुए भी सुधार कर पाने में असमर्थ रहते हैं।

12.नए-नए मोहल्ला क्लिनिक खुलें :- 

अयोध्या के लोगों को मौलिक चिकित्सा सुविधा मिलना असंभव हो गया है। यातायात प्रतिबंध के कारण हुए लोग अस्पताल तक नहीं पहुंच पाते हैं। इसलिए जगह-जगह मोहल्ला क्लीनिक और एंबुलेंस की व्यवस्था होनी चाहिए ,जिससे यहां के निवासियों ,आगंतुकों और तीर्थ यात्रियों को समय से चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराकर उनका जान बचाया जा सके।

13.अयोध्या ‘अयोध्य’ है :- 

अयोध्या ‘अयोध्य’ है, उसे कोई जीत नहीं सका है। अयोध्या को शास्त्रों में “अयोध्य” कहा गया है, यानि जिसे शत्रु जीत न सके। वह अपने साथ हुए हर अन्याय का जवाब समय आने पर देती है। भगवान राम और भक्त भरत के त्याग से कुछ सीख ग्रहण करें यहां के लोग। तभी इसका सम्यक विकास हो सकेगा।

14.संत समाज में असंतोष:- 

अयोध्या के विद्वान संत मिथलेश नंदिनी शरण ने के बयान के बाद बड़ा सवाल यह है कि जिस अयोध्या को आध्यात्म और आस्था की राजधानी के तौर पर विकसित किया जा रहा है। वहीं अगर संत समाज ही इस तरह अपनी व्यथा व्यक्त करे तो यह अयोध्या का शुभ संदेश कैसे हो सकता है ?

 15.आध्यात्मिक भावना का मजाक:- 

अयोध्या की पवित्र नगरी  के आध्यात्मिक  भा्वना का मजाक बनाकर इसे मनोरंजन और व्यवसायिक स्थल बना दिया गया है। आध्यात्मिक क्षेत्र को मनोरंजन का स्थान न बनने दिया जाय। भक्ति, और श्रद्धा बढे, ऐसा प्रयास करना चाहिए। भगवान श्रीराम सभी को सद्बुद्धि ओर सदवृति दें, हम यही प्रार्थना करते हैं।

16.विनम्र सहयोग पूर्ण रवैया हो :- 

माननीय मुख्यमंत्री जी से विनम्र निवेदन है कि प्रशासनिक अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश हो कि यहां के आम नागरिकों, व्यापारियों,पर्यटकों और छात्रो के साथ प्रशासन अत्यंत विनम्र सहयोगपूर्ण रवैया अपनाए। इसकी अच्छी तरह से मानीटरी किया जाए तथा स्थानीय लोगों को लेकर पर्यवेक्षण कमेटियां इसकी निगरानी करे।


लेखक:

आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,

(पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी, भारत सरकार)

मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8

निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,

आनन्द नगर,कटरा, बस्ती,Pin 272001

मोबाइल नंबर +91 9412300183