Monday, June 16, 2025
राजा आर्द से मान्धात्रि/मान्धाता तक की कथा (राम के पूर्वज-9)#आचार्य डा. राधे श्याम द्विवेदी
Sunday, June 15, 2025
पिताजी की 97वीं जयंती पर सादर स्मरण और श्रद्धांजलि
सरकारी सेवा में:-
बाबूजी सहकारिता विभाग में सरकारी सेवा में लिपिक पद पर नियुक्ति पाये थे। बाद में बाबूजी ने विभागीय परीक्षा देकर लिपिक पद से आडीटर के पद पर अपनी नियुक्ति पा लिये थे। अब बाबूजी का कार्य का दायरा बदल गया और अपने विभाग के नामी गिरामी अधिकारियों में बाबूजी का नाम हो गया था। बाबूजी अपने सिद्धान्त के बहुत ही पक्के थें उन्होने अनेक विभागीय अनियमितताओं को उजागर किया था इसका कोपभाजन भी उन्हें बनना पड़ा था। उस समय उत्तराखण्ड उत्तरप्रदेश का ही भाग था। बाबूजी को टेहरी गढ़वाल और पौड़ी गढ़वाल भी जाना पड़ा था। वैसे वे अधिकांशतः पूर्वी उत्तर प्रदेश में ही अपनी सेवाये दियें हैं। बस्ती तो वे कभी रहे नहीं परन्तु गोण्डा, गोरखपुर, देवरिया, बलिया, आजमगढ, बहराइच, गाजीपुर, जौनपुर तथा फैजाबाद आदि स्थानों पर एक से ज्यादा बार अपना कार्यकाल बिताया है। बाबूजी का आडीटर के बाद सीनियर आडीटर के पद पर प्रोन्नति पा गये थे। सीनियर आडीटर के जिम्मे जिले की पूरी जिम्मेदारी होती थी। बाद में यह पद जिला लेखा परीक्षाधिकारी के रुप में राजपत्रित हो गया। कभी- कभी बाबूजी को दो- दो जिलों का प्रभार भी देखना पड़ता था। जब कोई अधिकारी अवकाश पर जाता था तो पास पड़ोस के अधिकारी के पास उस जिले का अतिरिक्त प्रभार भी संभालना पड़ता था। 1975 में बाबूजी ने अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद से बी. ए. की उपधि प्राप्त की थी।
परिवहन निगम में प्रतिनियुक्ति पर:-
विभाग में अच्छी छवि होने के कारण बाबूजी को प्रतिनियुक्ति पर उ. प्र. राज्य परिवहन में भी कार्य करने का अवसर मिला था। ये क्षेत्रीय प्रबन्धक के कार्यालय में बैठते थे और उस मण्डल के आने वाले सभी जिला स्तरीय कार्यालयों के लेखा का सम्पे्रेक्षण करते थे। उनकी नियुक्ति कानपुर के केन्द्रीय कार्यशाला में 23.12.1982 को हुआ था। यहां से वे औराई तथा इटावा के कार्यालयों के मामले भी देखा करते थे। अपनी सेवा का शेष समय बाबूजी ने राज्य परिवहन में पूरा किया था। 1985 में वह कानपुर से गोरखपुर कार्यालय में सम्बद्ध हो गये थे। यहां से वे आजमगढ़ के कार्यालय के मामले भी देखा करते थे। गोरखपुर कार्यालय से वे 30.06.1987 में सेवामुक्त हुए थे। बाबूजी अपने पैतृक जन्मभूमि पर कम तथा अपने ससुराल वाले जगह पर ज्यादा रहने लगे थे। वे बाहर भी अकेले रहते थे। माता जी को बहुत कम अपने पास रख पाते थे क्योकि घर पर नानाजी भी तो अकेले थे। मेरे भाई साहब को बाबूजी के पास फैजाबाद, बहराइच, गाजीपुर तथा जौनपुर में रहकर पढ़ने का मौका मिल गया था। मुझे उनका सानिघ्य बाहर नहीं मिल पाया तथा उनके साथ समय विताने का अवसर कम मिल पाया था। हमें जब भी अपने पढ़ाई तथा बच्चे के पढ़ाई से समय मिलता मैं उनके आवास यानी अपने ननिहाल स्वयं, पत्नी तथा बच्चे के साथ अवश्य जाता रहा और वह बहुत ही प्रसन्न होते थे ।मैंने सोचा था कि जब मैं अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त हूंगा तो बाबूजी के साथ समय बिताउगां। उनके सुख दुख में भागी बनूंगा। पर ईश्वर ने एसा करने नहीं दिया। हमें थोड़े-थोड़े समय के लिए उनके साथ रहने का अवसर ही मिल पाया। इस बात का मुझे बहुत मलाल रहा है।
अंतिम विदाई:-
17 जनवरी 2011 में वह महान आत्मा हमेशा हमेशा के लिए हमसे दूर होकर परम तत्व में बिलीन हो गया। उनकी प्रेरणा व स्मृतियां आज भी मेरे व मेरे परिवार को सम्बल प्रदान करती है। जब मैं इस स्थिति में हुआ कि मेरे बच्चे अकेले मेरे देखरेख में रहने के लिए उपयुक्त हो गये तो मैं अपनी पत्नी को अपनी मांजी की सेवा के लिए घर पर कर दिया और अपने जिन्दगी के आखिरी के लगभग 8 साल मुझे अकेले बाहर गुजारना पड़ा है। मेरी सेवा के कुछ ही दिन बचे हुए थे। अकेले रहते-रहते पुराने लोगों की यादें बहुत आती रहती थी। अतीत की स्मृतियों में बार-बार जाना ही पड़ता है। उनकी पावन स्मृति को शत शत नमन और श्रद्धांजलि।
Saturday, June 14, 2025
नव विवाहित दंपतियों में हत्या की बढ़ती घटनाएं # डा. राधे श्याम द्विवेदी
अहमदाबाद विमान दुर्घटना के कुछ चमत्कारिक प्रमाण मिले #आचार्य डॉ राधेश्याम द्विवेदी
मलवे में तब्दील हुआ एयर इंडिया का विमान
गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून की सुबह एक भीषण विमान हादसा हुआ, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। अहमदाबाद से लंदन जा रही एक इंटरनेशनल फ्लाइट टेक-ऑफ के कुछ ही मिनटों बाद तकनीकी खराबी के चलते क्रैश हो गई। इस दर्दनाक हादसे में विमान में सवार सभी 241 यात्रियों की मौके पर ही मौत हो गई। हादसा इतना भयावह था कि घटनास्थल पर सिर्फ मलबा, राख और जले हुए हिस्से ही नजर आ रहे थे। यात्रियों के शवों को पहचानना भी मुश्किल हो गया है।इस दुखद और विनाशकारी घटना में जानमाल का भारी नुकसान हुआ।हादसा इतना बड़ा था कि प्लेन के क्रैश होने से सड़क पर भारी मात्रा में मलबा गिरा हुआ, जिसे हटाने का काम जारी है।
तीन दैवी चमत्कार की घटना घटित:-
इस मलबे से एक व्यक्ति का जीवित बच निकलना, श्रीमद्भगवत गीता का सबूत निकलना और भगवान श्रीकृष्ण के लड्डू गोपाल स्परूप की मूर्ति भी सही सलामत सुरक्षित निकलना किसी चमत्कार से कम नहीं है। गीता और लड्डू गोपाल दोनों वस्तुएं विमान में सवार जयश्री पटेल नाम की महिला के हैंडबैग में थीं। जयश्री पटेल इन दोनों को अपने साथ लंदन ले जा रही थीं।
1.लड्डू गोपाल की मूर्ति मिलना चमत्कार
अहमदाबाद में एयर इंडिया का प्लेन क्रैश हादसे के बाद भगवान श्रीकृष्ण के लड्डू गोपाल स्परूप की मूर्ति मिली है। यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो सामने आया है, जिसमें लड्डू गोपाल की मूर्ति दिखाई जा रही है। मृतक जयश्री अरवल्ली जिले के मोडासा स्थित खंभीसर गांव की रहने वाली थी। 3 महीने पहले ही उसकी शादी आकाश से हुई थी।अब वह अपनी पति के पास रहने लंदन जा रही थी, लेकिन रास्ते में हादसे का शिकार हो गई और उसके दो सामान बिना किसी नुकसान के बच निकले।
2.बिना जली मिली भगवत गीता की पुस्तक:-
बीते दिन भगवत गीता मिलने का वीडियो भी सामने आया था।इतनी भयंकर आग लगने के बाद भी पुस्तक को कुछ नहीं हुआ और सभी पेज सुरक्षित हैं। गीता के कवर का कुछ पार्ट जला है, शुरुआत के कुछ पन्ने पर जलने के निशान हैं, लेकिन अंदर के सभी पेज सुरक्षित हैं. साथ ही पुस्तक पर बनी देवी-देवताओं की तस्वीरें भी सुरक्षित रहीं हैं।
भगवद्गीता स्वयं श्री कृष्ण का स्वरूप होता है:-
भगवद्गीता को भगवान श्री कृष्ण का स्वरूप माना जाता है। यह महाभारत के भीष्मपर्व का हिस्सा है और इसमें भगवान कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के दौरान उपदेश दिए थे, जो भगवद्गीता के रूप में प्रसिद्ध हैं। इस ग्रंथ में, कृष्ण को न केवल एक महान योद्धा और मार्गदर्शक के रूप में दिखाया गया है, बल्कि उन्हें परमेश्वर, या भगवान के रूप में भी दर्शाया गया है। उन्हें 'पुरुषोत्तम' या 'परमात्मा' कहा गया है, जो प्रकृति और पुरुष से परे हैं।
भगवद्गीता में श्री कृष्ण को स्वयं भगवान का स्वरूप माना गया है। जिसमें श्रीकृष्ण अर्जुन को उपदेश देते हुए स्वयं को "परम पुरुषोत्तम" बताते हैं। इसके कई श्लोकों में श्रीकृष्ण के दिव्य स्वरूप और उनकी सर्वव्यापी प्रकृति का वर्णन है।वास्तव में भागवत गीता कोई साधारण ग्रंथ नहीं, भगवान श्री कृष्ण ने स्वयं कहा है कि यह मेरा ही स्वरूप है। मैं ही परम तत्व हूं, मेरे अतिरिक्त इस संसार में कोई दूसरा नहीं है। उदाहरण के लिए, अध्याय 10, श्लोक 20 में श्री कृष्ण कहते हैं:-
अहम् आत्त्मा गुडाकेश
सर्वभूताशयस्थितः।
अहं आदिश् च मध्यं च
भूतानां अन्त एव च॥
(अर्थ: हे अर्जुन! मैं ही सब भूतों के हृदय में स्थित आत्मा हूँ, मैं ही सब भूतों का आदि, मध्य और अंत हूँ।)
यह श्लोक बताता है कि श्री कृष्ण न केवल सभी प्राणियों के हृदय में स्थित हैं, बल्कि वे ही सृष्टि के आरम्भ, मध्य और अंत में भी विद्यमान हैं। यह उनकी सर्वव्यापी प्रकृति और भगवान के रूप में उनकी स्थिति को दर्शाता है। गीता में, में भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्ध के मैदान में उपदेश दिए, जो कर्म, ज्ञान, भक्ति और मोक्ष जैसे विषयों पर केंद्रित कर्म योग, ज्ञान योग और भक्ति योग का उपदेश है। गीता को ज्ञान का भंडार माना जाता है, जो जीवन के हर पहलू पर प्रकाश डालता है। यह चरित्र निर्माण का शास्त्र है, जो मनुष्य को सही मार्ग पर चलने और श्रेष्ठ कर्म करने के लिए प्रेरित करता है। इसमें भगवान श्रीकृष्ण ने चार प्रकार के भक्तों का वर्णन किया है और भक्ति का मार्ग भी बताया है। गीता के अध्याय 11 में, कृष्ण अपना विराट रूप, या विश्वरूप, अर्जुन को दिखाते हैं, जिसमें वे ब्रह्मांड और सभी प्राणियों को अपने भीतर समाहित करते हुए दिखाई देते हैं। भगवद्गीता का सार यह है कि कृष्ण स्वयं परम सत्य हैं और उनका अनुसरण करने से व्यक्ति जीवन के दुखों से पार पा सकता है। इसलिए, भगवद्गीता को कृष्ण का स्वरूप माना जाता है क्योंकि इसमें कृष्ण को भगवान के रूप में प्रस्तुत किया गया है और उनके उपदेशों का पालन करके, व्यक्ति आध्यात्मिक ज्ञान और मुक्ति प्राप्त कर सकता है।
3. 242 यात्री में से बचकर निकला एक युवक :-
विमान में सीट नंबर-11ए पर ब्रिटिश नागरिक विश्वाश कुमार रमेश बैठे थे।वह जिंदा बचकर बाहर निकल गए। ये किसी चमत्कार से कम नहीं था। अभी उनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। रमेश ने कहा कि हादसे के समय जोरदार धमाका हुआ, चारों तरफ आग ही आग थी। मैं जिंदा हूं ये किसी करिश्मे से कम नहीं है।
आचार्य डा. राधे श्याम द्विवेदी
लेखक परिचय:-
(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए सम सामयिक विषयों,साहित्य, इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करते रहते हैं।