हिमालय एशिया में स्थित एक सर्वाधिक प्राचीन पर्वत-शृंखला है। इसको 'पर्वतराज' हिमालय भी कहते हैं। कालिदास तो हिमालय को पृथ्वी का मानदंड मानते हैं। हिमालय की पर्वत श्रंखलाएँ शिवालिक कहलाती हैं। सदियों से हिमालय की कन्दराओं (गुफाओं) में ऋषि-मुनियों का वास रहा है और वे यहाँ समाधिस्थ होकर तपस्या करते रहे हैं । हिमालय आध्यात्म चेतना का ध्रुव केंद्र रहा है। हिमालय एक पर्वत तन्त्र है जो भारतीय उपमहाद्वीप को मध्य एशिया और तिब्बत से अलग करता है।
चार श्रेणियों में हिमालय की भू-आकृतियों का विभाजन-
हिमालय पर्वत तन्त्र को तीन मुख्य श्रेणियों के रूप में विभाजित किया जाता है जो पाकिस्तान में सिन्धु नदी के मोड़ से लेकर अरुणाचल के ब्रह्मपुत्र के मोड़ तक एक-दूसरे के समानान्तर पायी जाती हैं। चौथी गौड़ श्रेणी असतत है और पूरी लम्बाई तक नहीं पायी जाती है। यह पर्वत तन्त्र मुख्य रूप से चार समानांतर श्रेणियों में विभक्त है
(क) परा-ट्रांस- हिमालय-
परा हिमालय जिसे ट्रांस हिमालय या टेथीज हिमालय भी कहते हैं, यह हिमालय की सबसे प्राचीन श्रेणी है। यह कराकोरम, लद्दाख और कैलाश श्रेणी के रूप में हिमालय की मुख्य श्रेणियों और तिब्बत के बीच स्थित है।
(ख) महान हिमाद्रि हिमालय
महान हिमालय जिसे हिमाद्रि भी कहा जाता है, हिमालय की सबसे ऊँची श्रेणी है। हिमालय की सर्वोच्च चोटियाँ मकालू, कंचनजंघा, एवरेस्ट, अन्नपूर्ण और नामचा बरवा इत्यादि इसी श्रेणी का हिस्सा हैं। यह श्रेणी मुख्य केन्द्रीय क्षेप द्वारा मध्य हिमालय से अलग है। यद्यपि पूर्वी नेपाल में हिमालय की तीनों श्रेणियाँ एक दूसरे से सटी हुई हैं।
(ग) मध्य लघु हिमालय
हिमालय पर्वत का वह भाग जो महान हिमालय के दक्षिण सामानान्तर तक फैला हुआ है, लघु हिमालय कहलाता है। इस चाप का उभार दक्षिण की ओर अर्थात उत्तरी भारत के मैदान की ओर है और केन्द्र तिब्बत के पठार की ओर है। यह 80 से 100 किलोमीटर चौड़ाई में फैला हुआ है। इसकी औसत ऊँचाई 1628 मीटर से लेकर 3000 मीटर है। इसकी अधिकतम ऊँचाई 4500 मीटर है। यह हिमालय के दक्षिण में स्थित है। महान हिमालय और मध्य हिमालय के बीच दो बड़ी और खुली घाटियाँ पायी जाती है - पश्चिम में काश्मीर घाटी और पूर्व में काठमाण्डू घाटी। जम्मू-कश्मीर में इसे पीर पंजाल, हिमाचल में धौलाधार, उत्तराखंड में मस्सोरी या नागटिब्बा तथा नेपाल में महाभारत श्रेणी के रूप में जाना जाता है।
(घ) परा या ट्रांस हिमालय-
उपरिवर्णित तीन मुख्य श्रेणियों केआलावा चौथी और सबसे उत्तरी श्रेणी को परा हिमालय या ट्रांस हिमालय कहा जाता है जिसमें कराकोरम तथा कैलाश श्रेणियाँ शामिल है। यह शिवालिक से मिलकर बना है जो पश्चिम से पूर्व की ओर एक चाप की आकृति में लगभग 2500 कि॰मी॰ की लम्बाई में फैली हैं। पश्चिम बंगाल और भूटान के बीच यह विलुप्त है। बाकी पूरे हिमालय के साथ समानांतर पायी जाती है। अरुणाचल में मिरी, मिश्मी और अभोर पहाड़ियां शिवालिक का ही रूप हैं। हिमालय पर्वत 7 देशों की सीमाओं में फैला हुआ हैं। ये देश हैं- पाकिस्तान, अफगानिस्तान, भारत, नेपाल, भूटान, चीन और म्यांमार।
प्रादेशिक विभाजन
अनेक भू–वैज्ञानिकों के अनुसार हिमालय को पांच क्षैतिज प्रदेशों में बाँटा है। इनमें चार भारत के हिस्से में और एक नेपाल के हिस्से में फैला हुआ है।
1.कश्मीर हिमालय -
कश्मीर हिमालय गिल्गिट-बल्टिस्तान, कश्मीर घाटी से लेकर हिमाचल प्रदेश तक फैला हुआ है । यह सिंधु नदी से सतलुज नदी के बीच लगभग 560 किलोमीटर लंबाई तक फैला हुआ है। इसकी प्रमुख पर्वत मालाएं जंस्कार और पीर-पंजाल हैं। इसकी सबसे ऊंची चोटी नंगा पर्वत है।सिंधु नदी की पाँचो प्रमुख सहयोगी नदियों का उद्गम स्थल कश्मीर हिमालय से ही होता है। इसकी पाँच सहयोगी नदियां झेलम, रावी, ब्यास, सतलुज और चिनाब हैं।
2.कुमाऊँ हिमालय -
सतलुज से काली नदी (सरयू) के बीच के भाग को कुमाऊं कहा जाता है । यह उत्तरी भारत में स्थित हिमालय पर्वत श्रृंखला का एक प्रमुख प्रादेशिक भाग है। यह पश्चिम में सतलुज नदी से लेकर पूर्व में काली नदी तक लगभग 320 किलोमीटर की लंबाई में फैला हुआ है। मुख्य रूप से उत्तराखंड राज्य में स्थित यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, झीलों और ऊँची चोटियों के लिए प्रसिद्ध है।
3.नेपाल हिमालय-
सरयू नदी से कोसी नदी के बीच के भाग को कहा जाता है। यह हिमालय पर्वत श्रृंखला का सबसे ऊँचा और मध्य-पूर्वी भाग है, जो काली नदी से लेकर तीस्ता नदी तक लगभग 800 किलोमीटर (500 मील) तक फैला हुआ है। दुनिया की 14 सबसे ऊँची चोटियों में से 8 चोटियाँ इसी क्षेत्र में स्थित हैं, जिसमें सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट भी शामिल है।
4.बंगाल हिमालय -
कोसी नदी से मानस नदी के बीच के भाग को कहा जाता है।यह पूर्वी हिमालय का एक प्रमुख उपभाग है जो पश्चिम में कोसी नदी से लेकर पूर्व में मानस नदी के बीच विस्तृत है। यह क्षेत्र अपनी प्राकृतिक सुंदरता, चाय बागानों, समृद्ध जैव विविधता और साहसिक पर्यटन के लिए जाना जाता है।
5.असम हिमालय -
मानस नदी से ब्रह्मपुत्र नदी के मोड़ तक के भाग को कहा जाता है। यह हिमालय पर्वतमाला के उस हिस्से का पारंपरिक नाम है जो पश्चिम में भूटान की पूर्वी सीमा और पूर्व में त्सांगपो नदी के ग्रेट बेंड के बीच स्थित है। इस पर्वतमाला की सबसे ऊँची चोटी नामचा बरवा है । अन्य ऊँची चोटियों में बरवा की सहोदर चोटी ग्याला पेरी , कांगटो और न्येगी कानसांग शामिल हैं । यह क्षेत्र अभी भी सामान्यतः कम ही सर्वेक्षण किया गया है और बाहरी लोगों द्वारा कम ही दौरा किया जाता है। यह पूर्वी भाग में स्थित है। "असम हिमालय" नाम भ्रामक है, क्योंकि इस पर्वतमाला के कुछ भाग दक्षिण-पूर्वी तिब्बत में हैं , जबकि अन्य भाग भूटान और भारत के उत्तरी असम , सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश राज्यों में स्थित हैं ।
100 से ज्यादा सर्वोच्च शिखर
संसार की अधिकांश ऊँची पर्वत चोटियाँ हिमालय में ही स्थित हैं। विश्व के 100 सर्वोच्च शिखरों में हिमालय की अनेक चोटियाँ हैं। विश्व का सर्वोच्च शिखर माउंट एवरेस्ट हिमालय का ही एक शिखर है। हिमालय के कुछ प्रमुख शिखरों में सबसे महत्वपूर्ण सागरमाथा हिमालय, अन्नपूर्णा, शिवशंकर, गणेय, लांगतंग, मानसलू, रॊलवालिंग, जुगल, गौरीशंकर, कुंभू, धौलागिरी और कंचनजंघा है। कुछ प्रमुख शिखरों की ऊंचाई इस प्रकार है :-
माउंट एवरेस्ट : 8848.86 मीटर
के - 2 : 8611 मीटर
कंचनजंघा : 8,586
लहोस्ते : 8,516
मकालू : 8,463
15 हजार से ज्यादा हिमनद-
हिमनद मुख्य रूप से उन ठंडे क्षेत्रों में बनते हैं जहाँ सालों-साल बर्फ गिरती है, लेकिन गर्मियों में उसका पूरा हिस्सा पिघल नहीं पाता। नई बर्फ के जमने के भारी दबाव से पुरानी बर्फ एक कठोर और सघन दानेदार रूप फर्न में बदल जाती है। अंततः, यही संघनित बर्फ पिघलकर ठोस हिमनदीय बर्फ बन जाती है।
हिमालय श्रेणी में 15 हजार से ज्यादा हिमनद हैं जो 12 हजार वर्ग किलॊमीटर में फैले हुए हैं। 72 किलोमीटर लंबा सियाचिन हिमनद विश्व का दूसरा सबसे लंबा हिमनद है।
हिमालय की प्रमुख नदियां -
हिमालयी जल निकासी प्रणाली के बारे में हिमालयी नदी प्रणाली में मुख्य रूप से सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र नदी बेसिन शामिल हैं । इन नदियों में बर्फ पिघलने और वर्षा दोनों से पानी आता है । इस प्रणाली की नदियाँ बारहमासी होती हैं। ये मार्ग हिमालय के उत्थान के साथ- साथ होने वाली अपरदन गतिविधियों द्वारा निर्मित विशाल दर्रों से होकर गुजरते हैं।
हिमालय पर्वतमाला में 19 प्रमुख नदियाँ बहती हैं, जिनमें से कुछ इस प्रकार हैं-
सिंधु और ब्रह्मपुत्र सबसे बड़ी नदियाँ हैं, जिनमें से प्रत्येक का जलग्रहण क्षेत्र पहाड़ों में लगभग 100,000 वर्ग मील अथवा (260,000 वर्ग किमी) में फैला हुआ है। 19 नदियों में से पाँच नदियाँ, जिनका कुल जलग्रहण क्षेत्र लगभग 51,000 वर्ग मील (132,000 वर्ग किमी) है, सिंधु नदी प्रणाली से संबंधित हैं- झेलम , चिनाब , रावी , ब्यास और सतलुज हैं। ये सामूहिक रूप से भारत के पंजाब राज्य और पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के बीच विभाजित विशाल क्षेत्र को परिभाषित करती हैं । शेष नदियों में से नौ नदियाँ अन्य नदियों से संबंधित हैं।
गंगा प्रणाली -गंगा, यमुना , रामगंगा, काली (काली गंडक), करनाली, राप्ती, गंडक , बागमती और कोसी आदि नदियाँ पहाड़ों में लगभग 84,000 वर्ग मील (218,000 वर्ग किमी) क्षेत्र को सिंचित करती हैं।
ब्रह्मपुत्र प्रणाली -
तीन नदियाँ ब्रह्मपुत्र प्रणाली से संबंधित हैं— तीस्ता , रायडक और मानस-जो हिमालय में 71,000 वर्ग मील/ 184,000 वर्ग किमी क्षेत्र को सिंचित करती हैं।
पर्वत श्रृंखलाओं के उत्तर में उद्गम-
हिमालय की प्रमुख नदियाँ पर्वत श्रृंखलाओं के उत्तर में उद्गम करती हैं और गहरी घाटियों से होकर बहती हैं ,जो आम तौर पर किसी भूवैज्ञानिक संरचनात्मक नियंत्रण, जैसे कि भ्रंश रेखा, को दर्शाती हैं। सिंधु नदी प्रणाली की नदियाँ सामान्यतः उत्तर-पश्चिम दिशा में बहती हैं, जबकि गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी प्रणाली की नदियाँ पर्वतीय क्षेत्र से बहते हुए आमतौर पर पूर्व दिशा में बहती हैं।
गहरी खाइयों के अलावा, ये नदियाँ अपने पर्वतीय मार्ग में यू-आकार और वी- आकार की घाटियाँ, तीव्र धाराएँ और झरने भी बनाती हैं। मैदानी इलाकों में, वे समतल घाटियों, घुमावदार जलमार्गों, धनुषाकार झीलों, बाढ़ के मैदानों, गुंथी हुई धाराओं और नदी के मुहाने के पास डेल्टा जैसी निक्षेपण संबंधी संरचनाएं बनाते हैं।
हिमालयी क्षेत्रों में, इन नदियों का मार्ग अत्यधिक घुमावदार होता है, लेकिन मैदानी इलाकों में, वे एक मजबूत घुमावदार प्रवृत्ति प्रदर्शित करती हैं और अक्सर अपना मार्ग बदलती रहती हैं।
कोसी नदी का प्रवाह अस्थिर है और इसमें काफी कटाव होता रहता है, जिसके कारण अंततः इसके प्रवाह में गाद की मात्रा बढ़ जाती है। इसी गाद की वृद्धि के कारण कोसी नदी अक्सर अपना मार्ग बदलती रहती है।कोसी नदी को 'बिहार का दुःख' भी कहा जाता है।
धार्मिक स्थल -
हिमालय की गोद में बसे धार्मिक स्थल अपनी अलौकिक प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक शांति के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध हैं। यहाँ हिंदू, बौद्ध और सिख धर्म के कई प्रमुख तीर्थस्थल स्थित हैं।
1.उत्तराखंड के हिमालयी स्थल:
चार धाम: केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री हिमालय के सबसे पवित्र चार धाम माने जाते है। इनमें हरिद्वार, गोमुख, देव प्रयाग, ऋषिकेश भी आते हैं।
2.कैलाश मानसरोवर (तिब्बत):
हिमालय क्षेत्र में स्थित यह स्थान भगवान शिव का सबसे बड़ा धाम माना जाता है और यह हिंदू, बौद्ध व जैन धर्मों के लिए पवित्र है।
3.हेमकुंड साहिब चमोली:
चमोली ज़िले में स्थित यह सिखों का सबसे ऊँचा और पवित्र गुरुद्वारा है।
4. हिमाचल प्रदेश के हिमालयी स्थल: ज्वाला देवी और कांगड़ा देवी मंदिर हैं जो हिमाचल की घाटियों में स्थित प्राचीन और आस्था के प्रमुख केंद्र हैं।
5.तवांग मठ (अरुणाचल प्रदेश):
हिमालय के पूर्वी छोर पर स्थित, यह भारत का सबसे बड़ा बौद्ध मठ है।
6. नेपाल के हिमालयी स्थल :
पशुपति नाथ मंदिर काठमांडू (नेपाल) में बागमती नदी के किनारे स्थित भगवान शिव का यह मंदिर विश्व प्रसिद्ध है।
7.मुक्तिनाथ मंदिर:
हिमालय क्षेत्र में स्थित यह हिंदुओं और बौद्धों दोनों के लिए एक अत्यंत पवित्र तीर्थस्थल है।
8. जम्मू और कश्मीर के स्थल:
अमर नाथ गुफा: हिमालय की बर्फीली वादियों में स्थित इस गुफा में प्राकृतिक रूप से 'बर्फानी बाबा' (शिवलिंग) बनते हैं।
लेखक
आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,
पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी,
मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8
निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,
आनन्द नगर,कटरा, बस्ती,Pin 272001
उत्तर प्रदेश INDIA
मोबाइल नंबर +91 9412300183
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