Tuesday, January 2, 2018

दुर्गा सप्तशती शक्ति उपासना का सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ - डा. राधेश्याम द्विवेदी

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दुर्गा सप्तशती हिन्दू धर्म का सर्वमान्य ग्रंथ है। इसमें भगवती के कृपा के सुन्दर इतिहास के साथ बड़े बड़े गूढ़ साधन रहस्य भरे हैं।कर्म भक्ति और ज्ञान की त्रिविध मंदाकिनी बहानेवाला यह ग्रंथ भक्तों के लिए वाछाकल्पतरु हैं। सकाम भक्त इसके सेवन से मनोऽभिलिषित दुर्लभतम वस्तु या स्थिति सहज ही प्राप्त करते हैं और निष्काम भक्त परम मोक्ष को पाकर कृतार्थ होते हैं।भुवनेश्वरी संहिता में कहा गया है- जिस प्रकार से 'वेद' अनादि है, उसी प्रकार 'सप्तशती' भी अनादि है। जिस प्रकार योग का सर्वोत्तम ग्रंथ गीता है उसी प्रकार 'दुर्गा सप्तशती' शक्ति उपासना का श्रेष्ठ ग्रंथ माना जाता है। 'दुर्गा सप्तशती' के सात सौ श्लोकों को तीन भागों प्रथम चरित्र (महाकाली), मध्यम चरित्र (महालक्ष्मी) तथा उत्तम चरित्र (महा सरस्वती) में विभाजित किया गया है। प्रत्येक चरित्र में सात-सात देवियों का स्तोत्र में उल्लेख मिलता है प्रथम चरित्र में काली, तारा, छिन्नमस्ता, सुमुखी,भुवनेश्वरी, बाला, कुब्जा, द्वितीय चरित्र में लक्ष्मी, ललिता, काली, दुर्गा, गायत्री, अरुन्धती, सरस्वती तथा तृतीय चरित्र में ब्राह्मी, माहेश्वरी, कौमारी, वैष्णवी, वाराही, नारसिंही तथा चामुंडा (शिवा) इस प्रकार कुल 21 देवियों के महात्म्य व प्रयोग इन तीन चरित्रों में दिए गए हैं। नंदा, शाकम्भरी, भीमा ये तीन सप्तशती पाठ की महाशक्तियां तथा दुर्गा, रक्तदन्तिका व भ्रामरी को सप्तशती स्तोत्र का बीज कहा गया है। तंत्र में शक्ति के तीन रूप प्रतिमा, यंत्र तथा बीजाक्षर माने गए हैं। शक्ति की साधना हेतु इन तीनों रूपों का पद्धति अनुसार समन्वय आवश्यक माना जाता है।

सप्तशती अध्यायों के प्रमुख मंत्र :- सप्तशती के सात सौ श्लोकों को तेरह अध्यायों में बांटा गया है। प्रथम चरित्र में केवल पहला अध्याय, मध्यम चरित्र में दूसरा, तीसरा व चौथा अध्याय तथा शेष सभी अध्याय उत्तम चरित्र में रखे गए हैं। प्रथम चरित्र में महाकाली का बीजाक्षर रूप ॐ 'एं है। मध्यम चरित्र (महालक्ष्मी) का बीजाक्षर रूप 'ह्रीं' है।  तीसरे उत्तम चरित्र महासरस्वती का बीजाक्षर रूप 'क्लीं' है। अन्य तांत्रिक साधनाओं में 'ऐं' मंत्र सरस्वती का, 'ह्रीं महालक्ष्मी का तथा 'क्लीं' महाकाली बीज है।  तीनों बीजाक्षर ऐं ह्रीं क्लीं किसी भी तंत्र साधना हेतु आवश्यक तथा आधार माने गए हैं। तंत्र वेदों से लिया गया है ऋग्वेद से शाक्त तंत्र, यजुर्वेद से शैव तंत्र तथा सामवेद से वैष्णव तंत्र का अविर्भाव हुआ है यह तीनों वेद तीनों महाशक्तियों के स्वरूप हैं तथा यह तीनों तंत्र देवियों के तीनों स्वरूप की अभिव्यक्ति हैं। 

मां दुर्गा के विविध मंत्र :- नवरात्र के समय दुर्गा सप्तशती मन्त्र का पाठ करने से आपकी हर समस्या ख़त्म हो जाएगी| किसी भी प्रकार की मुश्किल या परेशानी से निपटने के लिए अलग विशेष मंत्र होते हैं | ये मंत्र काफी लाभदायक होते हैं और जल्द ही कारगर साबित होते हैं| अगर आप मंत्रों का उच्चारण सही से नहीं कर पाएं तो आप एक अच्छे व योग्य ब्राह्मण से इन मंत्रों का जाप करवा सकते हैं। इसीलिए आज हम आपको बताएंगे दुर्गा जी का बीज मंत्र जिसका पाठ करने से आपके जीवन में अत्यंत सकर्रातमकता आएगी व साथ ही आप के जीवन की साड़ी समस्याएं भी खत्म हो जाएंगी| उन्होने महिषासुर नामक असुर का वध किया। हिन्दू ग्रन्थों में वे शिव की पत्नी पार्वती के रूप में वर्णित हैं. हिन्दू धर्म के देव ग्रंथों के अनुसार माता दुर्गा की उपासना के लिए आठ अक्षरों का 1 अद्भुत मंत्र है। ' ह्रीं दुं दुर्गायै नम:'. यह आठ अक्षरों का भगवती दुर्गा का सिद्धि मंत्र है जिसका पाठ रक्तचन्दन की 108 दाने की माला से प्रतिदिन शुद्ध अवस्था में करना चाहिये। माता अवश्य प्रसन्न होंगी और आशीर्वाद देंगी और आपकी सभी मुश्किलें दूर करेंगी। यहाँ आप कई प्रकार के माँ दुर्गा के मंत्र पा सकता है जिससे आप कई मुसीबतों से बाहर  सकते है अपने जीवन में। पूर्ण श्रद्धा से किया गया मंत्र उच्चारण फल अवश्य देता है 
1. सर्व सिद्धिः दुर्गा मंत्र:-  उपयुक्त इच्छा को पूरा करने के लिए दुर्गा मंत्र यह मंत्र सभी प्रकार की सिद्धिः को पाने में मदद करता है, यह मंत्र सबसे प्रभावी और गुप्त मंत्र माना जाता है और सभी उपयुक्त इच्छाओं को पूरा करने की शक्ति इस मंत्र में होती है।
ह्रीं दुं दुर्गायै नम:
2. सुंदर ,बुद्धि समृद्धि दुर्गा मंत्र:-   यह देवी माँ का बहुत लोकप्रिय मंत्र है। यह मंत्र देवी प्रदर्शन के समारोहों में आवश्यक है। दुर्गा सप्तशती प्रदर्शन से पहले इस मंत्र को सुनाना आवश्यक है।इस मंत्र की शक्ति : यह मंत्र दोहराने से हमें सुंदरता ,बुद्धि और समृद्धि मिलती है। यह आत्म की प्राप्ति में मदद करता है।
" अंग ह्रींग क्लींग चामुण्डायै विच्चे "

बीज मंत्र क्या है :- बीज मंत्र एक मंत्र का सबसे छोटा रूप है, जो की अलग-अलग देवताओं के लिए होता है| माँ दुर्गा मंत्र का बीज मंत्र, जब एक साथ पठित किया जाता है तो मनुष्य को बहुत सारी सकारात्मक ऊर्जा और सभी देवताओं के आशीर्वाद मिलते हैं। दुर्गा सप्तशती बीज मंत्र साधना से आपके जीवन से सारी परेशानियां मिट जाती हैं| माँ दुर्गा का बीज मंत्र -तंत्र शास्त्र के अनुसार, किसी भी नवरात्रि में यदि दुर्गा सप्तशती के मंत्रों का जाप विधि-विधान से किया जाए तो साधक की हर परेशानी दूर हो सकती है। दुर्गा सप्तशती में हर समस्या के लिए एक विशेष मंत्र बताया गया है। ये मंत्र बहुत ही जल्दी असर दिखाते हैं, यदि आप मंत्रों का उच्चारण ठीक से नहीं कर सकते तो किसी योग्य ब्राह्मण से इन मंत्रों का जाप करवाएं, अन्यथा इसके दुष्परिणाम भी हो सकते हैं। दुर्गा सप्तशती के सिद्ध चमत्कारी मंत्र इस प्रकार हैं| इनको विधि पूर्ण तरीके से करने से आपकी सारी परेशानी खत्म हो जाती हैं| मंत्र जाप की विधि इस प्रकार है-

जाप विधि :- सुबह जल्दी उठकर साफ वस्त्र पहनकर सबसे पहले माता दुर्गा की पूजा करें। इसके बाद अकेले में कुशा (एक प्रकार की घास) के आसन पर बैठकर लाल चंदन के मोतियों की माला से इन मंत्रों का जाप करें।इन मंत्रों की प्रतिदिन 5 माला जाप करने से मन को शांति तथा प्रसन्नता मिलती है। यदि जाप का समय, स्थान, आसन, तथा माला एक ही हो तो यह मंत्र शीघ्र ही सिद्ध हो जाते हैं।
सुंदर पत्नी के लिए मंत्र
पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम।।
गरीबी मिटाने के लिए
दुर्गे स्मृता हरसि भीतिमशेषजन्तो: स्वस्थै: स्मृता मतिमतीव शुभां ददासि।
दारिद्रयदु:खभयहारिणि का त्वदन्या सर्वोपकारकरणाय सदाद्र्रचिता।।
रक्षा के लिए
शूलेन पाहि नो देवि पाहि खड्गेन चाम्बिके। घण्टास्वनेन : पाहि चापज्यानि:स्वनेन च।।
स्वर्ग और मुक्ति के लिए
सर्वस्य बुद्धिरूपेण जनस्य हदि संस्थिते। स्वर्गापर्वदे देवि नारायणि नमोस्तु ते।।
मोक्ष प्राप्ति के लिए
त्वं वैष्णवी शक्तिरनन्तवीर्या विश्वस्य बीजं परमासि माया।
सम्मोहितं देवि समस्तमेतत् त्वं वै प्रसन्ना भुवि मुक्तिहेतु:।।
सपने में सिद्धि-असिद्धि जानने का मंत्र
दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके। मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय।।
सभी के कल्याण के लिए मंत्र
देव्या यया ततमिदं जगदात्मशक्त्या निश्शेषदेवगणशक्तिसमूहमूत्र्या।
तामम्बिकामखिलदेवमहर्षिपूज्यां भकत्या नता: स्म विदधातु शुभानि सा : ।।
भय नाश के लिए
यस्या: प्रभावमतुलं भगवाननन्तो ब्रह्मा हरश्च हि वक्तुमलं बलं च।
सा चण्डिकाखिलजगत्परिपालनाय नाशाय चाशुभभयस्य मतिं करोतु।।
रोग नाश के लिए
रोगानशेषानपहंसि तुष्टा रुष्टा तु कामान् सकलानभीष्टान्
त्वामाश्रितानां विपन्नराणां त्वामाश्रिता ह्याश्रयतां प्रयान्ति।।
बाधा शांति के लिए
सर्वाबाधाप्रशमनं त्रैलोक्यस्याखिलेश्वरि। एवमेव त्वया कार्यमस्मद्वैरिविनासनम्।।
विपत्ति नाश के लिए मंत्र
देवि प्रपन्नार्तिहरे प्रसीद प्रसीद मातर्जगतोखिलस्य।
प्रसीद विश्वेश्वरी पाहि विश्वं त्वमीश्वरी देवि चराचरस्य।।
गौरी मंत्र लायक पति मिलने के लिए 
हे गौरी शंकरधंगी ! यथा तवं शंकरप्रिया, तथा मां कुरु कल्याणी ! कान्तकान्तम् सुदुर्लभं
सब प्रकार के कल्याण के लिये दुर्गा मंत्र 
सर्वमङ्गलमङ्गल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके।  शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
आकर्षण के लिए दुर्गा मंत्र 
क्लींग ज्ञानिनामपि चेतांसि देवी भगवती ही सा, बलादाकृष्य मोहय महामाया प्रयच्छति
विपत्ति नाश के लिए दुर्गा मंत्र 
शरणागतदीनार्तपरित्राणपरायणे।  सर्वस्यार्तिहरे देवि नारायणि नमोऽस्तु ते॥
शक्ति प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्र 
सृष्टिस्थितिविनाशानां शक्ति भूते सनातनि।  गुणाश्रये गुणमये नारायणि नमोऽस्तु ते॥
आरोग्य और सौभाग्य की प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्र 
देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।  रूपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥
भय नाश के लिए दुर्गा मंत्र 
सर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्ति समन्विते। भयेभ्याहि नो देवि दुर्गे देवि नमोऽस्तु ते॥
महामारी नाश के लिए दुर्गा मंत्र 
जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥
पाप नाश के लिए दुर्गा मंत्र 
हिनस्ति दैत्यतेजांसि स्वनेनापूर्य या जगत्। सा घण्टा पातु नो देवि पापेभ्योऽन: सुतानिव॥
भुक्ति-मुक्ति की प्राप्ति के लिए दुर्गा मंत्र 
विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्। रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि
हर तरह के भय एवं संकट से आपकी रक्षा के लिए
रक्षांसि यत्रोग्रविषाश्च नागा यत्रारयो दस्युबलानि यत्र |दावानलो यत्र तथाब्धिमध्ये तत्र स्थिता त्वं परिपासि विश्वम् ||
विघ्नों के नाश, दुर्जनों शत्रुओं को मात अहंकार के नाश के लिए दुर्गा गायत्री मंत्र 

गिरिजायै विद्महे शिव धीमहि तन्नो दुर्गा प्रचोदयात् ||

Monday, January 1, 2018

नववर्ष का संकल्प गरीबों की सेवा डा. राधेश्याम द्विवेदी

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ऊर्जा का नवीनीकरण :- 2018 का नया साल आ गया। नववर्ष हम सभी के लिए नई उमंगे, नया उत्साह लेकर आता हैं। हमें एक नया वादा अपने आपसे करना चाहिए कि हम अपने माता-पिता, अध्यापक, मालिक-सेवक,छोटे-बड़े भाई-बहन, दादा-दादी, नाना-नानी, मित्र-पड़ोसी, प्रकृति-पशु-पक्षी एवं अन्य सभी से दोस्ती व सदाशयता बनाए रखेंगे और सभी का सदैव ध्यान भी रखा करेंगे। आज हर किसी के परिवार में जीवन यापन के लिए सुख सुविधाओं की भरमार है लेकिन गरीब और असहायों को पूछने वालों की कमी आ चुकी है। नए साल की शुरुआत के अवसर पर अपनी ऊर्जा का नवीनीकरण करने और कुछ पुरानी इच्छाओं और संकल्पों को पूरा करने का बढ़िया मौका है। स्वास्थ्य, परिवेश में व्यवस्था, कोई नया और सुरुचिपूर्ण काम, आर्थिक नियोजन, और ऐसे ही बहुत से मोर्चों पर लोग कुछ-न-कुछ नया करने का सोच-विचार करते हैं। नया साल जिंदगी को बुहारने-चमकाने का बेहतरीन बहाना है।
सदाचार का पालन :- हम यह प्रण ले कि हम एक साल तक किसी को रिश्वत नहीं देंगे। हमारे द्वारा ट्रैफिक के नियमों का ठीक से पालन करने पर जीवन में बदलाव आ सकता है। अगर हम न घूस लेते हैं और न ही किसी को देते हैं, तो हम हर भ्रष्ट राजनेता या सरकार की आंख में आंख डालकर हम कह सकते हैं कि ‘मैं एक व्यक्ति के रूप में आपसे बेहतर हूं।’ हम दूसरे समुदायों के लोगों के बारे में अभद्र बातें नहीं करेंगे। हम गरीबों के साथ ऐसा व्यवहार नहीं करेंगे जैसे कि उनका कोई अस्तित्व ही न हो । हम यथासंभव उनकी मदद करने की कोशिश करेंगे। हमें अपने घर की खिड़की पर चिडियों के लिए दाना-पानी रखना चाहिए। अपने पड़ोस में मौजूद हर पेड़ को बचाने के लिए संघर्ष करना चाहिए।  हम यह प्रण ले सकते कि हम सीढियों पर या लिफ्ट में पान चबाकर नहीं थूकेंगे या भीड भरी ट्रेनों या बसों में महिलाओं के साथ छेडखानी नहीं होने देंगे।
उद्देश्य :- संसार में जितने भी उत्सव, पर्व और शुभ दिन हैं, उन सबका मूल उद्देश्य हमारी जड़ता को तोड़कर उसे गतिशील बनाना होता है। ये पल हमारी एकरसता को भंग करके उनमें एक नया रंग भरते हैं, ताकि हमारी आंतरिक ऊर्जा अपने पूरे जोशोखरोश के साथ अपने काम में लग सके। आज हमारे लिए उत्सव अंधविश्वासों का पालन करने तथा त्यौहार खाने-पीने और खरीददारी करने तक सीमित  रह गये हैं। नया साल भी लगभग इसी में शामिल हो गया है। शुभकामनाएँ देने और खा-पीकर, मौज-मस्ती करने तक सीमित हो गया है । यदि इस मौज-मस्ती से अपने में नई ऊर्जा का संचार नहीं होता, तो हमको समझ लेना चाहिए कि हमारे लिए नया वर्ष मनाना व्यर्थ है।
नए का अर्थ :- नए का अर्थ सब कुछ नया है। जिस प्रकार साँप अपनी केंचुली छोड़कर एक नया आवरण धारण करता है, बिल्कुल उसी तरह नये साल में हमें भी अपनी जड़-मानसिकता को छोड़कर नई मानसिकता अपनानी चाहिए। हमारे यहाँ होली के त्यौहार की तरह नए वर्ष को बड़े अच्छे ढंग से व्यक्त करना चाहिए। होलिका दहन में लोग अपने घर का कूड़ा-कचरा डाल देते हैं। जो कुछ भी पुराना और जो व्यर्थ हो चुका होता, उसको जलाकर नष्ट किया जा सकता है, ताकि नए के लिए जगह निकल सके। नए वर्ष को इसी रूप में लेंना चाहिए। जीवन किसी किराये के घर जैसा है। हम यहाँ स्थाई रूप से नहीं रह सकते। एक न एक दिन हमें यहाँ से निकाल दिया जायेगा। यदि हम किराये के घर में रहते हुए, कहीं अपना घर बनाने लगें,उससे भी बड़ा, उससे भी सुन्दर तो फिर किराये के घर को छोड़ते समय हमारे मन में कोई कष्ट नहीं होगा। बल्कि हम खुश होंगे। किन्तु यदि हमने अपना स्थाई निवास नहीं बनाया तो हम चिन्ता में पड़ जायेंगे कि अब मैं कहाँ जाऊँगा? ठीक इसी प्रकार, हमें भी किराये के घर अर्थात् इस देह को छोड़ कर अपने सच्चे घर, अपनी आत्मा की ओर प्रस्थान करने के लिए तत्पर रहना चाहिए। इस जगत के साथ बनाई हुई हर आसक्ति हमारे मनोबल को थोड़ा कम कर देती है। शुरू-शुरू में भले ही हमें लगे कि यह तो छोटा-मोटा सम्बन्ध है, इसमें कोई ड़र नहीं है। ज्यों-ज्यों यह राग बढ़ता है, हम स्वयं को इसका दास बनता महसूस करते हैं। परमात्मा से सम्बन्ध कुछ और तरह का होता है। परमात्मा में विश्वास होने से प्रेम व करुणा जैसे गुणों में वृद्धि होती है। हम मधुर वचन बोलने लगते हैं तथा सत्कर्म करने लग जाते हैं। परमात्मा या गुरु से अनुराग हो तो इस जगत की पराधीनता कम हो जाती है और हम स्वावलम्बी बन जाते हैं।
नव-वर्ष को पावन दिवस जैसा मनाएं :- पुराने जमाने में, नव-वर्ष को पावन दिवस माना जाता था। लोग मंदिरों,मस्जिदों, चर्चों व गुरुद्वारों में जा कर, अपने कल्याण हेतु प्रार्थना-सभा आदि में भाग लेते थे और सत्कर्म करने के लिए शक्ति-याचना करते थे। अनाथालय व बृद्धाश्रम में जाकर दरिद्र-नारायण के मुख में भोजन के दो-चार ग्रास खिलाते तथा अन्य दान-धर्म करने के लिए इस शुभ दिन चयन करते थे। आज इस दिन की पवित्रता लुप्त हो गई है और शराब पी कर, नाचने-गाने का अवसर होकर रह गया है। जब लोग इसका सही अर्थ भूल कर, खोखला उत्सव मनाते हैं तो वो छिलके खाकर फल को फेंक देने जैसी बात करते हैं। जो संस्कार हमें मनुष्य बनाते हैं उन्हें हमें भुलाना नहीं चाहिए। हमारे मन में नयेपन और आशा की भावना का निर्माण होता है। यदि हम निरंतर अपने तथा जगत के कल्याण-कार्यों में लगे रहते हैं तो हमें नयेपन, जोश और उत्साह का प्रतिक्षण अनुभव होता है। इसलिए हमें चाहिए कि हम वर्तमान का सदुपयोग करें और आज का काम कल पर न टालकर पूरी तरह से सद्कर्म करने में लग जाएँ। जगत को प्रेम तथा आनन्द सहित देखने का प्रयत्न करें।
हर्षोल्लास का पर्व :- नव-वर्ष का आगमन सदा हर्षोल्लास का अवसर होता है, जो हम सबके दिलों में आशा तथा उत्साह का संचार करता है। परमात्मा से प्रार्थना है कि नए वर्ष में समस्त विश्व के लोगों में भरपूर शान्ति, सद्भाव व समृद्धि बनी रहे। पिछले वर्ष में बहुत सी दुखद घटनाएँ घटित हुईं। सौकड़ो लोग आतंकवादियों की गोलियों के शिकार हुए। इन दुःखद घटनाओं के बाद सम्भलना और इतने दुःख में खुश रहना आसान नहीं होता। उदास रहना भी तो कोई समाधान नहीं है। आशा का दामन छोड़ देने पर तो हम किसी परकटे पंछी जैसे हो जायेंगे। जिस प्रकार एसा पंछी उड़ान नहीं भर पाता, ठीक उसी प्रकार हम भी जीवन के आकाश में ऊँचे नहीं उड़ पाएंगे। हमें अपने मनोबल को टूटने नहीं देना चाहिए।  लक्ष्य के प्रति हमारे मन में प्रेम होगा तो आगे बढ़ते रहने तथा लक्ष्य की प्राप्ति की प्रेरणा मिलेगी। पीड़ा में हम कमजोर नहीं पड़ेंगे और मिठास बनी रहेगी। बच्चे के साथ प्यार और उसे बाँहों में लेने की भावना ही है, जो एक माँ को प्रसव-काल तक बच्चे का बोझ उठाये रखने और प्रसव की भारी पीड़ा सहने की शक्ति प्रदान करती है। लक्ष्य के प्रति हमारा प्रेम ही, हमें सब विघ्न-बाधाओं का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है। नया वर्ष याद दिलाता है कि इस दुनियाँ में हमने एक साल और गंवा दिया और अब मेल-मिलाप में एक साल और कम हो गया है। मृत्यु तो अवश्यम्भावी है एक न एक दिन जरूर आएगी । यदि हमने आध्यात्मिकता को भली प्रकार से जाना है तो हमें जरा भी डर महसूस नहीं होगा। हम हर चीज को सही-सही देख सकेंगे।
जीवन के लक्ष्य:- किसी पौधे का जीवन तब परिपूर्ण होता है जब वह अंकुरित होता है, फूलता-फलता है। जब एसा होता है तो इसकी सुन्दरता का लाभ सारे विश्व को होता है। सच तो यह है कि जब यह मुरझाता भी है, तब भी मिट्टी और आगामी पीढ़ियों को पोषण देता है। हम प्रार्थना करें कि हमारे जीवन से भी यूं ही सब लाभान्वित हों। यदि हम सार्थक जीवन जीना चाहते हैं तो इन छ: चीजों का ध्यान रखना चाहिए -
1. दूसरों की सहायता का अवसर न गंवाएं :- दूसरों की सहायता करने से केवल उन्हीं के दिलों को नहीं, हमें भी खुशी मिलती है। उदाहरण के लिए, यदि हम किसी अनाथ बच्चे को खाना खिलाएं तो बच्चे की भूख तो शांत होगी ही, हम उसके चेहरे पर प्रसन्नता के दर्शन भी कर सकेंगे। उस बच्चे की प्रसन्नता को देख कर, हमें बहुत संतोष होगा।
2. कठोर शब्दों से परहेज :- नए वर्ष में हम किसी के साथ कठोर शब्दों का प्रयोग न करें। किसी की निन्दा न करें। सब से प्रेम मोहब्बत से पेश आएं। कठोर शब्दों से हमारे मन तथा दूसरों की शान्ति भंग होती है।
3. साधना जारी रखें :-  मन्त्र-जप तथा ध्यानाभ्यास जैसी अपनी साधनाओं को एक दिन के लिए भी न छोड़े। इसे निरन्तर जारी रखें। इन दैनिक साधनाओं द्वारा अन्तःकरण में रोजाना जमने वाले मल की शुद्धि होती है और उत्साह एवं शान्ति प्राप्त होते हैं।
4. सत्संग में भाग लें :- थोड़ी देर ही सही, किन्तु प्रतिदिन सत्संग करने का प्रयास करें। शास्त्रों का अध्ययन तथा महात्माओं का सान्निध्य आदर्श सत्संग हैं। ऊल-जलूल सांसारिक बातों में हम समय बर्बाद कर देते हैं। उसी समय का सदुपयोग, हम प्रेरणादायक पुस्तकें पढ़ने में करें।
5. अन्तःरण की शुद्धि करते रहें :- गुरु या परमात्मा से प्रतिदिन अन्तःकरण की शुद्धि तथा सत्कर्म करने हेतु शक्ति के लिए हार्दिक प्रार्थना करें। साधना में प्रगति चाहिए तो विनम्रता व भक्तिभाव बहुत आवश्यक हैं। हमें विनम्र बनने का व्रत ले लेना चाहिए क्योंकि विनम्रता होगी तो हम सहज ही कृपा के पात्र बन जायेंगे।

6. सदा मुस्कुराते रहें :- परमात्मा ने हम सबको चेहरा प्रदान किया है। अब उसके माध्यम से प्रेम या क्रोध अभिव्यक्त होता है , वह हम पर निर्भर करता है। यदि हम सदा मुस्कुराते रहेंगे तो बाकी लोग भी हमारे साथ मुस्कुरा उठेंगे। हमारे अंदर यदि प्रेम व शान्ति होगी तो दूसरों में भी यही भाव जागृत होंगे। फिर सारा वातावरण ही आनन्द से भर जायेगा। इस प्रकार, इस नए वर्ष में हम अपने परिवार, अपने देश और विश्व के फलने-फूलने में प्रेमपूर्वक अपना सहयोग दे सकेंगे। इसी प्रार्थना के साथ हम नए वर्ष में प्रवेश करें।