Showing posts with label राम सुमिरन पाण्डेय 'सुमन'/बस्ती के छंदकार. Show all posts
Showing posts with label राम सुमिरन पाण्डेय 'सुमन'/बस्ती के छंदकार. Show all posts

Tuesday, January 28, 2025

पण्डित राम सुमिरन पाण्डेय 'सुमन’ बस्ती के छंदकार भाग 3 (कड़ी 10)

पण्डित राम सुमिरन पाण्डेय 'सुमन’
बस्ती के छंदकार भाग 3 (कड़ी 10)
लेखक : डा. मुनि लाल उपाध्याय 'सरस' 
संपादक : आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी 
जीवन परिचय 
पण्डित राम सुमिरन पाण्डेय 'सुमन’ जी का जन्म अश्विन शुक्ल त्रयोदशी सम्बत 1983 विक्रमी को ग्राम गढ़ा तहसील हर्रैया जिला बस्ती में हुआ था। इनके पिता का नाम पण्डित काशीप्रसाद पाण्डेय और माता का नाम श्रीमती सीतापत्ति देवी था। साहित्यरत्न की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद 1946 में जिला परिषद बस्ती के विभिन्न प्राथमिक स्कूलों मे सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत रहे हैं । सुमन जी गीतकार और कवि के रूप में बस्ती के कवि मंडली में अपना उच्च स्थान रखते हैं। ये चतुर्थ चरण के विकस में नवोदित छन्दकार के रूप में अपना प्रयास कर रहे हैं। इनके अधिकांशत: छन्द अव्यवस्थित रूप से इनकी डायरियो में देखे गये। इनके छंदों में ब्रजभाषा और बड़ी बोली का मिश्रण अधिक पाया जा रहा है।अधिकांश छन्द केवल तुकबन्दी तक ही सीमित है। दो छन्द यहाँ प्रस्तुत हैं- 
उक्त लीलार लाल उषा सी बनी ठनी सी, 
मोहिनी यो सोहनी ललित लाल सारी है।
कांति के किरन को बिखेरती बिखेरती सी 
चली ताप दाप लै तिमिर तपहारी है।।
कोक लोक शोक से विशोक ओक से भरे 
ग्रीष्म दुपहरी त्रिषा मृगवारी है।
यौवन आगार भार बनी है उदार हार 
सुमन सी चेतना विराट रूपधारी है।।
     मनहरन के अतिरिक्त सुमन ली ने दर्जनो सवैया छन्द लिखे हैं किन्तु भावो की आकुलता होते हुए भी शिल्प की शिथिलता से ये छन्द अत्यन्त शिथिल हो गये हैं। एक छन्द और प्रस्तुत है- 
रुप अमन्द चसै मकरन्द 
वे घूंघट के पट ओट लुकाई।
नैनन की अरुनी बरुनी 
न झपै न कपै नवलेह ढीठाई। 
चाह पराग विराग लिये 
अनुराग़ के राग में राग़ बसाई।
नेह निराश कबहूं न करें 
ललना पलना मधुमास जो छाई।।
       सुमन जी आधुनिक चरण के बहु चर्चित छंदकार हैं। अपने छन्दों से काव्य सृजन में भी हुए ये बड़े उल्लासी व्यक्ति हैं।
भविष्य में इनके छन्दो में अच्छा निखार आयेगा और ये सहृदय समाज द्वारा अपने कृतित्व के अनुसार बहु प्रशंसित होंगे।