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Friday, November 19, 2021

नोवा हॉस्पिटल बस्ती में विविध रोगों का इलाज शुरू

नोवा हॉस्पिटल बस्ती में विविध रोगों का इलाज शुरू
नोवा हॉस्पिटल बस्ती में अस्थि हड्डी रोगों की विशेषज्ञता के साथ विविध रोगों का इलाज शुरू हो गया है .अस्थि रोग के लिए विशेष रूप से समर्पित बस्ती का नोवा हॉस्पिटल बस्ती में पूर्वांचल उत्तर प्रदेश में अपना विशेष स्थान बना लिया है.
अस्थि रोग (Diseases of Bone) 
अस्थि रोग, मानव हड्डियों को प्रभावित करने वाली कोई भी बीमारी या चोट होती है. जो मानव को प्रभावित करती है. अस्थि रोग या हड्डियों के रोग और चोटें मानव कंकाल प्रणाली के असामान्यताओं के प्रमुख कारण हैं. हालांकि शारीरिक चोट, फ्रैक्चर का कारण बनती है, यह चोट बीमारी का रूप ले लेती है और इंसान पर हावी हो जाती है. फ्रैक्चर हड्डियों की बीमारी के कई सामान्य कारणों में से एक है.
हड्डी की बीमारियों और चोटों को पहले ज्यादा मैकेनिकल माना जाता था न की मेटाबोलिक. हड्डी के बारे में मैकेनिकल और रासायनिक तौर पर बेहतर समझ, एक अधिक एकीकृत जैविक दृश्य को अनुमति देती है और हड्डी से जुड़ी हुई बीमारियों की अच्छी समज आती है ताकि समय से इलाज कराया जा सके.
विभिन्न प्रकार के अस्थि रोग (Diseases of Bone)
1. ओस्टियोमलेशिया एवं रिकेट्स (Osteomalacia and Rickets)
एक व्यस्क व्यक्ति को प्रतिदिन एक ग्राम कैल्शियम तथा 400-800 IU विटामिन-डी की जरुरत होती है. अस्थि के कैल्सीफिकेशन के लिए विटामिन-D की आवश्यकता होती है जो आंत से कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाता है. वयस्कों में कैल्शियम तथा विटामिन-D की कमी से, विशेषकर स्त्रियों में अस्थिम्रदुता (Osteomalacia) नामक रोग हो जाता है. जबकि बच्चों में इसके अभाव के कारण सूखा रोग (Rickets) हो जाता है.
2. ओस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis)
‘आस्टियो’ का अर्थ होता है ‘अस्थि’ तथा ‘पोरस’ का ‘मुलायम’ या ‘छिद्रयुक्त’.  ‘ओस्टियोपोरोसिस’ अस्थि ढांचे का ऐसा रोग है, जिसमें अस्थि सघनता के कम होने एवं अस्थिमज्जा की संरचना के ह्रास से हड्डियाँ कमजोर हो जाती हैं तथा उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है. इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि ओस्टियोपोरोसिस अस्थि पुननिर्माण प्रक्रिया से सम्बद्ध रोग है जिसमें अस्थियों का क्षय उनके निर्माण की तुलना में अधिक तीव्रता से होता है.
इस रोग में सम्पूर्ण कंकाल विशेषत: मेरुदण्ड प्रभावित होता है तथा कुब्जता (Kyphosis) की दशा प्रकट हो जाती है. ‘ बोन densitometer (हड्डी सघनता जांच-यंत्र) की सहायता से अस्थि-खनिज सघनता की जांच करने के पश्चात ओस्टियो- पोरोसिस की पहचान की जा सकती है. इसके उपचार के निमित डाक्टर की सलाह से विटामिन-डी एवं कैल्शियम का सेवन करना चाहिए.
3. सन्धि शोथ या गठिया (Arthritis)
एक अथवा अनेक सन्धियों का शोथ सन्धि-शोथ (Arthritis) कहलाता है. यह किसी भी आयु के व्यक्ति में पाया जा सकता है. परन्तु सामान्यत: प्रौढ़ तथा वृद्ध व्यक्तियों में अधिक होता है. यह दो प्रकार का होता है: ऑस्टियो और रयूमेटायड अर्थराइटिस.
रयूमेटायड अर्थराइटिस एक प्रकार का polyarthritis  है जो bilateral  तथा सममित (Symmetrical) होता है. सर्वप्रथम यह शोध हाथ व अंगुलियों की लघु संधियों को प्रभावित करता है.
ऑस्टियो अर्थराइटिस एक प्रगामी (Progressive) रोग है जो प्रौढ़ावस्था व वृद्ध अवस्था में पाया जाता है. सामान्यत: यह अस्थि में केवल एक बड़े जोड़ को प्रभावित करता है.
अर्थराइटिस की स्थिति में रोगी को आराम की सलाह दी जाती है. औषधियों में एस्पिरिन या सस्टेरॉयड के प्रयोग की आवश्यकता पड़ती है. भौतिक चिकित्सा द्वारा संधि की गतियों को बनाये रखना जरुरी है. रोगियों को मोटापे पे नियंत्रण रखना चाहिए.
4. वैस्कुलर निक्रोसिस
सामान्यत: बुढ़ापा आने का प्रारंभ जोड़ों के दर्द से ही होता है. यह एक ऐसी ही बिमारी है, जो जोड़ो में तीखे दर्द के कारण रोगी को एक तरह से अपाहिज ही बना देती है. यदि इस रोग की चिकित्सा अच्छी तरह से नहीं की गई, तो यह कुल्हे के अर्थराइटिस में परिवर्तित हो जाता है. फलत: रोगी का चलना-फिरना अत्यंत कठिन हो जाता है.
इस रोग का अंतिम इलाज जोड़ो के बदलाव के लिए की जाने वाली शल्य-चिकित्सा को ही माना जाता है. इससे कुल्हे को लाइलाज स्थिति तक पहुँचने से बचाने में सफलता मिल जाती है. कई शोध-अध्ययनों से पता चला है कि इस रोग के उपचार में ‘विसफोसफोनेट्स’ नामक औषधि काफी प्रभावी सिद्ध हुई है. इसका सेवन विशेषज्ञ-चिकित्सक की देख-रेख में ही करना चाहिए. इस इलाज से मरीज को अब ऑपरेशन की जरुरत नहीं है.
इस क्षेत्र में तमाम लोग एसे भी आते हैं जो किसी अन्य चिकित्सक से इलाज या आपरेशन के बावजूद सही नही हुए हैं. एसे बिगड़े केसों को भी सुधारा जाता है. पहले दवा द्वारा और ना सुधर पाने पर आपरेशन द्वारा सुधारने की व्यवस्था है.
अस्थि के अलावा दर्जनों रोगों के चिकित्सा और निदान भी इस हॉस्पिटल के कुशल चिकित्सकों द्वारा किया जाता है. इस हॉस्पिटल में मानव जीवन से सम्बन्धित प्रायः हर रोग के निदान की व्यवस्था है. इनमें कुछ के नाम दर्शाए जा रहे हैं.नार्मल एवम मेजर आपरेशन कुशल चिकित्सकों द्वारा सम्पन्न होता है. माता और बहनों के शिशुओ की नार्मल और आपरेशन डिलेवरी से जनने को सुविधा उपलब्ध है. इसके साथ ही कुशल चिकित्सकों की टीम द्वारा जनरल और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी द्वारा निम्न रोगों का निदान भी होता है. हर्निया हाइड्रोसील पाइल्स कृस्टूला (भगंदर) एवम फिसर की चिकित्सा वा आपरेशन होता है.
बच्चों के हर्निया और हाइड्रोसील मूत्र एवम पथरी रोग की चिकित्सा वा आपरेशन होता है. पित्ताशय की पथरी एपेंडिक्स आंतों के रोग एवम कैंसर का इलाज होता है.गुदा द्वारा आंत का बाहर निकलने के दवा होती है. घेंघा रोग लार ग्रंथियों की गांठ की चिकित्सा वा आपरेशन होता है.बच्चेदानी (गर्भाशय) की समस्या को दूर किया जाता है. स्तन गांठ एवम स्तन कैंसर एवम छाती के रोग का इलाज होता है. इसके अलावा अन्य सभी प्रकार के आपरेशन सम्बन्धित समस्याएं भी दूर की जाती है.