Showing posts with label अध्यात्म/राम लीला. Show all posts
Showing posts with label अध्यात्म/राम लीला. Show all posts

Friday, September 9, 2022

अयोध्या की रामलीला में पर्यवेक्षण की कमी डा. राधे श्याम द्विवेदी

उत्तर प्रदेश संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित अयोध्या की नित्य रामलीला मंचन दिनाँक 5 से 18 सितंबर 2022 तक चल रहा है। इसके आयोजक अयोध्या शोध संस्थान (संस्कृति विभाग) अयोध्या है। राम लीला का मंचन जय रामानुज किनकर आदर्श रामलीला मंडल गोंडा कर रहा है। इसके संचालक लक्ष्मण सिंह जी हैं। जिसे सहयोग जिला प्रशासन एवम अयोध्या विकास प्राधिकरण अयोध्या भी कर रहा है।राम लीला में पर्याप्त दर्शक भी रहते हैं जिन्हे आयोजक मंडल सहेज नहीं पा रहे हैं। राम लीला में लीला कम प्रहसन ज्यादा दिखाया जाता है।रामलीला का स्तर ठीक होते हुए भी अव्यस्थाओं का बोलबाला देखा जा सकता है। श्री लक्ष्मण सिंह के निर्देशन में चल रहे 9 सितंबर को इस आयोजन को देखने का अवसर मिला। विश्वामित्र संग राम लखन मिथिला धनुष यज्ञ में गए हुए हैं। देश के हर क्षेत्र के राजा आए हुए है। रावण और बाणासुर का संवाद विस्तार ज्यादा पर बहुत ही स्तरीय रहा। जनक के किरदार ने लीला को अत्यंत भावुक कर दिया। लक्ष्मण का किरदार भी बहुत अच्छी तैयारी के साथ अपना रोल प्रस्तुत किया है। दर्शक मंडल मैदान की लान की घासें बेतरतीब पाई गई । कुर्सियां पर्याप्त मात्रा में पाई गई। घासें कटी छटी होनी चाहिए। श्रोताओं को अनुशासित करने के लिए स्वंसेवक या गार्ड लगाए जा सकते थे। जेनरेटर की व्यवस्था ना होने से कार्यक्रम बार बार बाधित हो रहा है।अयोध्या के राम लीला का शास्त्रीय पक्ष उत्तम रहा। मंच की प्रकाश और ध्वनि व्यवस्था ठीक पाई गई। यदि आयोजक संस्थाओं के अधिकारी आयोजन में समय दे सके तो व्यवस्था में सुधार हो सकता है।