जम्बूद्वीप का विस्तार :-
जम्बूद्वीप: समस्तानामेतेषां मध्य संस्थित:,
भारतं प्रथमं वर्षं तत: किंपुरुषं स्मृतम्,
हरिवर्षं तथैवान्यन्मेरोर्दक्षिणतो द्विज।
रम्यकं चोत्तरं वर्षं तस्यैवानुहिरण्यम्,
उत्तरा: कुरवश्चैव यथा वै भारतं तथा।
नव साहस्त्रमेकैकमेतेषां द्विजसत्तम्,
इलावृतं च तन्मध्ये सौवर्णो मेरुरुच्छित:।
भद्राश्चं पूर्वतो मेरो: केतुमालं च पश्चिमे।
एकादश शतायामा: पादपागिरिकेतव: जंबूद्वीपस्य सांजबूर्ना हेतुर्महामुने।"
- (विष्णु पुराण)
यह एक ऐसा द्वीप जो क्षेत्रफल में बहुत बड़ा होने के साथ-साथ, इस क्षेत्र में पाए जाने वाले जम्बू के वृक्ष और फलों की वजह से विश्वविख्यात है । जम्बूद्वीप प्राचीन समय में वही स्थान था जहाँ पर अभी भारत हैं। इसमें भारतवर्ष, अफगानिस्तान, पाकिस्तान, भारत, नेपाल, तिब्बत, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका, मालद्वीप के भाग भी समलिंत हैं । कुछ शोधों के अनुसार जम्बूद्वीप एक पौराणिक महाद्वीप है। इस महाद्वीप में अनेक देश हैं। भारत वर्ष इसी महाद्वीप का एक देश है।
प्राचीन भारत का इतिहास हमें बताता है कि सम्पूर्ण जम्बू द्वीप को 9 खण्डों में विभक्त किया गया था। इसी 9 खण्डों में एक खंड का नाम भारत वर्ष है ।
हिमालयं दक्षिणं वर्षं भरताय न्यवेदयत्। तस्मात्तद्भारतं वर्ष तस्य नाम्नाबिदुर्बुधा:।।
अर्थात हिमालय पर्वत से दक्षिण का वर्ष अर्थात क्षेत्र भारतवर्ष है।
जम्बू दीप सम्पूर्ण यूरेशिया को कहा जाता रहा है । इसमें भारत खंड अर्थात भारत वर्ष में पारस (ईरान), अफगानिस्तान, पाकिस्तान, हिन्दुस्थान, नेपाल, तिब्बत, भूटान, म्यांमार, श्रीलंका, मालद्वीप, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया, कम्बोडिया, वियतनाम, लाओस तक आते रहे हैं।
राजा मनु पौत्र राजा प्रियव्रत निसंतान थे। उन्होंने अपनी पुत्री के 10 पुत्रों में से 7 को संपूर्ण धरती के 7 महाद्वीपों का राजा बनाया दिया था और अग्नीन्ध्र को जम्बू द्वीप का राजा बना दिया था। इस प्रकार राजा भरत ने जो क्षेत्र अपने पुत्र सुमति को दिया वह भारतवर्ष कहलाया।
भारत देश का प्राचीन नाम आर्यावर्त है। आर्यावर्त के पूर्व इसका कोई नाम नहीं था। कहीं-कहीं जम्बूद्वीप का उल्लेख मिलता है। इसे पहले ‘अजनाभ खंड’ भी कहा जाता था। अजनाभ खंड का अर्थ ब्रह्मा की नाभि या नाभि से उत्पन्न। वृषभ देव के पुत्र भरत के नाम से इस देश का नाम “भारत” पड़ा | वेद-पुराण और अन्य धर्मग्रंथों के साथ वैज्ञानिक शोधों का अध्ययन करें तो पता चलता है कि मनुष्य व अन्य जीव- जंतुओं की वर्तमान आदि सृष्टि (उत्पत्ति) हिमालय के आसपास की भूमि पर हुई थी जिसमें तिब्बत को इसलिए महत्व दिया गया क्योंकि यह दुनिया का सर्वाधिक ऊँचा पठार है।
प्राचीन भारतीय ग्रन्थों में प्रायः बृहत्तर भारत की धरती को जम्बूद्वीप नाम से अभिहित किया गया है। वस्तुतः जम्बूद्वीप का अधिकांश भाग वर्तमान एशिया माना जाता है। प्राचीन भारतीय ब्रह्माण्डशास्त्र में 'द्वीप' का अर्थ वर्तमान समय के द्वीप या महाद्वीप जैसा ही है। जम्बूद्वीप प्राचीन भारतीय संस्कृति और भूगोल में एक महत्वपूर्ण अवधारणा है जो भारत और उसके आसपास के विशाल भूभाग को दर्शाती है, जो जामुन वृक्षों जिसे जंबुल या भारतीय ब्लैकबेरी भी कहा जाता है और नदियों से समृद्ध था। खगोल विज्ञान के ग्रंथ सूर्य सिद्धांत में पृथ्वी के उत्तरी गोलार्ध को जंबूद्वीप और दक्षिणी गोलार्ध को पाताल कहा गया है।
जम्बूद्वीप प्राचीन भारतीय ब्रह्मांड विज्ञान और पौराणिक कथाओं में वर्णित एक विशाल भूभाग (महाद्वीप) है, जिसे पृथ्वी के केंद्र में स्थित माना जाता है। यह सप्त महाद्वीपों में से एक है, जिसके नौ खंड है। जब भी घर में पूजा-पाठ होता हैं तब मंत्र के साथ जम्बूद्वीपे, आर्याव्रते, भारतखंडे, देशांतर्गते,अमुकनगरे या अमुकस्थाने फिर उसके बाद नक्षत्र और गोत्र का नाम आता है।
प्राचीन काल में यहाँ जामुन के वृक्ष प्रचुर मात्रा में थे, और इनके फल से निकलने वाला रस उस नदी (जम्बू नदी) में बहता था, जिसे मधुवाहिनी (मीठे रस वाली) कहते थे। उसी के नाम पर इसका नाम पड़ा। इस नदी के किनारे की मिट्टी (मृत्तिका) जम्बू फल के रस से मिलकर सूखने पर जम्बुनद नामक स्वर्ण (सोना) बनती थी, जो सिद्धपुरुषों का आभूषण होता था। कुछ मान्यताओं के अनुसार, यह ब्रह्मपुत्र नदी है, जो तिब्बत (स्वर्ण-समृद्ध क्षेत्र) से निकलती है और जम्बू नदी कही जाती है। इसे सुदर्शन द्वीप के नाम से भी जाना जाता है और इसके केंद्र में सुमेरु पर्वत स्थित है।यह पृथ्वी के केन्द्र में स्थित माना गया है। इसके नवखण्ड हैं, जिनके नाम ये हैं- इलावृत्त, भद्रास्व, किंपुरुष, भारत, हरि, केतुमाल, रम्यक, कुरू और हिरण्यमय आदि। जिसके चारों ओर नौ खंड (जैसे इलावृत, भारत, भद्राश्व आदि) और छह पर्वत हिमवान, हेमकूट, निषध, नील, श्वेत और श्रृंगवान आदि थे।
मार्कण्डेय पुराण के अनुसार जम्बूद्वीप उत्तर और दक्षिण में कम और मध्य भाग में ज्यादा था जिसे इलावर्त या मेरुवर्ष से जाना जाता था। विष्णु पुराण और अन्य ग्रंथों में इसका वर्णन है, और इसे'मध्यलोक' का हिस्सा माना जाता है, जिसमें भारतवर्ष (मृत्यु लोक) भी शामिल है। विष्णुपुराण (अध्याय 2) में कहा गया हैं कि जम्बू के पेड़ पर लगने वाले फल हाथियों जितने बड़े होते थे ,जब भी वह पहाड़ों से गिरते तो उनके रस की नदी बहने लगती थी। इस नदी को जम्बू नदी से भी जाना जाता था। इस नदी का पानी पीने वाले जम्बूद्वीप वासी थे।जंबूद्वीप वह क्षेत्र है जहाँ मनुष्य निवास करते हैं और यह एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ मनुष्य के रूप में जन्म लेकर ही कोई प्राणी ज्ञान प्राप्त कर सकता है। जंबूद्वीप में ही व्यक्ति को धर्म का वरदान प्राप्त होता है और वह चार आर्य सत्यों , अष्टांगिक मार्ग को समझ पाता है तथा अंततः जीवन-मृत्यु के चक्र से मुक्ति प्राप्त कर लेता है । जम्बूद्वीप में सत्पुरुषों के द्वारा यज्ञ भगवान् का यजन हुआ करता है। यज्ञों के कारण यज्ञ पुरुष भगवान् जम्बूद्वीप में ही निवास करते हैं। इस जम्बूद्वीप में भारतवर्ष श्रेष्ठ है। यज्ञों की प्रधानता के कारण इसे (भारत को) को कर्मभूमि तथा और अन्य द्वीपों को भोग- भूमि कहते हैं।
भारत को जम्बूद्वीप के नाम से भी जाना जाता हैं । प्राचीन समय में भारत में रहने वाले लोगों को जम्बूद्वीप वासी कहा जाता था। जम्बूद्वीप हर तरह से सम्पन्नता का प्रतीक हैं। देवी- देवताओं से लेकर ऋषि मुनियों तक ने इस भूमि को चुना था क्योंकि यहाँ पर नदियाँ, पर्वत और जंगल हर तरह का वातावरण एक ही देश में देखने को मिलता था।
हमारा देश एक कर्मप्रधान देश है और यहाँ जो जो जैसा कर्म करता है उसे वैसा ही फल मिलता है, सदियों से भारत के लोग इस व्यवस्था को मानते रहे हैं। जम्बूद्वीप एक ऐसा विस्तृत भूभाग हैं जिसमें आर्यावर्त, भारतवर्ष और भारतखंडे आदि शामिल हैं।
ऐतिहासिक संदर्भ:-
सम्राट अशोक ने अपने साम्राज्य को जम्बूद्वीप कहा था। यह शब्द उसके प्राचीन शिलालेखों में भी मिलता है, जो भारत के बड़े भूभाग को दर्शाता है। महावंस में लिखा मिलता है कि सम्राट अशोक के पुत्र महिंदा ने श्रीलंका के राजा देवनम्पियातिस्सा से अपना परिचय जंबूद्वीप के निवासी के रूप में दिया था, और बौद्ध धर्म का प्रचार किया था। बौद्ध ग्रंथ महावंश और दीपवंश इस यात्रा का विवरण देते हैं, जिसमें महिंदा ने बोधिवृक्ष की टहनी के साथ श्रीलंका जाकर धर्म प्रचार किया, जिससे राजा और प्रजा बौद्ध धर्म से जुड़े। इस तरह जंबू द्वीप वर्तमान में भारतीय उपमहाद्वीप की पहचान बताता है।
लेखक परिचय:-
(लेखक भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, में सहायक पुस्तकालय एवं सूचनाधिकारी पद से सेवामुक्त हुए हैं। वर्तमान समय में उत्तर प्रदेश के बस्ती नगर में निवास करते हुए समसामयिक विषयों,साहित्य, इतिहास ,पुरातत्व, संस्कृति और अध्यात्म पर अपना विचार व्यक्त करते रहते हैं। वॉट्सप नं.+919412300183)
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