Sunday, October 17, 2021

शरद पूर्णिमा की रात में ताजमहल में चमकी। डा.राधेश्याम द्विवेदी

ये चमकी - वो चमकी।
अबे यार कहां चमकी ?
अरे यार, वो चमकी।
आँखें या बटन ?
 ध्यान से देख, वो चमकी।
अरे हां, वो चमकी।।‘
ताजमहल पर हरियाणा के प्रख्यात कवि उदयभानु हंस की एक रुबाई देखिए
“ये ताज नहीं रूप की अंगड़ाई है। 
या गालिब ने गजल पत्थरों पर गाई है।।
या चांद की अलबेली दुल्हन चुपके से। 
यमुना में नहाने को उतर आई है।।“
शरद पूर्णिमा की रात में ताज के पत्थरों का झिलमिलाना :-
ताजमहल में कुछ ऐसा ही होने जा रहा है। यूं तो पूर्णमासी हर बार आती है। ताजमहल के ऊपर चन्द्रमा हर बार अपनी चमक बिखेरता है, परन्तु इस बार की पूर्णमासी खास हैं।। कहते हैं कि इस रात्रि में चांद पृथ्वी के सर्वाधिक निकट रहता है। अपनी
सोलह कलाओं के साथ चमकता है। चन्द्रमा की किरणें जब ताज के श्वेतसंगमरमर के पत्थरों को स्पर्श करती हैं, वे चमक उठते हैं। इसे ही 'चमकी'कहा जाता है। एक समय था जब ताजमहल में हजारों पर्यटक चमकी काआनंद उठाया करते थे। सुरक्षा कारणों से यह सम्भव नहीं हो पाता है। अब चुनिन्दा पर्यटक ही जा सकते हैं। शरद पूर्णिमा के दिन पूरे चांद में ताजमहल का दीदार करना अपने आप में एक अलग अनुभव है। हर साल इस दिन ताजमहल परिसर में दिखने वाली रोशनी जिसे ‘चमकी’ भी कहा जाता है, इसका दीदार करने की चाह में लोग दीवाने हो गए हैं। ताजमहल को वैसे तो प्रत्येक माह की पूर्णिमा से दो दिन पहले औार दो दिन बाद रात में खोला जाता है।
“ये चमकी, वो चमकी” कुछ ऐसे ही संवाद ताजमहल में गूंजते थे । शरदपूर्णिमा की रात में ताजमहल में चमकी की गूंज होती रहती थी। ‘चमकी’यानी चांद की चांदनी में पत्थरों का चमकना या झिलमिलाना। अद्भुत नजारा यहां होता था। ताजमहल के मुख्य गुंबद पर हजारों लोग होते थे। हाथ की अंगुली के इशारे से बताते थे कि कहां पर चमक रहा है ताजमहल। जैसे-जैसे चंद्र का प्रकाश ताजमहल के इर्द गिर्द परिभ्रमण करता था, चमकी का स्थान भी बदलता जाता था। इसके साथ ही लोग भी घूमते जाते थे। उत्तर दिशा की ओर लोग नहीं होते थे,क्योंकि उधर चांद नहीं पहुंचता है। बाकी तीनों दिशाएं चहल कदमी से भरी रहती थी।
वे भी क्या दिन थे:-वे दिन भी क्या दिन थे। लोग कई दिनों से चमकी देखने का इन्तजार करते थे। अपने रिश्तेदारों को बुलाते थे। तब सर्दी बहुत पड़ती थी। कानों से मफलर बांधकर और स्वेटर पहनकर ताजमहल पहुंचे थे। सुरक्षा का कोई ताम-झाम नहीं रहता था। कोई टिकट भी नहीं था। पर्यटन व्यवसायी
अभिनव जैन बताते हैं कि ताजमहल के द्वार पर ही मूंगफली और नान खटाई की ठेलें लगती थीं। लोग ताजमहल में जाते समय और आते समय मूंगफली खाते थे। सड़कें बहुत अच्छी नहीं थीं, लेकिन लोगों में उमंग और उत्साह देखते ही बनता था। इसे चमकी मेला कहा जाता था। ताजगंज का तो बच्चा-
बच्चा उमड़ पड़ता था।
न जाने कब लौंटेंगे वे दिन:-ताजगंज निवासी और भाजपा नेता अश्वनी वशिष्ठ बताते हैं कि ताजमहल में चमकी देखने की बात ही निराली थी। हर समय भीड़ रहती थी। हर कोई उत्साहित रहता था। आसपास की दुकानें पूरी रात खुली रहती थीं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधिकारी ताजमहल के मुख्य
गुंबद पर आने और जाने के लिए लकड़ी की रैम्प बनाते थे। अपनी सोलह कलाओं के साथ जब चन्द्रमा अपनी आभा बिखेरता था, तब ताजमहल झिलमिला उठता था। न जाने वे दिन कब लौटकर आएंगे।
 वर्षों से यहां लगता था मेला:-चमकी देखने के लिए दूरदराज से लोग आते थे। पूरी रात ताजमहल खुलता था। पर्यटकों को आने-जाने के लिए लकड़ी के रैम्प बनाए जाते थे। खेल-तमाशे वाले आते थे। पूरी रात आवागमन चलता रहता था। ये चमकी, वो चमकी की गूंज होती रहती थी। कोई समस्या नहीं थी। हां, भीड़ को नियंत्रित करने में पुलिस के पसीने छूट जाते थे।
अब क्या होता है:- इस दौरान रात 8.30 से 12.30 बजे तक आठ स्लॉट में ताज का दीदार होता है। प्रत्येक स्लॉट आधा-आधा घंटे का होता है। सैलानियों को रेड सैंड स्टोन प्लेटफार्म तक जाने की अनुमति दी जाती है।चार घंटे में आठ स्लॉट में देखे जाने वाले ताज के लिए सभी 400 टिकटें बिक
जाती हैं। अब तो ताजमहल रात्रि में 8.30 बजे से 12.30 बजे तक खुलता है। अधिकतम 400 लोग ताजमहल देख सकते हैं। उन्हें भी मुख्य द्वार के प्लेटफार्म तक जाने की अनुमति है। यहां से चमकी दिखेगी ही नहीं। हां,पूर्णमासी का रात में ताजमहल जरूर दिखता है लेकिन धुंधला सा। स्पष्टआकृति नजर नहीं आती है।
1984 में आतंकवादी धमकी के बाद बंद:-1984 में ताजमहल को बम से उड़ाने की धमकी मिली। तब आतंकवाद चरम पर था। इसके बाद ताजमहल को रात्रि में बंद कर दिया गया। चमकी पर भी रोक लगा दी गई। 
20 साल बाद रात्रि में खोला गया ताज:-पर्यटन व्यवसायी लगातार दबाव बना रहे थे कि ताजमहल को रात्रि में खोला जाए, ताकि पर्यटकों का रात्रि प्रवास बढ़ सके। सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर 20 साल बाद 27 नवम्बर, 2004 को ताजमहल रात्रि में खोला गया। पहली रात 684 पर्यटकों ने ताजमहल का
अवलोकन किया। इसके बाद प्रत्येक पूर्णिमा और इससे दो रात्रि पहले व बाद में ताजमहल खोल दिया गया।
शिल्पग्राम से बैटरचलित बस में जाएंगे,ये बरतें सावधानी:- सैलानियों को ताजमहल का दीदार कराने के लिए शिल्पग्राम से पूर्वी गेट तक बैटरीचलित बस से ले जाया जाएगा। वहां पर सघन चेकिंग के बाद उन्हें प्रवेश दिया जाएगा। आधा घंटा पूरा हो जाने के बाद दूसरे स्लॉट के लोगों को इसी प्रक्रिया के तहत ताज भेजा जाएगा। पर्यटक को निर्धारित समय से 30 मिनट पहले शिल्पग्राम पहुंचना होगा। वहां सुरक्षा जांच के बाद आगे जाने दिया जाएगा। मुख्य प्रवेश द्वार के प्लेटफार्म तक पर्यटकों को जाने दिया जाता है। ताजमहल में स्टिल कैमरा या बायनोकुलर ले जा सकते हैं।
विशेष परिस्थित में रात्रि दर्शन निरस्त भी किया जा सकता है। पर्यटक चाहे तो अपना टिकट दोपहर 12 बजे तक निरस्त करा सकता है। ऐसी परिस्थिति में 25 फीसदी धनराशि काटकर वापस की जाएगी।
कहां मिलता है टिकट:- ताजमहल का टिकट भारतीय पर्यटकों के लिए 510 रुपये और विदेशी पर्यटकों के लिए 750 रुपये का है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के कार्यालय 22, माल रोड, आगरा पर टिकट मिलता है। टिकट लेने के लिए एक फार्म भरना होगा। अपना फोटो पहचानपत्र देना होगा। एक दिनपहले टिकट लेना होता है। जो पहले आता है, उसे पहले टिकट मिलता है।

गैस एसिडिटी या मानव पाद डा. राधे श्याम द्विवेदी

जैसे घर की सीवर लाइन से एक पाइप ऊपर की ओर गैस निकालने के लिए लगाया जाता है जिसके न होने पर लाइन में गैस का दबाव बढ़ने पर विस्फोट हो सकता है। ऐसे ही मोटर के इंजन से एक इग्ज़ॉस्ट पाइप लगाया जाता है। इंजन में बनने वाली गैसों कि निस्तारण की तरह मानव शरीर में भी गैस निष्कासन प्रणाली होती है। जो आंतों में खाने के पचाने के दौरान बाइप्राडक्ट के रूप में बनती हैं । इन्हें निकलने नहीं देंगे तो कुछ घंटे में ही हम बीमार हो जाएंगे । पाद या फ़ार्ट असल में इंटेस्टाइनल गैस निकालने की प्रक्रिया है जिसके फलस्वरूप खाना पचाया जाता है। ये गैस हमारे पूरे डाइजेस्टिव ट्रैक्ट में पाई जाती है जिसमें पेट, छोटी आंत, कोलोन और रेक्टम शामिल है।
इंसान इसलिए फ़ार्ट करता है क्योंकि हमारे शरीर में गैस बढ़ती जाती है ।
पाद या  गैस बनने का कारण :- 
1. दिन भर हमारे शरीर में हवा जाती रहती है. कार्बोनेटेड बेवरेज के ज़रिए या फिर चबाने के दौरान भी।
2. छोटी आंत में बैक्टीरिया का ज़रूरत से ज़्यादा बढ़ जाना भी है और इसकी कई वजह हो सकती हैं जिनमें टाइप 2 डायबिटीज़, सेलिआक, लिवर की बीमारी शामिल हैं।
 3. जब कार्बोहाइड्रेट पूरी तरह पच नहीं पाते तब ऐसा होता है। तब छोटी आंत में मौजूद एंज़ाइम सारा खाना पचा नहीं पाते। जब कम पचा हुआ कार्बोहाइड्रेट कोलोन या मलाशय में पहुंचता है, तो बैक्टीरिया उस खाने को हाइड्रोजन और कार्बन डाइऑक्साइड में बदल देता है। थोड़ी-थोड़ी गैस तो बिना आवाज किये निकलती ही रहती है । जिसका हमें पता ही नहीं लगता । एक साथ बहुत गैस निकले तभी आवाज होती है ।
मानव पाद एक गैर जरूरी हवा होती है ,जो अपने आप खाते-खाते निकल जाते हैं या दूसरी वजहों से फेफड़ों की जगह पेट में चली जाती है । इसके अलावा हम लोगो का खाया खाना जब पचते हुए आंत में पहुंचता है, तो उस पर बैक्टीरिया काम करने लगते हैं । ये बैक्टीरिया हानिकारक नहीं होते, ये हमारे दोस्त होते हैं । उस स्टार्च और शक्कर को पचाते हैं जिसे हमारा शरीर आसानी से नहीं पचा पाता । इस दौरान भी गैस निकलती है !
पादना बुरी आदत नहीं :-
बचपन से.सबको सिखा दिया गया है कि उक्त क्रिया बुरा है तो  मान लिया जाता है कि बुरा होता है ।और ऐसा पीढ़ी दर पीढ़ी हुआ है । इसलिए सबने मान लिया है कि पादना बुरा है ,लेकिन सच इससे बिलकुल उलट है ।पादना अच्छी सेहत की निशानी है। ये बताता है कि हम पर्याप्त मात्रा में फाइबर खा रहे हैं और। हमारे शरीर में पाचक बैक्टीरिया की अच्छी संख्या मौजूद है |
मानव पाद में ज़्यादा गंध भी ठीक नहीं :-
पाद वह गैस है जो सबके शरीर में कुछ देर रह कर निकली है ! इसलिए वो यह सेहत का इंडिकेटर भी होती है ! अगर किसीकी पाद बेहद बदबूदार है तो सेहत खराब है, या डाइट पटरी से उतरी हुई है ।यहां बात हाज़मा खराब होने से आगे जा सकती है ।बेहद बदबूदार पाद लैक्टोस एलर्जी (लैक्टोस डेरी उत्पादों में पाया जाने वाला कंपाउंड) की निशानी हो सकती है ।गंभीर मामलों में बात कोलॉन कैंसर तक जा सकती है ।
आवाज़ और बेआवाज़ पाद :-
पादते वक्त गैस की मात्रा और शरीर के पॉश्चर के आधार पर तय होता है पादने में आवाज़ होगी कि नहीं ! तो दोनों तरह की पादें नॉर्मल हैं ! पादने में ये अकेली चीज़ है, जिससे सबकी सेहत से ताल्लुक नहीं है । बस इतना है कि आवाज़ के डर से जो लोग पाद को कंट्रोल करते हैं, उन्हें ज़्यादा देर तक ऐसा नहीं करना चाहिए ।।कभी-कभी शरीर सिर्फ वो हवा बाहर निकाल रहा होता है, जो खाते-खाते शरीर में चली गई तो इसमें हाइड्रोजन सल्फाइड नहीं होती । तो इस तरह की पाद में गंध नहीं होती ये डकार की तरह ही होती है, बस शरीर की दूसरी तरफ से निकल रही होती है ।
गैस या पाद दूर करने के घरेलू उपाय
1.आंवला जूस पीना:-
आंवला में एन्टी-इन्फ्लैमटोरी और एन्टीऑक्सिडेंट गुण पाए जाते हैं, जो पेट से नुकसानदायक पदार्थों को निकालकर पेट दर्द जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक होता है। एसिडिटी से राहत पाने के लिए खाली पेट आंवला का जूस पीएं। इसमें मौजूद फाइबर आपके पाचन-क्रिया को बेहतर बनाता है और आपको पेट में गैस बनने जैसी समस्या से छुटकारा दिलाता है।
2. एलोवेरा जूस पीना:-
एंटीऑक्सीडेंट्स और औषधीय गुणों से भरपूर एलोवेरा जूस पाचन तंत्र को मजबूत बनाने के साथ-साथ कब्ज की समस्या से भी छुटकारा दिलाता है। इसमें ऐसे एंटी-इन्फ्लैमटोरी गुण होते हैं, जो एसिडिटी और अन्य पेट की समस्याओं के इलाज में कारगर है।
3. सौंफ का सेवन :-
अगर आप लगातार पेट में गैस बनने और एसिडिटी जैसी समस्या से परेशान हैं और आपका पेट फूला हुआ है तो आपके लिए सौंफ का सेवन फायदेमंद हो सकता है। इसके लिए आप एक कप पानी गर्म में 1 चम्मच सौंफ मिलाकर उसे रातभर छोड़ दें। सुबह इसे छान लें और इसमें एक चम्मच शहद मिलाकर इसका सेवन करें। इसके नियमित सेवन से पेट फूलना, पेट दर्द, एसिडिटी और गैस की समस्या से आपको छुटकारा मिल सकती है।
4. दही का प्रयोग :-
दही एक प्रकार का प्रोबायोटिक होता है जिसे खासकर पेट के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है। गर्मियों में रोज दही के सेवन आपके पेट को ठंडा रखता है। इसके सेवन से आप एसिडिटी और पेट से जुड़ी अन्य समस्याओं से बच सकते हैं। इसके अलावा दही खाने से पाचन शक्ति मजबूत होने के साथ ही शरीर में खून की कमी और कमजोरी दूर होती है। भूख कम लगने पर भी आप इसका सेवन आसानी से कर सकते हैं।
5. एप्पल साइडर विनेगर का सेवन :-
एप्पल साइडर विनेगर एसिडिक नेचर का होता है और ये उन लोगों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। जिन लोगों को खाना पचाने में मुश्किल होती है वो सुबह-सुबह इसका सेवन कर सकते हैं। इससे आपकी एसिडिटी की समस्या को दूर होगी और डायजेशन में भी मदद मिलेगा।