Monday, July 3, 2017

ज्यादा दिन किताब रखने पर अमेरिकी पुस्तकालय का जुर्माना व सजा - डा. राधेश्याम द्विवेदी

         
                             
ह्यूस्टन में अमेरिका के एक पुस्तकालय ने अपनी लापता पुस्तकों की करीब दो लाख डॉलर की लागत को वसूलने की कोशिश के तहत तय अवधि से अधिक पुस्तकें रखने वालों को जुर्माने और जेल की सजा देने का फैसला किया है. यह कदम कई भुलक्कड़ लोगों को परेशानी में डाल सकता है. अलबामा में एथेंस-लाइमस्टोन पब्लिक लाइब्रेरी ने अपनी लापता पुस्तकों को फिर से पाने की कोशिशों के तहत एक अध्यादेश लागू करने का फैसला किया है जिसमें जुर्माना और संभावित जेल की अवधि का प्रावधान होगा.

            शहर के एक अध्यादेश के अनुसार पुस्तकालय का कार्ड रखने वाला कोई व्यक्ति यदि सार्वजनिक पुस्तकालय से ली गई किसी सामग्री को नहीं लौटाता या मना कर देता है तो यह गैरकानूनी होगा. 'न्यूज कूरियर' की खबर के अनुसार अध्यादेश का उल्लंघन करने वाले किसी व्यक्ति पर 100 डॉलर तक का जुर्माना लग सकता है. उसे 30 दिन तक की जेल की सजा सुनाई जा सकती है या दोनों सजा दी जा सकती हैं जिसका निर्णय म्यूनिसिपल जज के विवेक पर निर्भर करेगा. पुस्तकालय निदेशक पॉल लॉरिटा के हवाले से अखबार ने लिखा कि अध्यादेश लागू करना जरूरी है क्योंकि लोग न केवल पुस्तकालय से किताबें चुरा रहे हैं बल्कि पुस्तकालय के अन्य ग्राहकों से भी पुस्तकें चोरी कर रहे हैं.
            पुस्तकालय का उपयोग करने वाले एसे विरले लोग होते हैं जो आम जनता और पाठकों के विचारों जिज्ञासाओं का ध्यान रखते हैं। कुछ एसे भी बड़े बड़े लोग होते हैं जो पुस्तके अपने कक्ष में रखना पसन्द तो करते हैं पर औरों के हकों का ध्यान नहीं देते हैं। वे पुस्तकों को अनावश्यक अपने पास रोककर पाठको ना केवल हक मारते हैं, अपितु हर पुस्तक का हक भी मारते हैं, जिसके अनुसार हर पुस्तक को उसका पाठक मिले। हमारे 30 साल के पुस्तकालय सेवा के अनुभव में एसे अनेक महान हस्तियों आयी हैं, जो पुस्तकों के जितने प्रेमी होते हैं, पुस्तकालय या आम पाठक के उतने बड़े दुश्मन भी होते हैं ।
            अमेरिका की भांति भारत में भी यह दुष्प्रवृत्ति कम नहीं हैं। इस प्रकार की आदत को सामान्यतः संभा्रन्त, अधिकार सम्पन्न तथा बहुत ही विश्वासी लोग ही करने की हिम्मत व दुर्विचार रखते हैं। आम पाठक इतना बड़ा कुकत्य करने को कम सोचेगा, उसे कम अवसर मिल सकेगा तथा उसकी आत्मा इस दुष्साहस को करने से मना भी करेगी। जो लोग पुस्तकों का अपना निजी संकलन रखते हैं अथवा लिखने पढ़ने का शौक रखते हैं वे अपनी आवश्यकता को पूरी करने के लिए इस अपराधबोध के प्रभाव में आ जाते हैं।  भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अनेक अधिकार सम्मत लोगों ने एसे कृत्यों का अंजाम दिया है। डा. डी वी. शर्मा, आई डी. द्विवेदी, पी. बी. एस. सेंगर. ए. आर सिद्दीकी, वाई पी. एस. रावत तथा भारतीय पुलिस सेवा के विजय कुमार आदि लोगों ने सुचिता से पुस्तकालय धर्म का निर्वहन नहीं किया है। अमेरिका की भांति भारत में इस प्रकार का कोई कानून नहीं है इस कारण पुस्तकालयों को काफी छति उठानी पड़ती है। पुस्तकालय हमारे राष्ट्र के विकास की अनुपम धरोहर हैं । इनके विकास व विस्तार के लिए सरकार के साथ-साथ हम सभी नागरिकों का भी नैतिक कर्तव्य बनता है जिसके लिए सभी का सहयोग अपेक्षित है।



Saturday, July 1, 2017

‘ताज रंग महोत्सव 2017‘ का शुभारम्भ 6 जुलाई से



  आगरा। एतिहासिक शहर आगरा में विगत वर्षों की भांति नटरांजलि थियेटर आर्टस की संस्थापिका अलका सिंह के नेतृत्व में देश विदेश से पधारे लगभगे 400 कलाकारों की कला संस्कृति के महादर्शन हेतु ‘ताज रंग महोत्सव 2017‘ के चार दिवसीय (6 जुलाई से 9 जुलाई 2017 ) कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस ताज रंग महोत्सव 2017 का भव्य उद्घाटन दिनांक 6 जुलाई 2017 को यमुना आरती स्थल, यमुनांचल, हाथीघाट, आगरा पर यमुना शुद्धीकरण जन चेतना अभियान के अधीन गुरु वशिष्ठ मानव सर्वांगीण सेवा समिति के द्वारा पं. अश्विनी कुमार मिश्र यमुना सत्याग्रही के नेतृत्व में किया जाएगा।

इस भव्य संगीतमय यमुना आरती देश के लिए अलग-अलग प्रान्तों द्वारा आये कलाकारों द्वारा विविध परिधानों से सुसज्जित होकर अपनी कला की प्रस्तुति देंगे। नटरांजलि थियेटर आटर््स के थीम को अंगीकृत करते हुए इस कार्यक्रम का शुभारम्भ दिनांक 6 जुलाई 2017 को पं. अश्विनी कुमार मिश्र यमुना सत्याग्रही की संस्था गुरु वशिष्ठ मानव सर्वांगीण सेवा समिति के सौजन्य से हाथीघाट से शुरु किया जा रहा है।
इस एतिहासिक ताज रंग महोत्सव 2017 में श्रद्धालु अपने परिवार तथा इष्ट मित्रों सहित कृष्ण कालिन्दी दिव्य रथ यात्रा को मां कालिन्दी के तट तक खींचकर असीम पुण्य का सौभाग्य प्राप्त करने का अवसर प्राप्त कर सकेंगे। इसके साथ ही साथ विशेष आकर्षण ’’कृष्ण चलें कालिन्दी के तीर” के थीम पर कृष्ण कालिन्दी दिव्य रथ यात्रा मंदिर वंशी बट विहारी जी महराज रावतपाड़ा आगरा से हाथीघाट यमुनांचल आगरा को शाम 4.00 बजे प्रस्थान करेगी। यह लगभग 5.00 बजे हाथी घाट पर पहुंचेगी जहां एक भव्य महाआरती संगीत के साथ तथा भारत के कोने कोने से आने वाले बाल कलाकारों द्वारा आयोजित किया जा रहा है। विभिन्न संस्कृति तथा परिधानों से सुसज्जित ये बाल कलाकार अखिल भारत की संस्कृतियों का विहंगम दृश्य प्रस्तुत करेंगे।

कार्यक्रम अलका सिंह स्ंयोजक ताज रंग महोत्सव 2017‘ आगरा तथा दिनांक 6 जुलाई 2017 के यमुना दिव्य महाआरती कार्यक्रम पं. अश्विनी कुमार मिश्र यमुना सत्याग्रही के स्ंयोजकत्व में सम्पन्न होगी। निवेदक मण्डल में पं. बालबोध मिश्र, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आगरा मंडल के पूर्व पुस्तकालय अधिकारी डा. राधे श्याम द्विवेदी, वशिष्ठ मानव सर्वांगीण सेवा समिति के पदाधिकारी तथा सदस्य धीरज मोहन सिंहल, राजीव खण्डेलवाल, मुकेश शर्मा एडवोकेट, अजय अवस्थी, सुधीर पचैरी, आचार्य गोविन्द दूबे, पी के गुप्ता, गोवर्धन सुनेजा, राजेश यादव, शैलेन्द्र शर्मा, अनिल अग्रवाल, दीपक शर्मा,ललित बंसल, सुनील गर्ग, मुनेश शर्मा, राम भरत उपाध्याय, राजू चतर्वेदी,धमेन्द्र वर्मा, अजय तोमर, प्रमोद शर्मा, जीवन साहू, प्रदीप पाठक, कमल शर्मा,  हरेश पाठक, योगेश मुदगल,शिवनाथ शर्मा, अनिल मिश्रा, दिनेश शर्मा, दिलीप पाठक, अनुपम घूमल, राजेश शुक्ला, चयवन्नी गुप्ता, धर्मेन्द्र शर्मा तथा आकाश आदि का नाम समलित है।