Thursday, October 15, 2026

बस्ती के अल्प ख्यातित कवि :श्री बुध यदुनाथ जी (बस्ती के छंदकार भाग 3 कड़ी 26)


डॉ. मुनि लाल उपाध्याय “सरस” जी के शोध प्रबंध: “बस्ती के छंदकार” के सूचीबद्ध मध्योत्तर (तृतीय) कलाधर- पाल-ब्रजेश चरण के कवि और छंदकार नाम दिया गया है। बस्ती जनपद के छंदकारों का साहित्यिक योगदान भाग दो द्वारा समित संख्या में 2008 में लेखक द्वारा प्रकाशित हो चुका है। इसमें केवल तीसरे अध्याय को सम्मिलित किया गया है। तृतीय अध्याय का नामांकन मध्योत्तर चरणअथवा कलाधर- पाल-ब्रजेश चरण के नाम से किया गया है। बीस कवियों पर ऐतिहासिक परिचय प्रस्तुत करते हुए उनके व्यक्तित्व तथा कृतित्व की संक्षिप्त समीक्षा प्रस्तुत की गई है। इन छन्दकारों का परिचय और छन्दों का विवरण किसी न किसी साहित्य प्रेमी से उपलब्ध किया जा सका है, इसलिए एक बेहतर संकलन बन पड़ा है। इसके अलावा18 छन्दकारों की सूची भी पृष्ठ 233-34 में दी गई है जिनका पर्याप्त साहित्य न मिलने के कारण संक्षेप में सूचीबद्ध किया गया है। इन्हीं में से श्री बुध यदुनाथ जी एक सामान्य कवि है। जिस पर बृहद शोध की पूर्ण अनुशंसा की जा रही है।
       श्री बुध यदुनाथ जी का जन्म बाँसी तहसील के जीवा नामक ग्राम में सं० 1960 विक्रमी के आसपास पैदा हुए थे। इनका जन्म भूमि ग्राम जीवा है ,जिसे जीवा या 'जुआ' भी कहा जाता है। यह उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिला के अंतर्गत बांसी तहसील बांसी कोतवाली और मिठवल ब्लॉक के अंतर्गत आने वाली एक ग्राम पंचायत है।यह क्षेत्र राप्ती नदी के मैदानी और तटीय प्रभाव वाले क्षेत्रों के निकट है, जिससे यहां बारिश या बाढ़ के मौसम में कभी-कभी जलभराव या स्थानीय रास्ते प्रभावित होने की खबरें आती रहती हैं।
     आपके बारे में 'उपहार' में लिखा है, आप सभी रसों के सिद्ध हस्त कवि थे। उन्होंने श्रृंगार, वीर, करुणा, हास्य और भक्ति जैसे सभी रसों में पारंपरिक छंदों (कवित्त, सवैया और दोहा) की अत्यंत उत्कृष्ट रचनाएँ की हैं। इनकी रचनाओं में गंवई संस्कृति, राष्ट्रीय चेतना और शास्त्रीय छंद विधान का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। क्षेत्र की साहित्यिक पत्रिकाओं और 'उपहार' पत्रिका में उनके जीवन और दुर्लभ छंदों को सहेज कर समय-समय पर प्रकाशित किया गया है। इनकी भाषा शैली बड़ी परिमार्जित एवं आकर्षक है। इनका काव्य संग्रह एक स्वतंत्र ग्रन्ध है।
प्रस्तुति: आचार्य डॉ राधेश्याम द्विवेदी 



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