Thursday, September 10, 2026

कर्नाटक सरकार द्वारा भारत के कानून का खुलेआम उल्लंघन 🙏डॉ राधेश्याम द्विवेदी

क्या कर्नाटक सरकार भारत के कानून का उल्लंघन कर सकती है? क्या वह भारत के संसद द्वारा पारित कानून का उल्लंघन नहीं कर रही है? ऐसे तो भारत का संघीय ढांचा कब तक स्थिर रह सकेगा? क्या माननीय कर्नाटक उच्च न्यायालय और भारत का माननीय सर्वोच्च न्यायालय को स्वतः संज्ञान लेकर राज्य सरकार के असंवैधानिक कृत्य पर रोक नहीं लगानी चाहिए?

वंदे मातरम के केवल दो श्लोक गाए जाएंगे: कर्नाटक प्रशासन ने विवाद की पृष्ठभूमि तैयार की

 कर्नाटक प्रशासन ने विवाद की पृष्ठभूमि तैयार की है। कर्नाटक सरकार के आदेश में कहा गया है, "राज्य सरकार ने राष्ट्रगान 'वंदे मातरम' के गायन/बजाने में एकरूपता, सम्मान और उचित प्रोटोकॉल बनाए रखना आवश्यक समझा है।"

वंदे मातरम के केवल दो श्लोक गाए जाएंगे: कर्नाटक प्रशासन ने विवाद की पृष्ठभूमि तैयार कीडीके शिवकुमार सरकार का यह निर्णय कांग्रेस के दृढ़ रुख को दर्शाता है।

कर्नाटक सरकार ने आदेश दिया कि आधिकारिक कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो श्लोक ही गाए जाएं।इस आदेश का उद्देश्य राजकीय कार्यक्रमों में वंदे मातरम गाने में एकरूपता और सम्मान बनाए रखना है।यह निर्णय सरकारी समारोहों में पूर्ण वंदे मातरम गाने के केंद्र के आदेश का विरोध करता है।

कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने राज्य सरकार के कार्यक्रमों और आधिकारिक समारोहों में वंदे मातरम के गायन को मानकीकृत करने का आदेश जारी किया है । आदेश में कहा गया है कि कर्नाटक सरकार के कार्यक्रमों में वंदे मातरम के केवल पहले दो श्लोक ही गाए जाने चाहिए। इसमें यह भी कहा गया है कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस गीत ने राष्ट्रवाद, एकता और देशभक्ति को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

कन्नड़ में जारी आदेश के मोटे तौर पर अनुवाद में लिखा है, "भारत सरकार के गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' के आधिकारिक संस्करण और विभिन्न सरकारी और सार्वजनिक समारोहों में इसके गायन या वादन के संबंध में दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन अवसर के अनुसार उचित रूप से किया जाना चाहिए।" 

इसमें आगे कहा गया है, "राज्य सरकार ने राज्य में आयोजित विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों और समारोहों की प्रकृति और संदर्भ के अनुसार राष्ट्रगान 'वंदे मातरम' बजाने/गाने के लिए एकरूपता, सम्मान और उचित प्रोटोकॉल बनाए रखना आवश्यक समझा है।" 

डीके शिवकुमार सरकार का यह निर्णय केंद्रीय गृह मंत्रालय के उस आदेश का कड़ा विरोध करने वाले पार्टी के रुख को दर्शाता है जिसमें आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान को पूर्ण रूप से गाने का निर्देश दिया गया है। पिछले महीने, कांग्रेस कार्य समिति ने 1937 के अपने उस प्रस्ताव का पालन करने का निर्णय लिया था कि पार्टी कार्यक्रमों में केवल पहले दो श्लोक ही गाए जाएंगे।

फरवरी में, केंद्र ने सार्वजनिक सभाओं और आधिकारिक कार्यक्रमों में पूरे वंदे मातरम का गायन अनिवार्य कर दिया था और संसद में एक विधेयक पारित किया था जिसमें राष्ट्रगान के गायन में बाधा डालने या उसे रोकने को आपराधिक अपराध घोषित किया गया था।

कांग्रेस ने पलटवार करते हुए कहा कि वंदे मातरम पर उसका रुख 1937 में शीर्ष नेतृत्व द्वारा लिए गए निर्णय के अनुरूप है - जो महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू, रवींद्रनाथ टैगोर, सुभाष चंद्र बोस और सरदार पटेल की उपस्थिति में लिया गया था।

अगस्त में, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे को गोवा में एक कार्यक्रम में वंदे मातरम का "अधूरा" संस्करण गाने के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा था। भाजपा द्वारा तुष्टीकरण के आरोपों के जवाब में, उन्होंने कहा कि उन्होंने वही संस्करण गाया है जो गांधी, नेहरू, पटेल और अटल बिहारी वाजपेयी ने गाया था। उन्होंने पत्रकारों से कहा था कि अगर इस संस्करण को गाना अपराध है, तो उन नेताओं के खिलाफ भी पुलिस केस दर्ज किए जाने चाहिए।

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा अपने उपन्यास आनंद मठ में रचित वंदे मातरम को सर्वप्रथम 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने गाया था। लेकिन बाद में मुस्लिम लीग के नेताओं ने हिंदू देवियों के संदर्भों के कारण इसे इस्लाम विरोधी बताते हुए आपत्ति जताई। 1937 में, कांग्रेस कार्य समिति ने निर्णय लिया कि वंदे मातरम के केवल दो श्लोक ही गाए जाएंगे।

वंदे मातरम की पूरी कहानी इस लिंक से जानी जा सकती है -
https://rsdwivedi.blogspot.com/2026/08/150.html

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