वैशाली के लिच्छवियों की शाखा :-
नेपाल के लिच्छवी वैशाली के लिच्छवियों की एक शाखा से उत्पन्न हुए थे, जिन्होंने आधुनिक बिहार और भारत के क्षेत्रों में शासन किया था। आधुनिक भारत और नेपाल के कुछ हिस्से मौर्य साम्राज्य का भी शासन रहा है। इनके अनेक ऐतिहासिक विरासतों से नेपाल अपने को गौरवान्वित हो रहा है।
1950 की द्विपक्षीय संधि :-
दोनों देशों के बीच व्यापार और वाणिज्य संधि की पुष्टि अक्टूबर 1950 में हुई, जिसमें भारत ने भारतीय क्षेत्रों और बंदरगाहों के माध्यम से वस्तुओं के आयात और निर्यात के नेपाल के अधिकार को स्वीकार किया। संधि के अनुसार, भारत से होकर गुजरने वाली वस्तुओं पर सीमा शुल्क नहीं लगाया जा सकता था।
भारत गणराज्य और नेपाल संघीय लोकतांत्रिक गणराज्य ने 1950 की भारत-नेपाल शांति एवं मैत्री संधि और उससे संबंधित गुप्त पत्रों के माध्यम से संबंध स्थापित किए, जिनमें दोनों देशों के बीच सुरक्षा संबंधों और द्विपक्षीय व्यापार तथा भारतीय क्षेत्र से होकर गुजरने वाले व्यापार को नियंत्रित करने वाले समझौते को परिभाषित किया गया था। दक्षिण एशिया में भारत और नेपाल के बीच मैत्रीपूर्ण संबंध को परंपरागत रूप से और बोलचाल की भाषा में रोटी-बेटी का रिश्ता कहा जाता है।
माओवाद प्रभाव ने खेल बिगाड़ा :-
हाल के वर्षों में, नेपाल की घरेलू राजनीति में माओवाद के बढ़ते प्रभुत्व के साथ-साथ पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना के मजबूत होते आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव ने नेपाली सरकार को भारत से अपने संबंध धीरे-धीरे कम करने के लिए प्रेरित किया है। हालाँकि नेपाल अभी भी संयुक्त राष्ट्र में भारत का समर्थन करता है।
भारत अनेक अवसरों पर नेपाल को संभाला:-
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अगस्त 2014 में नेपाल का दौरा किया , जो 17 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा थी। अपनी यात्रा के दौरान, भारत सरकार ने नेपाल को विभिन्न विकास उद्देश्यों के लिए रियायती ऋण के रूप में 1 अरब अमेरिकी डॉलर और एक एचआईटी फॉर्मूला प्रदान करने पर सहमति व्यक्त की, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नेपाल में भारतीय अप्रवासी नेपाल की संप्रभुता के लिए खतरा नहीं हैं और इसलिए नेपाल और भारत के बीच खुली सीमा एक पुल होनी चाहिए, न कि बाधा। नेपाल और भारत ने 25 नवंबर 2014 को एक समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसके अनुसार भारत 1 अरब अमेरिकी डॉलर की लागत से 900 मेगावाट का जलविद्युत संयंत्र बनाएगा।
भूकंप और संकट में भारत ने की नेपाल की मदद :-
भूकंप के बाद पुनर्निर्माण के लिए 22 फरवरी 2016 को हस्ताक्षरित समझौतों के तहत नेपाल को 250 मिलियन अमेरिकी डॉलर की राशि प्रदान की गई है।
जब नेपाल में भूकंप आया तो सहायता के लिए भारत ही सर्व प्रथम पहुंचा था। कोरोना काल में वैक्सीन भारत ने मुहैया कराया था। भारत का पैसा नेपाल में धड़ल्ले से चलता है। सीमावर्ती गांवों के लोग रोजमर्रा के सामान भारत से खरीदते रहे हैं। जब से चीन के बहकावे में नेपाल आया है अपना सर्वाधिक नुकसान खुद उठा रहा है।
व्यापार व पारगमन और समुद्री पहुंच :-
नेपाल मुख्य रूप से व्यापार व पारगमन ईंधन की आपूर्ति, खाद्यान्न, औद्योगिक कच्चे माल और रोजगार/शिक्षा के लिए भारत पर आश्रित है। चारों तरफ से भूमि से घिरा यह हिमालयी राष्ट्र अपनी आवश्यक वस्तुओं के आयात और निर्यात के लिए भारत के बंदरगाहों और मार्गों पर निर्भर है। नेपाल एक भू-आबद्ध देश है, इसलिए यह अपने अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए भारतीय बंदरगाहों (मुख्य रूप से कोलकाता और विशाखापत्तनम) का उपयोग करता है।
पेट्रोलियम और ईंधन :-
नेपाल अपनी सभी पेट्रोलियम (पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और विमान ईंधन) जरूरतों के लिए पूरी तरह से भारत पर निर्भर है। भारत की ओर से यह आपूर्ति नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन (NOC) और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (IOC) के बीच हुए दीर्घकालिक समझौतों के तहत पाइपलाइनों और टैंकरों के माध्यम से की जाती है।भारत के मोतिहारी (बिहार) से लेकर नेपाल के अमलेखगंज तक 41 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन (जिसमें भारत की 2 किमी और नेपाल की 39 किमी पाइपलाइन शामिल है) के जरिए निर्बाध आपूर्ति की जाती है।पेट्रोल और डीजल मुख्य रूप से बरौनी, मोतिहारी, सिलीगुड़ी, बेतालपुर और लखनऊ स्थित डिपो से नेपाल भेजे जाते हैं। वहीं एलपीजी (रसोई गैस) की आपूर्ति बरौनी, दुर्गापुर, हल्दिया, मथुरा और पारादीप से ट्रकों द्वारा होती है।
आवश्यक खाद्य सामग्री :-
नेपाल अपनी आवश्यक खाद्य सामग्री, जैसे- चावल, चीनी, खाद्य तेल और उर्वरकों के लिए भारी मात्रा में भारत पर निर्भर है। खुले व्यापार समझौतों और सीमा की निकटता के कारण, भारत नेपाल को निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करता है। फलों और सब्जियों जैसी दैनिक जरूरत की वस्तुओं के बड़े हिस्से के लिए भारतीय बाजारों पर निर्भर रहता है।
रोजगार और अर्थव्यवस्था : -
भारत-नेपाल के बीच 'रोटी-बेटी का रिश्ता' है, जिसके तहत लाखों नेपाली नागरिक भारत में काम करते हैं और भारत में शिक्षा तथा चिकित्सा सुविधाओं का लाभ उठाते हैं।
विद्युत और ऊर्जा : -
हालांकि नेपाल पनबिजली का उत्पादन करता है, लेकिन पीक सीजन के दौरान बिजली के आदान-प्रदान और ग्रिड कनेक्टिविटी के लिए यह भारत से जुड़ा हुआ है।
भारत देता है रोजगार :-
भारत की सेना में नेपालियों को वरीयता के साथ प्रवेश मिलता है। आई एम ए में प्रशिक्षण में भी वरीयता मिलता है। नेपाल की स्वास्थ्य मंत्री भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान की चिकित्सक है। भारत के मोहल्लों में कितने नेपाली भाई रात की शिफ्ट में चौकीदारी करते हैं। सर्दियों के दिनों में नेपाली भाई गर्म स्वीटर साल शूट आदि सामान, हींग और रंग आदि को भारत के गांवों में घूम घूमकर फेरी लगाकर बेचते हैं। लोग सामान खरीदने के साथ इन्हें आश्रय और राशन तक मुहैया कराते चले आ रहे हैं। ये ना बालेन् शाह की अनुमति लेकर आते हैं और ना ही कहीं थाने आदि में अपनी इंट्री कराते हैं। भारतीय जन इन्हें साथी कह सम्मान देते रहे हैं। भारत के छोटे छोटे बाजारों में मोमो चाट पकौड़ी की दुकान चलाते हुए इन्हें कहीं भी देखा जा सकता है। भारतीय जनता इनका व्यापार भी चलवाती है और इन्हें मान सम्मान भी देती है। भारतीय तो कभी एतराज नहीं करते। हम तो “वसुधैव कुटुंबकम्” की भावना रखते हैं।
उर्वरक की आपूर्ति :-
धान की रोपाई के समय नेपाल कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने और खाद्य सुरक्षा बनाए रखने के लिए भारत (आरसीएफ जैसी सरकारी कंपनियों) से भारी मात्रा में उर्वरक आयात करता है।अभी धान की फसल के लिए भारत सरकार से खाद उबरक की मांग नेपाल ने की है।
तीर्थयात्रियों के भोजन बनाने को लेकर भारत का अपमान किया गया :-
नेपाल में भारतीय तीर्थयात्रियों का सड़क किनारे भोजन बनाना शौक नहीं, कई बार मजबूरी भी है। भारतीय तीर्थ यात्री नेपाल के धाम की यात्रा करके वैदिक परम्परा का निर्वहन करते हैं। नेपाल के बाजारों में शुद्ध शाकाहारी भोजन सर्व सुलभ नहीं है। नेपाल के लोग सब तरह के भोजन ग्रहण करते हैं। इसलिए आम पर्यटक तो वहां अपनी जरूरत पूरा कर लेगा पर चारों धाम जैसे तीर्थ यात्री वहां सब जगह भोजन नहीं कर सकता है। भारतीय तीर्थयात्रियों को सड़क किनारे भोजन बनाते देखकर इसे केवल अव्यवस्था या नियमों की अनदेखी के रूप में देखना उचित नहीं होगा। नेपाल के अधिकांश धार्मिक और तीर्थस्थलों पर सात्त्विक भोजन एवं आवास की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण कई श्रद्धालु स्वयं भोजन बनाने को मजबूर हो जाते हैं।
अधिकांश होटल और रेस्टोरेंट में मांसाहारी भोजन उपलब्ध होता है, जबकि बड़ी संख्या में तीर्थयात्री धार्मिक मान्यताओं के अनुसार केवल सात्त्विक भोजन ग्रहण करते हैं। ऐसे में उन्हें अपनी मान्यता के अनुरूप भोजन मिलना कठिन हो जाता है।
सात्त्विक भोजनालयों, धर्मशालाओं का विस्तार हो :-
धार्मिक पर्यटन को व्यवस्थित और आकर्षक बनाने के लिए तीर्थस्थलों के आसपास सात्त्विक भोजनालयों, धर्मशालाओं और स्वच्छ आवास सुविधाओं का विस्तार किया जाना आवश्यक है। इससे श्रद्धालुओं की जरूरतें पूरी होंगी और सार्वजनिक स्थानों पर भोजन बनाने जैसी स्थितियां भी स्वतः कम हो जाएंगी। समस्या केवल तीर्थ यात्रियों की नहीं, बल्कि उनके लिए उपयुक्त सुविधाओं की कमी की भी है।
यह व्यक्ति मर्यादा की सारी सीमा नाघ कर भारतीय यात्रियों को गाली देते हुए खुले आम भारत सरकार का अपमान कर रहा है। भारत का विदेश मंत्रालय और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास के अधिकारी इस व्यक्ति के असलियत का पता लगाकर कानूनी कार्यवाही करनी चाहिए और भारत जैसे उदार देश की गरिमा को बचाना चाहिए।
सस्ती लोकप्रियता के लिए भारत का किया जा रहा अपमान:-
केवल व्यूज और सस्ती लोकप्रियता के लिए वहां भारतीयों को तरह तरह से अकारण निशाना बनाया जा रहा है।
जिसका मर्जी होगा वो होटल में खाएगा जिसका मर्जी होगा ओ खुद पका कर खाएगा लोग षड्यंत्र में लगे हैं नेपाल में हिन्दू पर्यटक ना आए कोई किसी के दरवाजे पे सो गया तो किया जमीन थोड़े ना उठा ले जाएगा लेकिन खेल तो कुछ और चल रहा है।
दूसरे देश के बारे में बात करने से पहले अपनी हकीकत भी जानना चाहिए़। नेपाल सरकार को इस प्रकार अंतरराष्ट्रीय सौहार्द बिगाड़ने वाले के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्यवाही करनी चाहिए और भारत जैसे प्रभुत्व संपन्न देश के अपमान करने की छूट कभी नहीं दी जानी चाहिए।
लेखक
आचार्य डॉ. राधेश्याम द्विवेदी ,
पूर्व पुस्तकालय सूचनाधिकारी,
मकान नम्बर 2785, वार्ड नंबर 8
निकट : लिटिल फ्लावर स्कूल,आनन्द नगर,कटरा, बस्ती,PIN - 272001
मोबाइल नंबर +91 9412300183
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