Sunday, April 12, 2026

आस्था व विश्वास का केन्द्र है बाबा राम निहालदास की तपोभूमि (कुटी) उमरिया ✍️आचार्य डॉ राधे श्याम द्विवेदी


बस्ती जिले के दुबौलिया थाना क्षेत्र के सिद्ध पीठ बाबा राम निहाल दास की कुटी उमरिया में है। जहां प्रत्येक साल के दीपावली बाद यम द्वितीया पर विशेष पूजा का आयोजन होता है। नदी की बाढ़ से कभी भी मंदिर को नुकसान नहीं हुआ। एक बार बाढ़ आ गई थी पर वह मंदिर को स्पर्श कर वापस चली गई थी। कहा जाता है कि बाबा जी के गुरु किसी बात पर नाराज हो गए थे और 12 वर्ष तक निहाल बाबा को मंदिर और आश्रम की साफ सफाई करने का शाप दे गए थे। यह अवधि पूरा करने के बाद बाबा जी में और सिद्धियां आ गई थीं। यहां बाबा जी की समाधि और मूर्ति दोनों बनी हुई है।
यम द्वितिया पर लगे विशाल मेले में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रहती है। भोर से पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा के प्रतिमा का दर्शन कर मनोकामना पूरा होने की कामना करते हैं।
       महंत सुखराम दास के अनुसार बाबा निहाल दास यहीं पर बैठकर तपस्या किया करते थे। यहां इस मौके पर विशाल मेला भी लगता है। श्रद्धालु यहां सरयू नदी में स्नान करने के बाद बाबा निहाल दास को प्रसाद चढ़ाकर मन्नत मांगते हैं।

सरयू तट पर स्थित बाबा राम निहाल दास कुटी उमरिया में यम द्वितिया पर लगे विशाल मेले में बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी रहती है । भोर से श्रद्धालुओं के आने जाने का तांता लगा रहता है।
       
बाबा राम निहाल दास की कुटी के परिसर में विभिन्न प्रकार की दुकानों की सजावट और भीड़ देखते ही बन रही थी। क्षेत्र के लोग मुख्य रूप से खेती-किसानी से जुड़े लोहे के सामान जैसे कुदाल, फावड़ा, हंसियां, सिंघाड़ा आदि खरीदते नजर आए। बच्चों के लिए झूले और खिलौनों की दुकानों पर भी खासा जमावड़ा रहा। मंदिर की मान्यता है कि जो भी श्रद्धालु अपनी इच्छा से मंदिर में मनौती मानता है, उसे पुण्य अवश्य मिलता है। इसी विश्वास और श्रद्धा के साथ प्रत्येक वर्ष यम द्वितीया पर यह मेला आयोजित होता है।

लोग बाबा के प्रतिमा का दर्शन कर मनोकामना पूरा होने की कामना करते हैं।बाबा की कुटी पर भोर से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है जो शाम तक जारी रहता है । जिले के दूर दराज से आए व्यापारियों ने अपनी-अपनी दुकानें को लगाते हैं। मेले में आए लोग जमकर खरीदारी करते रहते हैं। मंदिर परिसर में पहुंचे श्रद्धालु बाबा राम निहाल दास की प्रतिमा का दर्शन भी करते हैं। मेले के दिन भंडारा का आयोजन भी होते रहते हैं। 
       मान्यता है कि जो लोग इस मंदिर पर पहुंचकर सच्चे मन से मनौती व मन्नत मांगते हैं उनकी मुराद अवश्य पूरी होती है। यहां पर प्रत्येक मंगलवार को मेला भी लगता है।मेले में आए श्रृद्धालुओं ने जमकर खरीदारी की। मिट्टी के बर्तन, सौंदर्य प्रसाधन, घर गृहस्थी के सामानों की दुकानें लोगों को आकर्षित करती रहीं। महिलाओं ने सूप,मचिया की खरीददारी की। बच्चों ने खिलौने व सिघाड़े का आनंद लिया। दुबौलिया के प्रभारी निरिक्षक पंकज कुमार सिंह अपने दल बल के साथ सुरक्षा में लगे रहे। स्थानीय लोगों के मुताबिक सैकड़ों वर्ष पूर्व यहां रामनिहाल दास नाम के एक पुजारी रहते थे। जिन्हें सिद्ध पुरुष माना जाता था। मान्यता है कि बाबा गंभीर से गंभीर रोग सिर्फ छू कर ठीक कर देते थे। बाबा ने यहां जीवित समाधि ली थी। बाबा के हाथ से स्थापित मंदिर नदी तट पर मौजूद है। लोग मंदिर की परिक्रमा कर मनौती मांगते हैं। प्रत्येक मेले में बस्ती के अलावा अंबेडकरनगर के लोग भी भारी संख्या में आते हैं।
    
 सिद्ध पीठ बाबा राम निहाल दास की कुटी और भक्तों की सुरक्षा के लिए यहां पुलिस चौकी भी स्थापित है।मेले की सुरक्षा में दुबौलिया पुलिस के अलावा कप्तानगंज, कलवारी, लालगंज, नगर की पुलिस के साथ यातायात पुलिस उपस्थित रहती है। 

प्रतापपुर इमलिया अम्बेडकरनगर में बाबा निहाल दास जी की एक और प्रसिद्ध तपस्थली 

अम्बेडकरनगर के कटेहरी क्षेत्र प्रतापपुर इमलिया में स्थित श्री बाबा निहाल दास जी की एक प्रसिद्ध तपस्थली दिव्य अलौकिक कुटिया है। यहां एक विशाल जलाशय के समीप जंगल में शिव जी पार्वती जी नंदी जी और हनुमान जी की दिव्य प्रतिमाएं और यज्ञ शाला भी स्थापित हैं। बाबा जी को उनके गुरु जी ने 12 साल मंदिर की साफ सफाई करने का शाप दिया था जिसे पूर्ण कर बाबा जी और दिव्यता के साथ चमक उठे थे।
 यहां प्रत्येक मंगलवार को मेला लगता है, यहाँ प्रतिदिन स्थानीय व दूरदराज के लोग अपनी अपनी मन्नतों को लेकर आया करते है और उनके आस्था विश्वास समर्पण भक्तिभाव के अनुरूप बाबा जी की कृपा आशीर्वाद से अवश्य पूर्ण होता है ऐसी अद्भुत मान्यताओं को लेकर यह तपस्थली काफी प्रचलित है। यहां भक्तजन अपने धार्मिक भावनाओं के आधार पर तरह-तरह के चढ़ावा करते है यह चारों तरफ जंगलो से घिरा हुआ एक ऐसा अलौकिक शक्ति से परिपूर्ण प्राकृतिक सौंदर्य से युक्त देव स्थल है जहाँ पहुँचने मात्र से कुछ पल व्यतीत करने से तनावों से मुक्त आत्मशान्ति अलौकिक आध्यात्मिक ऊर्जा का एहसास होता है। भौतिकतावाद के झंझावात से ग्रसित नाना प्रकार के दैहिक दैविक भौतिक समस्याओं से यदि उलझे हुए हो और आपको कोई मार्ग न दिखाई दे रहा हो चारों ओर अंधकार ही अंधकार नजर आ रहा हो तो धार्मिक भक्तिभावना से एक बार इस अलौकिक तपोस्थली पर आए दर्शन प्राप्त करे निश्चित रूप से समस्त समस्याओं से आपको निजात मिल जाएगी मनुष्य जीवन में आने वाले समस्त संघर्षों व विघ्न बाधाओं से डटकर सामना करने की सामर्थ्य प्राप्त होगी। धर्म अध्यात्म के गूढ़ रहस्यों से भरपूर महान संत बाबा निहाल दास जी के तपसाधना से ऊर्जावान्वित साधना भक्ति से परिपूर्ण अलौकिक ऊर्जा शक्ति का केन्द्र श्री बाबा जी की कुटिया के परम्परागत गद्दी पर आसीन परम पूज्यनीय महंत बाबा पराग दास जी है जिनके द्वारा नित्य प्रति आने वाले भक्तजनों के दुःख, संकटों का निवारण उनके द्वारा किए गए यज्ञशाला के हवनकुण्ड की भभूति प्रसाद प्रदान कर किया जाता है।

साहित्यिक और धार्मिक रुचि :- 

गारीः- 
चारि पदारथ देन हार यह नर तन सुर मुनि गाई जी। 
बिन सत्संग जात है बिरथा पुनि पुनि गोता खाई जी। 
काम क्रोध मद लोभ मोह यह असुर बड़े दुखदाई जी। 
पांचों संस्कार ये जानो तन में रहत सदाई जी। 
दम्भ पखण्ड कपट औ निद्रा आलस संघ जम्हुआई जी।५। 

माया द्वैत बासना नाना संग मन नाचे जाई जी। 
चिंता तन में चिता लगावै दुख चढ़ि बैठे आई जी। 
यह समाज आसुरी बंश की थकै न नेको भाई जी। 
महा जाल में फांसि लेत औ नर्क को देय पठाई जी। 
शान्ति शील संतोष दीनता प्रेम के हाल सुनाई जी।१०। 

क्षिमा दया सरधा औ हिम्मति सत्य समाधि लगाई जी। 
ज्ञान बिराग संग विश्वासौ लय में पहुँचौ धाई जी। 
परस्वारथ परमारथ दोनो कैसे कोउ करि पाई जी। 
देवासुर संग्राम जीतिये घट ही में चमकाई जी। 
हरि सुमिरन बिन जीति न पैहौ सुनिये सब मम भाई जी।१५। 

सतगुरु करि सुमिरन बिधि जानौ तब मन वश स्वै जाई जी। 
नाम खुलै हरि दर्शन लागैं खल सब चलैं पराई जी। 
ध्यान समाधि में पहुँचि जाव जब कर्म भर्म मिटि जाई जी। 
सबै देव मुनि संग बतलावैं हर्ष न हृदय समाई जी। 
दास निहाल सुरति औ शब्द क मारग अति सुखदाई जी।२०। 

दोहाः-

चिता के ऊपर बैठि कै, 
राम राम कहि जान। 
निहाल दास कहैं जारि तन, 
छोड़ि दीन हम प्रान।१। 
बास मिल्यो बैकुण्ठ में, 
आवा गमन मुकाम। 
या की गणना जगत में, 
बात मानिये आम।२। 

चौपाई:- 
नाम रूप लीला औ धामा। 
शून्य समाधि जानि निज जामा।१। 
मरै बासना निर्भय होवै। 
सो साकेत जाय सुख सोवै।२। 

दोहाः- 
जो जियतै में तय करै, 
सोई चतुर सुजान। 
नाहिं तो जनमै मरै, 
मानों बचन प्रमान।१। 

चौपाई:- 
बाबन बेर ठगावै जोई। 
बावन बीर कहावै सोई। 
धोका खाये बिन नहिं ज्ञाना। 
हम तो यह अपने मन माना। 
पानी दूध वहां बिलगाना। 
सुनतै खुलि गे आँखी काना। 
बचन हमार मानि यह लेना। 
सत्य नाम की सिक्षा देना। 
रेफ बिन्दु जो सब में ब्यापक। 
सब का जानो यह अध्यापक! 
या को जानि लेय जो कोई। ता को आवागमन न होई।६। 

दोहाः- 
नाम कि धुनि खुलि जाय जब, सुर मुनि दर्शन दैय। 
मुद मंगल ह्वै जाय तब, हरि निज पास में लेंय।। 
(सन्दर्भ :श्री राम-कृष्ण लीला भक्तामृत चरितावली' श्री परमहंस राममंगलदास जी द्वारा रचित प्रथम दिव्य ग्रन्थ।
(भगवान, देवी-देवता, ऋषि, मुनि, हर धर्म के पैगम्बर, सिद्ध, सन्त, पौराणिक तथा ऐतिहासिक महापुरुषों के द्वारा प्रकट होकर लिखवाये आध्यात्मिक पदों का दिव्य संग्रह ); ग्रन्थ - 1, भाग - २ दिसम्बर २००१।)

No comments:

Post a Comment