श्री घन श्याम दूबे जी ग्राम दुबौली दूबे के पावन यजमानत्व औरआचार्य अर्जुन त्रिपाठी जी के पावन सानिध्य में धर्ममय वातावरण के बीच तुलादान एवं श्री सत्यनारायण व्रत कथा का आयोजन दिनांक 12 मार्च 2026 को सम्पन्न हुआ।
यह समस्त अनुष्ठान वैदिक विधि-विधान से आचार्य अर्जुन त्रिपाठी जी द्वारा संपन्न कराया गया। पूजन के पूर्व भगवान श्रीविष्णु, श्रीगणेश एवं नवग्रहों का आवाहन कर श्रद्धा-भक्ति के साथ सत्यनारायण भगवान की कथा का श्रवण कराया गया, जिससे उपस्थित श्रद्धालुओं को धर्म, भक्ति और दान की महिमा का पावन संदेश प्राप्त हुआ।
शास्त्रों में तुलादान की महिमा का वर्णन करते हुए कहा गया है—
“तुलादानं महादानं सर्वपापप्रणाशनम्।
आयुरारोग्यसम्पत्तिं ददाति हरितोषणम्॥”
अर्थात् तुलादान महान दान है, जो समस्त पापों का नाश करता है तथा आयु, आरोग्य और समृद्धि प्रदान करते हुए भगवान विष्णु को प्रसन्न करता है।
आचार्य अर्जुन त्रिपाठी जी ने अपने आशीर्वचन में कहा कि दान, व्रत और कथा श्रवण से मनुष्य का जीवन पवित्र बनता है तथा भगवान की कृपा सदैव बनी रहती है। इस पावन अवसर पर ग्रामवासी एवं श्रद्धालुजन उपस्थित होकर धर्मलाभ प्राप्त करते हुए यजमान परिवार को मंगल कामनाएँ और आशीर्वाद प्रदान किए।
इस लिंक से इस पूजन का विजुवल को प्रत्यक्ष देखा जा सकता है।
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श्रेष्ठ दान तुला दान
यह 16 महादानों में से एक है, जो पापों के नाश, आरोग्य और सुख- समृद्धि के लिए किया जाता है। तुला दान एक ऐसी दान-प्रथा है जिसमें व्यक्ति अपने वजन के बराबर कोई वस्तु (जैसे सोना, चांदी, अनाज, या अन्य सामग्री) दान करता है. यह एक प्राचीन हिंदू अनुष्ठान है जो धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है. तुला दान करने से व्यक्ति के जीवन में सुख, समृद्धि और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
तुला दान एक प्राचीन हिंदू महादान प्रथा है, जिसमें व्यक्ति अपने शरीर के वजन के बराबर अनाज, गुड़, घी, चीनी या अन्य पवित्र वस्तुओं को तराजू (तुला) में तौलकर जरूरतमंदों, ब्राह्मणों या गौशाला में दान करता है।यह अनुष्ठान आध्यात्मिक प्रगति और दरिद्रता के निवारण का अंतिम उपाय माना जाता है।
यह शारीरिक स्वास्थ्य, सुख-समृद्धि, ग्रह दोष निवारण और पापों के नाश के लिए शुक्ल पक्ष में रविवार को किया जाता है।
कलिकाल में तुलादान के समान कोई दान नहीं है शास्त्रों में सोलह महादानों में पहला महादान तुलादान बताया है। पौराणिक काल में सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण ने तुलादान किया था। आधि-व्याधि, ग्रह-पीड़ा व दरिद्रता के निवारण के लिए तुलादान बहुत श्रेष्ठ माना जाता है।
तुलादान सनातन परंपरा का अत्यंत पुण्यदायी दान माना गया है। इसमें यजमान अपने शरीर के भार के बराबर अन्न, फल, गुड़, वस्त्र या अन्य द्रव्यों का दान करता है। शास्त्रों में कहा गया है कि तुलादान करने से मनुष्य के पापों का क्षय होता है तथा जीवन में सुख, समृद्धि और कल्याण की प्राप्ति होती है।
सामग्री:
तुला दान में व्यक्ति अपने शरीर के वजन के बराबर सामग्री का दान करता है।रत्न, चांदी, लोहा आदि धातु, घी, लवण (नमक), गुड़, चीनी, चंदन, कुमकुम, वस्त्र, सुगंधित द्रव्य, कपूर, फल व विभिन्न अन्नों से तुलादान किया जाता है। मुख्य रूप से अनाज (गेहूं, चावल, सात प्रकार के अन्न), गुड़, चावल, घी, तिल, चीनी, वस्त्र, फल, धातुएं (तांबा, लोहा या सोना-चांदी) शामिल हैं।
समय व स्थान:
पवित्र नदी के तट, मंदिर, या गौशाला परिसर में यह किया जाता है। माघ मास, पितृपक्ष या विशेष पर्वों पर यह अत्यंत फलदायी माना जाता है।
प्रक्रिया:
सबसे पहले तुला (तराजू) का पूजन किया जाता है, फिर एक तरफ व्यक्ति और दूसरी तरफ वस्तुओं को रखकर तोला जाता है।
लाभ: मान्यताओं के अनुसार, इससे स्वास्थ्य में सुधार होता है, अकाल मृत्यु का खतरा टलता है, और नवग्रह दोष दूर होते हैं।
किस किस का दान किया जाता है :-
गोमाता के लिए -
अपने वजन के बराबर सामग्री तोलकर गोमाता को दान करने से सबसे अधिक पुण्य की प्राप्ति होती है, क्योंकि गो को दिया गया दान ही सर्वश्रेष्ठ है। दान लेने की सबसे बड़ी और प्रथम अधिकारी गोमाता है। इसलिए हमको वर्ष में कम से कम एक बार तुला दान अवश्य करना चाहिए।
गुड़ का दान-
गुड़ का दान करने से पितरों को विशेष संतुष्टि प्राप्त होती है, इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है,साथ ही,घर में सुख शांति बनी रहती है, ऐसी मान्यता है कि गुड़ का दान करने से घर का क्लेश भी दूर हो जाता है।
नमक का दान-
शिवपुराण के अनुसार नमक का दान करने से बुरा समय दूर होता है और घर में सुख-समृद्धि आती है।
चोकर आटा, अन्न का दान-
चोकर आटा, अन्न दान बहुत शुभ माना जाता है, इससे घर में सुख-समृद्धि होती है।
खली का दान-
खली का दान करने से स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो सकता है। आपको बीमारी से छुटकारा मिल सकता है।
तेल का दान -
तेल का दान करने से व्यक्ति के रुके हुए कार्य जल्द बनने लग जाते हैं।
घी का दान-
घी का दान करते हैं, उनकी शारीरिक कमजोरियां दूर होती हैं और बीमारियों से मुक्ति मिलती है। दाता की उम्र बढ़ती है। इस लिंक से इस तुला दान का विजुवल को प्रत्यक्ष देखा जा सकता है।
https://www.facebook.com/reel/1259574279457001/
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